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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में ‘हिंदी लघुकथा संचयन’ पर संगोष्ठी, डॉ. अशोक भाटिया ने साझा किए साहित्य के नए आयाम
साहित्य अकादमी से प्रकाशित संकलन और समकालीन हिंदी लघुकथा की प्रासंगिकता पर हुई चर्चा, विद्यार्थियों ने भी किया संवाद
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में ‘हिंदी लघुकथा संचयन’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अशोक भाटिया ने लघुकथा की सामाजिक भूमिका, साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित संकलन और समकालीन हिंदी साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में ‘हिंदी लघुकथा संचयन’ पर संगोष्ठी, डॉ. अशोक भाटिया ने साझा किए साहित्य के नए आयाम
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से ‘हिंदी लघुकथा संचयन’ विषय पर एक विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हरियाणा के वरिष्ठ कथाकार डॉ. अशोक भाटिया ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लेते हुए हिंदी लघुकथा की साहित्यिक महत्ता और समकालीन समाज में उसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की।
सामाजिक यथार्थ को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती है लघुकथा
अपने संबोधन में डॉ. अशोक भाटिया ने कहा कि लघुकथा ऐसी साहित्यिक विधा है, जो कम शब्दों में सामाजिक यथार्थ, समकालीन परिस्थितियों और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त करती है। उन्होंने कहा कि यह विधा तथ्यपरकता और सामाजिक सरोकारों से गहराई से जुड़ी हुई है।
‘हिंदी लघुकथा संचयन’ की विशेषताओं पर डाली रोशनी

विद्यार्थियों से किया संवाद
कार्यक्रम के दौरान डॉ. भाटिया ने विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए कहा कि लघुकथा का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है। उन्होंने बताया कि यह विधा भावनात्मक गहराई और तथ्यात्मक प्रामाणिकता का प्रभावशाली संतुलन प्रस्तुत करती है, जिससे पाठकों के बीच इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
हिंदी साहित्यिक पत्रिकाओं के योगदान पर भी चर्चा
उन्होंने समकालीन हिंदी साहित्य के विकास में प्रमुख साहित्यिक पत्रिकाओं की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। इस दौरान उन्होंने ‘आलोचना’, ‘वागर्थ’, ‘हंस’, ‘कथादेश’, ‘व्यंग्य यात्रा’ और ‘नई धारा’ जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाओं के योगदान का विशेष उल्लेख किया।
Key Highlights:
- कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में ‘हिंदी लघुकथा संचयन’ पर संगोष्ठी आयोजित।
- वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अशोक भाटिया ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित किया।
- साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित संकलन में 98 लेखकों की रचनाएं शामिल।
- लघुकथा को सामाजिक यथार्थ और समकालीन सरोकारों की प्रभावी विधा बताया।
- विद्यार्थियों के साथ साहित्य और लेखन पर संवाद किया।
- प्रमुख हिंदी साहित्यिक पत्रिकाओं के योगदान पर भी चर्चा हुई।
FAQ Section:
Q1. कार्यक्रम का आयोजन किसने किया?
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग ने ‘हिंदी लघुकथा संचयन’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया।
Q2. मुख्य वक्ता कौन थे?
हरियाणा के वरिष्ठ कथाकार डॉ. अशोक भाटिया मुख्य वक्ता थे।
Q3. ‘हिंदी लघुकथा संचयन’ का प्रकाशन किसने किया है?
इस संकलन का प्रकाशन साहित्य अकादमी, नई दिल्ली ने किया है।
Q4. संकलन में कितने लेखकों की रचनाएं शामिल हैं?
डॉ. अशोक भाटिया के अनुसार, इसमें देशभर के 98 लेखकों की लघुकथाएं शामिल हैं।
Conclusion:
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित यह संगोष्ठी हिंदी लघुकथा की साहित्यिक परंपरा, सामाजिक उपयोगिता और भविष्य की संभावनाओं को समझने का महत्वपूर्ण मंच बनी। डॉ. अशोक भाटिया के विचारों ने विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों को समकालीन हिंदी साहित्य के नए आयामों से परिचित कराया।
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