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कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन और शिक्षाओं पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी, त्याग और समानता के संदेश पर जोर
22 और 23 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में विद्वानों ने गुरु गोबिंद सिंह जी की विरासत, गुरबाणी और मानवीय मूल्यों पर रखे विचार; खालसा पंथ को समानता और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बताया
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में श्री गुरु गोबिंद सिंह चेयर की ओर से ‘श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन, गुरबाणी और विरासत’ विषय पर दो दिवसीय बहुविषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। 22 और 23 अक्टूबर को हुए कार्यक्रम में वक्ताओं ने गुरु गोबिंद सिंह जी के त्याग, साहस, मानवता की रक्षा और खालसा पंथ के समानता आधारित सिद्धांतों पर प्रकाश डाला।
हरियाणा की कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में श्री गुरु गोबिंद सिंह चेयर की ओर से श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन, गुरबाणी और विरासत पर दो दिवसीय बहुविषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। 22 और 23 अक्टूबर को हुए इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन-दर्शन, मानवीय मूल्यों और समाज के प्रति उनके योगदान पर विचार साझा किए।
समापन सत्र में वक्ताओं ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन त्याग, साहस, दृढ़ संकल्प और मानवता की रक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से गुरु जी की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने की अपील की।
गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन त्याग और साहस की मिसाल
श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति करतार सिंह धीमान ने समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन त्याग, साहस, संघर्ष और मानवता की रक्षा के लिए समर्पण का उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर धर्म, मानवता और समाज की रक्षा जैसे व्यापक उद्देश्यों के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
वक्ताओं ने गुरु जी के जीवन से प्रेरणा लेते हुए मानवीय मूल्यों, साहस और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया।
खालसा पंथ समानता और सामूहिक निर्णय का प्रतीक
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार वीरेंद्र पाल ने कहा कि खालसा केवल एक धार्मिक पहचान नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों और सामूहिक निर्णय लेने की परंपरा का भी प्रतिनिधित्व करता है।
उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना को समानता, स्वतंत्र विचार, ज्ञान और सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांतों से जोड़ते हुए कहा कि ये मूल्य आज भी समाज के लिए प्रासंगिक हैं।
उनके अनुसार, गुरु गोबिंद सिंह जी की शिक्षाएं लोगों को समानता, आपसी सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं।
गुरु जी की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने की अपील
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता हरसिमरन सिंह रंधावा ने उपस्थित लोगों से गुरु गोबिंद सिंह जी की शिक्षाओं और मानवीय मूल्यों को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने गुरु जी की विरासत को केवल ऐतिहासिक स्मृति तक सीमित न रखते हुए उनके विचारों को व्यवहार में उतारने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य गुरु जी के जीवन और गुरबाणी से जुड़े विचारों पर चर्चा करना तथा उनकी शिक्षाओं की वर्तमान समय में प्रासंगिकता को समझना था।
योद्धा और लेखक के गुणों का संगम थे गुरु गोबिंद सिंह जी
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के डीन एकेडमिक अफेयर्स राकेश कुमार ने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी के व्यक्तित्व में योद्धा और लेखक, दोनों के गुण मौजूद थे। हालांकि, उनका योगदान इन दोनों भूमिकाओं से कहीं अधिक व्यापक था।
वक्ताओं के विचारों में गुरु जी के बहुआयामी व्यक्तित्व, आध्यात्मिक विरासत, सामाजिक दृष्टिकोण और मानवीय आदर्शों को प्रमुखता दी गई।
दो दिवसीय संगोष्ठी ने गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन और विचारों को विभिन्न शैक्षणिक दृष्टिकोणों से समझने का अवसर प्रदान किया।
Key Highlights
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कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में 22 और 23 अक्टूबर को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई।
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कार्यक्रम का आयोजन श्री गुरु गोबिंद सिंह चेयर ने किया।
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संगोष्ठी का विषय गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन, गुरबाणी और विरासत था।
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करतार सिंह धीमान ने गुरु जी के त्याग, साहस और मानवता की रक्षा के संदेश पर जोर दिया।
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रजिस्ट्रार वीरेंद्र पाल ने खालसा पंथ को समानता और सामूहिक निर्णय के मूल्यों से जोड़ा।
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मुख्य वक्ता हरसिमरन सिंह रंधावा ने गुरु जी की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने की अपील की।
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डीन एकेडमिक अफेयर्स राकेश कुमार ने गुरु जी के योद्धा और लेखक के बहुआयामी व्यक्तित्व का उल्लेख किया।
FAQ Section
1. कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में संगोष्ठी कब आयोजित हुई?
यह दो दिवसीय संगोष्ठी 22 और 23 अक्टूबर को आयोजित की गई।
2. संगोष्ठी का विषय क्या था?
इसका विषय ‘श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन, गुरबाणी और विरासत’ था।
3. गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन के किन मूल्यों पर चर्चा हुई?
वक्ताओं ने त्याग, साहस, दृढ़ संकल्प, मानवता की रक्षा, समानता और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों पर जोर दिया।
4. खालसा पंथ के बारे में क्या विचार रखे गए?
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार वीरेंद्र पाल ने खालसा पंथ को समानता, स्वतंत्र विचार, ज्ञान और सामूहिक निर्णय की परंपरा से जुड़ा बताया।
5. संगोष्ठी के मुख्य वक्ता कौन थे?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हरसिमरन सिंह रंधावा मुख्य वक्ता थे।
6. गुरु गोबिंद सिंह जी के व्यक्तित्व पर किसने विचार रखे?
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के डीन एकेडमिक अफेयर्स राकेश कुमार ने गुरु जी के योद्धा और लेखक के गुणों का उल्लेख किया।
Conclusion
कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन, गुरबाणी और विरासत के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने उनके त्याग, साहस, मानवता की रक्षा और समानता के संदेश को आज भी प्रासंगिक बताया।

