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सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स और व्यूज बढ़ाने का ऑफर पड़ सकता है भारी, रेवाड़ी पुलिस ने साइबर ठगी को लेकर किया अलर्ट
फेसबुक और इंस्टाग्राम पर कम कीमत में फॉलोअर्स व व्यूज बढ़ाने वाले विज्ञापनों से सावधान रहें; पुलिस ने OTP, UPI PIN और बैंकिंग जानकारी साझा न करने की सलाह दी।
रेवाड़ी पुलिस ने सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स और व्यूज बढ़ाने के नाम पर हो रही साइबर ठगी को लेकर लोगों को सतर्क किया है। पुलिस के मुताबिक ठग पहले छोटी रकम लेते हैं और बाद में वेरिफिकेशन या अतिरिक्त सेवाओं के नाम पर बार-बार पैसे मांग सकते हैं।
फॉलोअर्स और व्यूज बढ़ाने के नाम पर साइबर ठगी
सोशल मीडिया पर लोकप्रियता बढ़ाने की चाहत अब साइबर ठगों के लिए कमाई का नया जरिया बनती जा रही है। रेवाड़ी पुलिस ने फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर फॉलोअर्स या व्यूज बढ़ाने का दावा करने वाले विज्ञापनों को लेकर लोगों को सावधान किया है।
रेवाड़ी के पुलिस अधीक्षक (SP) हेमेंद्र कुमार मीना ने बताया कि कई विज्ञापनों में कम कीमत पर सोशल मीडिया फॉलोअर्स और व्यूज बढ़ाने का दावा किया जाता है। इन विज्ञापनों में संपर्क के लिए WhatsApp नंबर भी दिए जाते हैं।
छोटी रकम से शुरू होता है ठगी का खेल
SP हेमेंद्र कुमार मीना के अनुसार, ऐसे विज्ञापनों के जरिए साइबर ठग लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं। ठग पहले WhatsApp के माध्यम से संपर्क करते हैं और कम रकम में फॉलोअर्स या व्यूज बढ़ाने का लालच देते हैं।शुरुआती भुगतान मिलने के बाद ठग वेरिफिकेशन, अतिरिक्त फॉलोअर्स, व्यूज बढ़ाने या दूसरी सेवाओं के नाम पर बार-बार पैसे मांग सकते हैं। कई मामलों में रकम हासिल करने के बाद ठग संपर्क करना बंद कर देते हैं।
बैंकिंग और निजी जानकारी भी हो सकती है निशाने पर
पुलिस के मुताबिक, इस तरह की ठगी सिर्फ पैसे ऐंठने तक सीमित नहीं हो सकती। साइबर अपराधी पीड़ितों से बैंकिंग या निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश भी कर सकते हैं और बाद में उसका दुरुपयोग किया जा सकता है।
SP ने लोगों को चेतावनी दी कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाला हर विज्ञापन या प्रोफाइल भरोसेमंद नहीं होता।
ऑनलाइन भुगतान से पहले करें सत्यापन
हेमेंद्र कुमार मीना ने कहा कि किसी व्यक्ति या WhatsApp नंबर पर ऑनलाइन भुगतान करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करना बेहद जरूरी है।
उन्होंने लोगों से विशेष रूप से कहा कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ संवेदनशील जानकारी साझा न करें।
पुलिस के अनुसार, इन जानकारियों को किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए:
- OTP
- UPI PIN
- बैंक पासवर्ड
- बैंक अकाउंट की जानकारी
- अन्य गोपनीय व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी
साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत करें शिकायत
रेवाड़ी पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि वे इस तरह की साइबर ठगी का शिकार होते हैं तो बिना देरी किए शिकायत दर्ज कराएं।
पीड़ित राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन शिकायत cybercrime.gov.in पर दर्ज की जा सकती है। लोग अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर पुलिस स्टेशन में भी इसकी सूचना दे सकते हैं।
Key Highlights:
- रेवाड़ी पुलिस ने सोशल मीडिया फॉलोअर्स और व्यूज बढ़ाने वाले फर्जी ऑफर्स को लेकर अलर्ट जारी किया।
- फेसबुक और इंस्टाग्राम पर कम कीमत में सेवाओं का लालच दिया जा सकता है।
- ठग WhatsApp के जरिए लोगों से संपर्क कर सकते हैं।
- शुरुआती भुगतान के बाद वेरिफिकेशन या अतिरिक्त सेवाओं के नाम पर और पैसे मांगे जा सकते हैं।
- ठग बैंकिंग और निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश भी कर सकते हैं।
- OTP, UPI PIN, पासवर्ड और बैंक खाते की जानकारी किसी से साझा न करें।
- साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें।
- शिकायत cybercrime.gov.in पर भी दर्ज की जा सकती है।
FAQ Section:
सोशल मीडिया फॉलोअर्स बढ़ाने वाले विज्ञापनों से कैसे ठगी हो सकती है?
साइबर ठग कम कीमत में फॉलोअर्स या व्यूज बढ़ाने का दावा कर WhatsApp पर संपर्क कर सकते हैं। शुरुआती भुगतान के बाद वे वेरिफिकेशन या अतिरिक्त सेवाओं के नाम पर लगातार पैसे मांग सकते हैं।
क्या सोशल मीडिया पर दिखने वाला हर विज्ञापन भरोसेमंद होता है?
नहीं। रेवाड़ी पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाला हर विज्ञापन या प्रोफाइल विश्वसनीय नहीं होता। भुगतान करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करनी चाहिए।
साइबर ठगी में कौन-सी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए?
OTP, UPI PIN, पासवर्ड, बैंक अकाउंट की जानकारी और अन्य गोपनीय व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
साइबर ठगी होने पर किस नंबर पर शिकायत करें?
साइबर ठगी होने पर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत संपर्क किया जा सकता है।
साइबर अपराध की ऑनलाइन शिकायत कहां दर्ज करें?
पीड़ित cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर पुलिस स्टेशन में भी सूचना दी जा सकती है।
Conclusion:
सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स और व्यूज बढ़ाने के लालच में ऑनलाइन भुगतान करना लोगों को साइबर ठगी का शिकार बना सकता है। रेवाड़ी पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी ऐसे ऑफर पर भरोसा करने से पहले संबंधित व्यक्ति या नंबर की जांच करें और अपनी बैंकिंग या निजी जानकारी साझा न करें। ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 पर संपर्क करना और ऑनलाइन शिकायत दर्ज करना जरूरी है।
