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मोहाली में कभी बॉल बॉय थे हार्दिक सिंह, 15 साल बाद भारतीय हॉकी टीम के उपकप्तान बनकर लौटे उसी मैदान पर
14 साल की उम्र में हॉकी खिलाड़ियों को देखकर बड़े सपने संजोने वाले हार्दिक सिंह आज भारतीय टीम के उपकप्तान हैं; दादा से मिली ट्रेनिंग और परिवार के सपनों ने बनाया सफल खिलाड़ी
भारतीय हॉकी टीम के उपकप्तान हार्दिक सिंह का मोहाली के साथ खास रिश्ता है। वर्ष 2011 में वह हॉकी इंडिया लीग के दौरान इसी मैदान पर बॉल बॉय हुआ करते थे। करीब 15 साल बाद अब वह एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए उसी मैदान पर लौटे हैं।
कभी मैदान के किनारे खड़े होकर बड़े हॉकी खिलाड़ियों को हैरानी और उत्साह से देखने वाला एक किशोर आज भारतीय हॉकी टीम का उपकप्तान बन चुका है। यह कहानी है हार्दिक सिंह की, जिन्होंने अपने खेल और मेहनत से भारतीय हॉकी में खास पहचान बनाई है।
हार्दिक सिंह के लिए मोहाली का ओलंपियन बलबीर सिंह सीनियर इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम सिर्फ एक खेल का मैदान नहीं, बल्कि उनके सफर की यादों से जुड़ी जगह है। वर्ष 2011 में, जब वह महज 14 साल के थे, तब हॉकी इंडिया लीग के मुकाबलों के दौरान यहां बॉल बॉय के रूप में काम करते थे। उस समय मैदान पर खेलने वाले खिलाड़ियों को देखकर उन्होंने भी बड़े स्तर पर हॉकी खेलने का सपना देखा था।
करीब 15 साल बाद हार्दिक उसी मैदान पर भारतीय टीम के उपकप्तान के रूप में लौटे हैं। इस बार वह दर्शक या बॉल बॉय नहीं, बल्कि देश का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हैं।
14 साल की उम्र में देखा था बड़ा सपना
हार्दिक सिंह ने द ट्रिब्यून से बातचीत में अपने पुराने दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 में हॉकी इंडिया लीग के दौरान वह मोहाली में बॉल बॉय थे और मैदान पर खेल रहे खिलाड़ियों को बड़े गौर से देखते थे।
हार्दिक के मुताबिक, उस समय उन्हें लगता था कि शायद वह राज्य स्तर तक हॉकी खेल पाएंगे। उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि एक दिन भारतीय टीम के उपकप्तान बनेंगे और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।
उनका यह सफर बताता है कि खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रतिभा के साथ लगातार अभ्यास, अनुशासन और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण भी जरूरी है।
ऑस्ट्रेलियाई हॉकी दिग्गज जेमी ड्वायर से मुलाकात भी यादगार
हार्दिक सिंह ने मोहाली में अपने शुरुआती दिनों की एक और याद साझा की। उन्होंने बताया कि उस दौरान उनकी मुलाकात ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज हॉकी खिलाड़ी जेमी ड्वायर से हुई थी।
हार्दिक ने उनसे तस्वीर खिंचवाने का अनुरोध किया था। इस मुलाकात के दौरान ड्वायर ने उम्मीद जताई थी कि एक दिन हार्दिक भी ऐसे बड़े टूर्नामेंट में खेलेंगे।
हार्दिक के लिए यह बात प्रेरणादायक रही। वर्षों बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना उस पुराने अनुभव को और खास बना देता है।
जालंधर के खुुसरोपुर गांव से शुरू हुआ हॉकी का सफर
हार्दिक सिंह का हॉकी सफर जालंधर के खुुसरोपुर गांव से शुरू हुआ। वह अपने दादा प्रीतम सिंह के साथ मैदान पर जाते थे और उन्हीं के मार्गदर्शन में अभ्यास करते थे।
हॉकी के प्रति उनका समर्पण बचपन से ही दिखाई देने लगा था। वह कई बार परिवार में शादी समारोहों में शामिल होने के बजाय अभ्यास को प्राथमिकता देते थे, ताकि उनकी ट्रेनिंग छूट न जाए।
