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पानीपत की कंबल इंडस्ट्री पर मंदी की मार, घरेलू मांग 50% घटी; उत्पादन में 35% तक गिरावट
पॉलिएस्टर धागे की कीमत 105 रुपये से बढ़कर 155 रुपये प्रति किलो तक पहुंची, बढ़ती लागत और कमजोर बिक्री से कारोबारी परेशान
हरियाणा के पानीपत में कंबल उद्योग इस सीजन गंभीर मंदी का सामना कर रहा है। घरेलू मांग में करीब 50 प्रतिशत गिरावट और उत्पादन में 30 से 35 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों, महंगाई और भुगतान में देरी ने निर्माताओं की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
पानीपत के कंबल उद्योग पर दोहरी मार
पानीपत: देश के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों में शामिल पानीपत की कंबल इंडस्ट्री इन दिनों कारोबार में सुस्ती से जूझ रही है। एक ओर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष के बीच अनिश्चितता का असर बताया जा रहा है, वहीं घरेलू बाजार में भी कंबलों की मांग में करीब 50 प्रतिशत तक गिरावट आई है।
उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के अनुसार, मौजूदा सीजन में उत्पादन लगभग 30 से 35 प्रतिशत घट गया है। कच्चे माल की महंगाई, बढ़ती निर्माण लागत और उपभोक्ताओं की कमजोर खरीद क्षमता के कारण निर्माताओं पर दबाव बढ़ रहा है।
पॉलिएस्टर धागे की कीमतों में भारी उछाल
कंबल उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में पॉलिएस्टर धागे की बढ़ती कीमत शामिल है। उद्योग प्रतिनिधियों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण धागे की लागत भी बढ़ी है।
पिछले साल जिस धागे की कीमत लगभग 100 से 105 रुपये प्रति किलो थी, वह अब करीब 155 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इससे कंबल बनाने की लागत बढ़ी है और बाजार में तैयार उत्पादों की कीमतों पर भी असर पड़ा है।
बापौली इंडस्ट्रियल जोन के अध्यक्ष और ऑल इंडिया इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के संस्थापक सदस्य नवीन बंसल के अनुसार, इस साल सामान्य मिंक कंबलों की कीमत बढ़कर लगभग 210 से 240 रुपये प्रति किलो हो गई है।
पीक सीजन में भी उत्पादन और बिक्री कमजोर
नवीन बंसल ने बताया कि आमतौर पर यह कंबल उद्योग के लिए सबसे व्यस्त सीजन होता है, लेकिन इस बार स्थिति अलग है। उनके मुताबिक, उत्पादन में करीब 30 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि घरेलू मांग लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो गई है।
उन्होंने कहा कि महंगाई ने उपभोक्ताओं की खरीदने की क्षमता को प्रभावित किया है। कीमतें बढ़ने के कारण ग्राहक खरीदारी में सावधानी बरत रहे हैं, जिसका सीधा असर निर्माताओं के कारोबार पर पड़ रहा है।
देश की कंबल जरूरतों में पानीपत की बड़ी हिस्सेदारी
पानीपत मिंक, फ्लैनो और पोलर कंबलों के उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां करीब 160 विनिर्माण इकाइयां हैं, जो देश की घरेलू कंबल मांग का लगभग 99 प्रतिशत पूरा करने में योगदान देती हैं।
उद्योग ने पहले चीनी आयात से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना किया था, लेकिन समय के साथ पानीपत ने खुद को कंबल निर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया। मौजूदा मंदी ने अब इस स्थापित उद्योग के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
स्टॉकिस्टों की सतर्कता से कारोबार प्रभावित
पानीपत पोलर ब्लैंकेट एसोसिएशन के सचिव और हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की पानीपत इकाई के उपाध्यक्ष राम प्रताप गुप्ता ने बताया कि उद्योग की बिक्री मुख्य रूप से चार माध्यमों पर निर्भर करती है—स्टॉकिस्ट, शादी का सीजन, त्योहार और ठंड का मौसम।
हालांकि, धागे की कीमतों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण स्टॉकिस्ट नए ऑर्डर देने में सतर्कता बरत रहे हैं। इसके अलावा, शादी के सीजन में कमजोर बिक्री और रंगों, मजदूरी तथा अन्य कच्चे माल की बढ़ती लागत ने कारोबार को प्रभावित किया है।
गुप्ता के अनुसार, मौसम की अनुकूल परिस्थितियां न होने से भी कंबलों की मांग पर असर पड़ा है।
भुगतान में देरी से नकदी का संकट
कंबल निर्माताओं की परेशानी केवल कम बिक्री और बढ़ती लागत तक सीमित नहीं है। भुगतान मिलने में देरी ने भी उद्योग के नकदी प्रवाह को प्रभावित किया है।
राम प्रताप गुप्ता के मुताबिक, पहले निर्माताओं को आमतौर पर 35 से 40 दिनों के भीतर भुगतान मिल जाता था, लेकिन अब कई मामलों में लगभग दो महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है।
भुगतान में इस देरी से कारोबार चलाने, कच्चा माल खरीदने और नियमित खर्च पूरे करने में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
आगे क्या है उद्योग की चुनौती?
पानीपत का कंबल उद्योग इस समय घटती मांग, महंगे कच्चे माल, स्टॉकिस्टों की सतर्कता और भुगतान में देरी जैसी कई समस्याओं से जूझ रहा है। उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, बिक्री में सुधार और कच्चे माल की कीमतों में स्थिरता आने से निर्माताओं को राहत मिल सकती है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष विनोद धमीजा का बयान अधूरा है। इसलिए उनके विचारों या उद्योग के भविष्य को लेकर उनकी प्रतिक्रिया के बारे में कोई अतिरिक्त दावा शामिल नहीं किया गया है।

