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करनाल में राइस मिल पर छापे के बाद DFSC का तबादला, कांग्रेस ने उठाए सवाल; कारोबारी बोले- व्यापारियों को अपराधी न समझें
भाजपा नेता निशांत राणा की मिल की जांच और 5.38 करोड़ रुपये के चेक को लेकर विवाद, कांग्रेस ने निष्पक्ष जांच की मांग की
हरियाणा के करनाल में जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक मुकेश कुमार के तबादले को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने भाजपा नेता की राइस मिल पर छापे के बाद तबादले के समय पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा नेता और व्यापारियों ने आरोपों को खारिज करते हुए जांच की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है।
करनाल में DFSC के तबादले को लेकर राजनीतिक विवाद
करनाल: हरियाणा के करनाल में जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) मुकेश कुमार के तबादले को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह विवाद भाजपा नेता निशांत राणा की राइस मिल पर निरीक्षण के बाद सामने आया है। कांग्रेस ने निरीक्षण और अधिकारी के तबादले के बीच के समय पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच की मांग की है।
दूसरी ओर, भाजपा नेता निशांत राणा ने तबादले में अपनी किसी भूमिका से इनकार किया है। वहीं, मिल मालिकों और व्यापारियों ने कांग्रेस के आरोपों का विरोध करते हुए निरीक्षण के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस ने तबादले के समय पर उठाए सवाल
जिला युवा कांग्रेस के अध्यक्ष रजत लाठर ने आरोप लगाया कि उंचा समाना स्थित भाजपा नेता निशांत राणा की राइस मिल का निरीक्षण करने वाले अधिकारी का तबादला कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने इस घटनाक्रम में राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका जताते हुए छापे और उसके बाद हुए तबादले की जांच की मांग की।
लाठर ने यह भी दावा किया कि निरीक्षण के दौरान DFSC को करीब 5.38 करोड़ रुपये का चेक दिया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि यह चेक क्यों जारी किया गया और बाद में इसे वापस क्यों किया गया।
उन्होंने कहा कि वह इस मामले को लेकर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपेंगे। कांग्रेस नेता ने संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड की जांच और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की। उन्होंने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से भी मामले का संज्ञान लेने की अपील की।
भाजपा नेता निशांत राणा ने आरोपों से किया इनकार
भाजपा नेता निशांत राणा ने DFSC के तबादले में किसी भी तरह की भूमिका होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने निर्धारित कस्टम-मिल्ड राइस (CMR) का लगभग 68 प्रतिशत भारतीय खाद्य निगम (FCI) को सौंप दिया था।
राणा के मुताबिक, FCI के गोदामों में जगह की कमी के कारण जिले के उन 138 मिलरों में वह भी शामिल थे, जिनका बचा हुआ चावल जमा नहीं हो सका। उन्होंने दावा किया कि मिलरों ने मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों सहित विभिन्न स्तरों पर अपनी समस्या उठाई थी, लेकिन FCI ने लंबित चावल स्वीकार नहीं किया।
राणा ने कहा कि अधिकारी का तबादला नियमित प्रक्रिया का हिस्सा था और इससे उनका कोई संबंध नहीं है।
व्यापारियों ने देर रात निरीक्षण पर जताई आपत्ति
इस विवाद के बीच मिल मालिकों और व्यापारियों ने कांग्रेस नेता के आरोपों का विरोध किया है। उनका कहना है कि व्यापारिक समुदाय को बदनाम करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।
कारोबारियों ने देर रात करीब एक बजे मिल का निरीक्षण किए जाने पर भी सवाल उठाए। उनका तर्क है कि व्यापारी करदाता होने के साथ-साथ लोगों को रोजगार भी देते हैं, इसलिए उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।
व्यापारियों ने निरीक्षण की प्रक्रिया को अनुचित बताते हुए संबंधित कार्रवाई का बचाव किया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में जांच के निष्कर्ष या किसी पक्ष के खिलाफ आरोपों की आधिकारिक पुष्टि का विवरण नहीं है।
अब जांच और वित्तीय रिकॉर्ड पर टिकी नजरें
करनाल में यह मामला अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ प्रशासनिक कार्रवाई और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की मांग तक पहुंच गया है। कांग्रेस ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच पर जोर दिया है, जबकि भाजपा नेता ने तबादले से किसी भी संबंध से इनकार किया है।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर चेक जारी होने और वापस किए जाने की परिस्थितियों तथा अधिकारी के तबादले के कारणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित प्रशासनिक पक्ष का आधिकारिक बयान सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

