लुधियाना सिविल अस्पताल में मेडिसिन विशेषज्ञों की कमी, 1,500-2,000 OPD मरीजों पर बढ़ा दबाव

300 बेड वाले अस्पताल में केवल अस्थायी व्यवस्था के सहारे चल रही मेडिसिन सेवाएं, मरीजों ने इलाज की निरंतरता पर जताई चिंता

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लुधियाना के सिविल अस्पताल में रोजाना 1,500 से 2,000 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं, लेकिन मेडिसिन विशेषज्ञों की कमी के कारण विभाग अस्थायी व्यवस्था पर चल रहा है। मरीजों का कहना है कि हर बार अलग-अलग डॉक्टर से इलाज होने से फॉलो-अप में परेशानी होती है।

लुधियाना सिविल अस्पताल में मेडिसिन विशेषज्ञों की कमी, 1,500-2,000 OPD मरीजों पर बढ़ा दबाव

पंजाब के लुधियाना सिविल अस्पताल में मेडिसिन विशेषज्ञों की कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ता जा रहा है। प्रतिदिन 1,500 से 2,000 मरीज अस्पताल की ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन मेडिसिन विभाग फिलहाल अस्थायी व्यवस्था के सहारे संचालित हो रहा है।

मेडिसिन विशेषज्ञों को अधिकांश मरीजों के लिए उपचार की पहली कड़ी माना जाता है, क्योंकि वे विभिन्न बीमारियों की पहचान और इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

2025 में पदोन्नति के बाद खाली हुआ विशेषज्ञ का पद

जानकारी के अनुसार, मार्च 2025 में अस्पताल की एकमात्र मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अमनप्रीत कौर को पदोन्नत कर जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अधिकारी नियुक्त किया गया था। उनके स्थानांतरण के बाद से मेडिसिन विभाग नियमित विशेषज्ञों के अभाव में अस्थायी व्यवस्था के जरिए सेवाएं दे रहा है।

स्वीकृत तीन पद, लेकिन विशेषज्ञों की जरूरत अधिक

अस्पताल में मेडिसिन विशेषज्ञ के तीन स्वीकृत पद हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि 300 बेड वाले इस अस्पताल और बड़ी ओपीडी को देखते हुए इन पदों की संख्या बढ़ाकर छह की जानी चाहिए।

उनका कहना है कि मरीजों की बढ़ती संख्या के अनुरूप विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता भी बढ़ाना आवश्यक है।

सप्ताह में सिर्फ एक दिन आते हैं विशेषज्ञ

वर्तमान में नियुक्त एकमात्र मेडिसिन विशेषज्ञ सप्ताह में केवल शनिवार को अस्पताल आते हैं, क्योंकि उनके पास फरीदकोट का अतिरिक्त कार्यभार भी है।

इसके अलावा, दो पैनल पर नियुक्त डॉक्टर प्रतिदिन तीन घंटे सेवाएं देते हैं, जबकि खन्ना और माछीवाड़ा से भी डॉक्टर समय-समय पर अस्पताल में मरीजों की जांच के लिए आते हैं।

हर बार अलग डॉक्टर मिलने से मरीज परेशान

अस्थायी व्यवस्था के कारण मरीजों को हर बार अलग-अलग डॉक्टर से परामर्श लेना पड़ रहा है, जिससे इलाज की निरंतरता प्रभावित हो रही है।

एक मरीज राम प्रकाश ने बताया कि वह तीन बार अस्पताल आ चुके हैं और हर बार उन्हें अलग डॉक्टर से मिलना पड़ा।

"हर बार नया डॉक्टर मिलने से फॉलो-अप में दिक्कत होती है। यदि एक ही डॉक्टर लगातार मरीज को देखे तो बीमारी और इलाज की स्थिति समझाना आसान होता है।"

इसी तरह सलेम टाबरी निवासी सावित्री देवी ने भी नियमित डॉक्टर उपलब्ध होने की आवश्यकता जताई।

विशेषज्ञों की नियुक्ति की जरूरत

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि बढ़ती मरीज संख्या को देखते हुए अस्पताल में स्थायी मेडिसिन विशेषज्ञों की नियुक्ति आवश्यक है। इससे मरीजों को बेहतर और निरंतर चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी तथा ओपीडी व्यवस्था भी अधिक प्रभावी बन सकेगी.

नोट: यह रिपोर्ट अस्पताल की मौजूदा व्यवस्था, उपलब्ध आंकड़ों और मरीजों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेषज्ञों की नियुक्ति को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।


Key Highlights:

  • लुधियाना सिविल अस्पताल में प्रतिदिन 1,500-2,000 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं।
  • मेडिसिन विभाग फिलहाल अस्थायी व्यवस्था के सहारे संचालित।
  • मार्च 2025 में डॉ. अमनप्रीत कौर के प्रमोशन के बाद विशेषज्ञ का पद खाली हुआ।
  • अस्पताल में मेडिसिन विशेषज्ञ के केवल तीन स्वीकृत पद।
  • वर्तमान विशेषज्ञ सप्ताह में सिर्फ शनिवार को उपलब्ध।
  • मरीजों ने हर बार अलग डॉक्टर मिलने पर चिंता जताई।

FAQ Section:

Q1. लुधियाना सिविल अस्पताल में रोज कितने मरीज ओपीडी में आते हैं?

प्रतिदिन लगभग 1,500 से 2,000 मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं।

Q2. मेडिसिन विभाग में विशेषज्ञों की कमी क्यों है?

मार्च 2025 में एकमात्र मेडिसिन विशेषज्ञ के पदोन्नत होने के बाद विभाग अस्थायी व्यवस्था के तहत संचालित हो रहा है।

Q3. वर्तमान में विशेषज्ञ डॉक्टर कितने दिन उपलब्ध रहते हैं?

मौजूदा मेडिसिन विशेषज्ञ सप्ताह में केवल शनिवार को अस्पताल में सेवाएं देते हैं।

Q4. मरीजों की मुख्य शिकायत क्या है?

मरीजों का कहना है कि हर बार अलग डॉक्टर मिलने से फॉलो-अप और इलाज की निरंतरता प्रभावित होती है।


Conclusion:

लुधियाना सिविल अस्पताल में मेडिसिन विशेषज्ञों की कमी बड़ी संख्या में आने वाले मरीजों के लिए चुनौती बनती जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल की क्षमता और ओपीडी भार को देखते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद बढ़ाने और नियमित नियुक्तियां करने की आवश्यकता है, ताकि मरीजों को बेहतर और निरंतर चिकित्सा सेवाएं मिल सकें।Screenshot_333

Edited By: Atul Sharma

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