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पंजाब चुनाव 2027 से पहले वाल्मीकि-मजहबी सिख समुदाय की बड़ी मांग, 15 SC सीटों पर टिकट देने की अपील
वाल्मीकि और मजहबी सिख नेताओं ने सभी राजनीतिक दलों से 117 विधानसभा टिकटों में 12.5% प्रतिनिधित्व और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 34 सीटों में से कम से कम 15 सीटें देने की मांग उठाई।
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले वाल्मीकि और मजहबी सिख समुदाय के नेताओं ने राजनीतिक दलों में उचित प्रतिनिधित्व की मांग तेज कर दी है। नेताओं का कहना है कि टिकट वितरण में उनकी आबादी और समुदायों के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
पंजाब चुनाव 2027 से पहले टिकटों में हिस्सेदारी की मांग तेज
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले वाल्मीकि और मजहबी सिख समुदाय के नेताओं ने राजनीतिक दलों से चुनावी टिकटों में उचित हिस्सेदारी देने की मांग उठाई है। नेताओं की मांग है कि राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों के चयन में प्रत्येक राजनीतिक पार्टी इन समुदायों को कम से कम 12.5 प्रतिशत प्रतिनिधित्व दे।
इसके अलावा, नेताओं ने अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित 34 विधानसभा सीटों में से कम से कम 15 सीटें इन समुदायों को आवंटित करने की मांग की है। उनका तर्क है कि उम्मीदवारों के चयन में समुदायों की आबादी और आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण से जुड़े प्रावधानों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
किन नेताओं ने उठाई मांग?
इस मांग को प्रमुखता से उठाने वालों में जंडियाला से कांग्रेस के पूर्व विधायक सुखविंदर सिंह डैनी और भारतीय जनता पार्टी के पंजाब प्रदेश एससी सेल के उपाध्यक्ष विपन सबरवाल शामिल हैं।
सुखविंदर सिंह डैनी, जो ऑल इंडिया मजहबी सिख वेलफेयर एसोसिएशन का भी प्रतिनिधित्व करते हैं, ने कहा कि संगठनात्मक पदों और चुनावी उम्मीदवारों के चयन—दोनों में समान और उचित प्रतिनिधित्व समुदाय की जायज मांग है।
वहीं, जालंधर के वाल्मीकि नेता विपन सबरवाल ने आरक्षित सीटों में से 15 सीटें दिए जाने की मांग को उचित बताया। उनके अनुसार, आरक्षण के भीतर उप-वर्गीकरण की नीति के तहत समुदाय की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने पर विचार किया जाना चाहिए।
वाल्मीकि जयंती के दौरान बढ़ी राजनीतिक सक्रियता
वाल्मीकि जयंती के अवसर पर समुदाय की राजनीतिक मांगों को भी बल मिला है। 26 अक्टूबर को जयंती से पहले 24 अक्टूबर को पंजाब के कई शहरों में शोभायात्राएं निकाली गईं।
इस वर्ष दोआबा क्षेत्र में वाल्मीकि जयंती से जुड़े कार्यक्रम अधिक प्रमुखता से सामने आए। जालंधर में आयोजित कार्यक्रमों में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और नकोदर में आयोजित कार्यक्रमों में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने भी हिस्सा लिया।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, चुनावों से पहले समुदाय के नेताओं की सक्रियता का उद्देश्य राजनीतिक दलों को अपनी चुनावी अहमियत और प्रतिनिधित्व की मांग का एहसास कराना है।
34 आरक्षित सीटों में से 15 सीटों की मांग का क्या मतलब है?
पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं, जिनमें से 34 अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं।
समुदाय के नेताओं की मांग है कि इन 34 आरक्षित सीटों में से कम से कम 15 सीटें वाल्मीकि और मजहबी सिख समुदायों के उम्मीदवारों को दी जाएं। यह संख्या कुल SC-आरक्षित सीटों का लगभग 44 प्रतिशत है।
इसके अलावा, सभी 117 सीटों पर 12.5 प्रतिशत टिकटों की मांग का अर्थ है कि प्रत्येक राजनीतिक दल लगभग 15 उम्मीदवार इन समुदायों से उतारे। इस मांग में सामान्य श्रेणी की सीटों से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार भी शामिल हो सकते हैं।
हालांकि, ये राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांगें हैं, न कि अपने-आप लागू होने वाला कानूनी आरक्षण।
2011 की जनगणना में क्या थी SC आबादी?