लगातार अभ्यास और खेल के प्रति जुनून ने उन्हें आगे बढ़ने में मदद की। आज उनका नाम भारतीय हॉकी के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल है।
पिता का सपना था घर में सजें ओलंपिक के छल्ले
हार्दिक सिंह के पिता वरिंदरप्रीत सिंह राय पंजाब पुलिस में पुलिस अधीक्षक (SP) हैं। उन्होंने अपने बेटे के खेल सफर के पीछे छिपे पारिवारिक सपने के बारे में बताया।
उनकी इच्छा थी कि उनके घर में ओलंपिक के छल्ले सजें। वह खुद इस सपने को पूरा नहीं कर सके, इसलिए उन्हें उम्मीद थी कि हार्दिक हॉकी में सर्वोच्च स्तर तक पहुंचकर यह सपना पूरा करेंगे।
हार्दिक का परिवार पहले से ही हॉकी से जुड़ा रहा है। वह गुरमेल सिंह के ग्रैंड-न्यूफ्यू हैं, जो 1980 के मॉस्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य थे।
इस तरह हार्दिक के सफर में पारिवारिक विरासत, बचपन की मेहनत और बड़े खिलाड़ियों से मिली प्रेरणा की अहम भूमिका रही है।
Key Highlights
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हार्दिक सिंह वर्ष 2011 में 14 साल की उम्र में मोहाली में हॉकी इंडिया लीग के दौरान बॉल बॉय थे।
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करीब 15 साल बाद वह उसी स्टेडियम में भारतीय टीम के उपकप्तान बनकर लौटे।
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वह एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
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ऑस्ट्रेलियाई हॉकी दिग्गज जेमी ड्वायर से मुलाकात उनके लिए प्रेरणादायक रही।
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हार्दिक ने जालंधर के खुुसरोपुर गांव में अपने दादा प्रीतम सिंह के मार्गदर्शन में हॉकी का अभ्यास शुरू किया।
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उनके पिता वरिंदरप्रीत सिंह राय पंजाब पुलिस में एसपी हैं।
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हार्दिक के ग्रैंड-न्यूफ्यू गुरमेल सिंह 1980 मॉस्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा थे।
FAQ Section
1. हार्दिक सिंह कौन हैं?
हार्दिक सिंह भारतीय पुरुष हॉकी टीम के उपकप्तान हैं। उन्होंने अपने खेल प्रदर्शन और मेहनत से राष्ट्रीय टीम में महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया है।
2. हार्दिक सिंह मोहाली में बॉल बॉय कब बने थे?
वर्ष 2011 में, जब उनकी उम्र 14 साल थी, तब वह मोहाली के ओलंपियन बलबीर सिंह सीनियर इंटरनेशनल हॉकी स्टेडियम में हॉकी इंडिया लीग के दौरान बॉल बॉय थे।
3. हार्दिक सिंह के हॉकी करियर की शुरुआत कहां से हुई?
उनका हॉकी सफर जालंधर जिले के खुुसरोपुर गांव से शुरू हुआ। उनके दादा प्रीतम सिंह ने उन्हें अभ्यास में मार्गदर्शन दिया।
4. हार्दिक सिंह के पिता क्या करते हैं?
उनके पिता वरिंदरप्रीत सिंह राय पंजाब पुलिस में पुलिस अधीक्षक (SP) हैं।
5. हार्दिक सिंह का ओलंपिक से क्या पारिवारिक संबंध है?
हार्दिक सिंह के ग्रैंड-न्यूफ्यू गुरमेल सिंह वर्ष 1980 के मॉस्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य थे।
Conclusion
हार्दिक सिंह का सफर इस बात की मिसाल है कि बचपन में देखा गया सपना मेहनत और अनुशासन के दम पर हकीकत बन सकता है। मोहाली में 14 साल की उम्र में बॉल बॉय के रूप में खिलाड़ियों को देखने से लेकर उसी मैदान पर भारतीय टीम के उपकप्तान के रूप में लौटने तक का उनका सफर प्रेरणादायक है। दादा से मिली सीख, पिता का सपना और हॉकी के प्रति उनका समर्पण उनकी सफलता की कहानी को खास बनाते हैं।