2011 की जनगणना के अनुसार, पंजाब में अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 88.6 लाख थी, जो राज्य की कुल आबादी का करीब 31.9 प्रतिशत थी।
जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक:
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मजहबी सिख: लगभग 26.34 लाख
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वाल्मीकि समुदाय: लगभग 8.67 लाख
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आदि धर्मी समुदाय: लगभग 10.17 लाख
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रविदासिया समुदाय: लगभग 20.78 लाख
इन आंकड़ों के आधार पर समुदाय के नेता राजनीतिक प्रतिनिधित्व में आबादी के अनुपात को अधिक महत्व देने की मांग कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उप-वर्गीकरण पर चर्चा तेज
अगस्त 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में राज्यों के अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण करने के अधिकार को बरकरार रखा था। इस फैसले के बाद अनुसूचित जातियों के भीतर लाभों के वितरण और प्रतिनिधित्व को लेकर बहस को नई राजनीतिक अहमियत मिली।
हालांकि, सरकारी नौकरियों या शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण और राजनीतिक दलों की ओर से विधानसभा चुनाव के टिकट बांटना अलग-अलग विषय हैं। सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान अपने-आप राजनीतिक दलों के टिकट वितरण पर लागू नहीं हो जाता।
ऐसे में 2027 के चुनावों से पहले उठी यह मांग राजनीतिक दलों के उम्मीदवार चयन और पंजाब में विभिन्न SC समुदायों के प्रतिनिधित्व पर चर्चा को और तेज कर सकती है।
Key Highlights
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पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले वाल्मीकि-मजहबी सिख नेताओं ने टिकटों में उचित हिस्सेदारी मांगी।
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सभी 117 विधानसभा सीटों पर 12.5 प्रतिशत टिकट देने की मांग।
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SC के लिए आरक्षित 34 सीटों में से कम से कम 15 सीटें देने की अपील।
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सुखविंदर सिंह डैनी और विपन सबरवाल मांग उठाने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल।
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2011 की जनगणना के अनुसार पंजाब की लगभग 31.9 प्रतिशत आबादी SC समुदायों से थी।
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सुप्रीम कोर्ट के अगस्त 2024 के फैसले के बाद SC उप-वर्गीकरण का मुद्दा राजनीतिक चर्चा में अहम हुआ।
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टिकटों में हिस्सेदारी की मांग राजनीतिक है; सरकारी आरक्षण नियम इसे स्वतः लागू नहीं करते।
FAQ Section
1. पंजाब में वाल्मीकि और मजहबी सिख समुदाय क्या मांग कर रहे हैं?
समुदाय के नेता सभी 117 विधानसभा टिकटों में 12.5 प्रतिशत प्रतिनिधित्व और SC के लिए आरक्षित 34 सीटों में से कम से कम 15 सीटें देने की मांग कर रहे हैं।
2. पंजाब विधानसभा में SC के लिए कितनी सीटें आरक्षित हैं?
पंजाब विधानसभा की कुल 117 सीटों में से 34 सीटें अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं।
3. 15 आरक्षित सीटों की मांग कितने प्रतिशत के बराबर है?
34 आरक्षित सीटों में से 15 सीटें लगभग 44 प्रतिशत होती हैं।
4. इस मांग को कौन से नेता उठा रहे हैं?
पूर्व कांग्रेस विधायक सुखविंदर सिंह डैनी और भाजपा के पंजाब एससी सेल के उपाध्यक्ष विपन सबरवाल इस मांग को प्रमुखता से उठा रहे हैं।
5. क्या सरकारी नौकरियों में SC उप-वर्गीकरण का फैसला राजनीतिक टिकटों पर भी लागू होता है?
नहीं। सरकारी नौकरियों में आरक्षण और राजनीतिक दलों द्वारा उम्मीदवारों को टिकट देना अलग-अलग विषय हैं। टिकटों में 12.5 प्रतिशत या 15 सीटों की हिस्सेदारी फिलहाल समुदाय के नेताओं की राजनीतिक मांग है।
Conclusion
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले वाल्मीकि और मजहबी सिख समुदायों की टिकटों में उचित हिस्सेदारी की मांग राजनीतिक चर्चा का महत्वपूर्ण मुद्दा बनती जा रही है। नेताओं का जोर आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व और SC-आरक्षित सीटों के भीतर उचित हिस्सेदारी पर है। अब देखना होगा कि कांग्रेस, भाजपा और अन्य राजनीतिक दल उम्मीदवारों के चयन के दौरान इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं।

