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करनाल की मंडियों में धान खरीद की रफ्तार धीमी, 4 से 7 दिन से फसल लेकर इंतजार कर रहे किसान
सरकारी खरीद शुरू होने के एक सप्ताह बाद भी कई मंडियों में नहीं पहुंचीं एजेंसियां और राइस मिलर्स, किसानों ने MSP से कम कीमत पर बिक्री का लगाया आरोप
करनाल जिले की अनाज मंडियों में धान खरीद की प्रक्रिया धीमी रहने से किसान परेशान हैं। कई किसान चार से सात दिनों से फसल लेकर मंडियों में इंतजार कर रहे हैं और खरीद में तेजी की मांग कर रहे हैं।
हरियाणा के करनाल जिले की विभिन्न अनाज मंडियों में धान की सरकारी खरीद की रफ्तार धीमी बनी हुई है। राज्य सरकार की ओर से 29 सितंबर से आधिकारिक तौर पर खरीद शुरू किए जाने के बावजूद कई किसान अपनी फसल लेकर मंडियों में कई दिनों से इंतजार कर रहे हैं।
किसानों का आरोप है कि खरीद एजेंसियों और राइस मिलर्स के समय पर मंडियों में नहीं पहुंचने के कारण उन्हें अपनी धान की फसल खुले में रखने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कुछ किसानों ने यह भी दावा किया कि उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी कम दरों पर धान बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
चार से सात दिन से मंडियों में इंतजार
किसानों के मुताबिक कई मंडियों में वे चार से सात दिनों से अपनी फसल लेकर बैठे हैं। लंबे इंतजार के कारण किसानों को फसल की सुरक्षा के साथ-साथ अतिरिक्त समय और खर्च की चिंता भी सता रही है।बुधनपुर आबाद के किसान बाबू ने बताया कि वह चार एकड़ से अधिक जमीन से धान लेकर मंडी पहुंचे हैं। उनका कहना है कि वे चार से पांच दिनों से खरीद का इंतजार कर रहे हैं।
बाबू के अनुसार उनकी फसल में नमी की मात्रा निर्धारित 17 प्रतिशत की सीमा से कम है, इसके बावजूद अभी तक किसी राइस मिलर या संबंधित अधिकारी ने खरीद के लिए उनसे संपर्क नहीं किया है।
खेत में भी नहीं रख सकते फसल
नलवी कलां के किसान प्रताप ने करनाल अनाज मंडी में करीब साढ़े तीन एकड़ की फसल लाई है। उन्होंने कहा कि किसान अपनी पूरी फसल को अनिश्चित समय तक खेतों में नहीं रख सकते।
उन्होंने प्रशासन से खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की, ताकि किसानों को मंडियों में लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।
Rice Millers ने बताई देरी की वजह
वहीं, राइस मिलर्स ने खरीद प्रक्रिया में देरी के लिए नई औपचारिकताओं और दस्तावेजी प्रक्रिया को जिम्मेदार बताया है।
राइस मिलर्स के अनुसार इस बार राइस मिलों की geo-fencing की नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके अलावा दस्तावेजों की जांच, विभिन्न औपचारिकताएं पूरी करने और मिलों को खरीद एजेंसियों से जोड़ने की प्रक्रिया में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है।
एक राइस मिलर ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि नई geo-fencing प्रक्रिया और लंबी कागजी कार्रवाई के कारण पूरी प्रक्रिया जटिल हो गई है। मिलों को खरीद एजेंसियों से जोड़ने में दस्तावेज और verification की वजह से अधिक समय लग रहा है।
MSP से कम कीमत मिलने का किसानों का दावा
किसानों ने आरोप लगाया कि सरकारी खरीद में देरी के कारण उनकी स्थिति कमजोर हो रही है। उनका दावा है कि कई किसानों को मजबूरी में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP से कम कीमत पर धान बेचने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि यदि खरीद व्यवस्था समय पर सक्रिय हो जाए और मंडियों में एजेंसियां व राइस मिलर्स उपलब्ध रहें तो उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए कई दिनों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
Key Highlights:
- करनाल जिले की मंडियों में धान खरीद की रफ्तार धीमी।
- राज्य सरकार ने 29 सितंबर से आधिकारिक खरीद शुरू की थी।
- कई किसान 4 से 7 दिनों से मंडियों में फसल लेकर इंतजार कर रहे हैं।
- किसानों का आरोप—खरीद एजेंसियां और राइस मिलर्स समय पर नहीं पहुंच रहे।
- खुले में फसल रखने को मजबूर होने की बात कही गई।
- कुछ किसानों ने MSP से कम कीमत पर धान बेचने का दावा किया।
- राइस मिलर्स ने paperwork और verification में देरी को वजह बताया।
- नई geo-fencing व्यवस्था से प्रक्रिया लंबी होने का दावा।
- किसानों ने प्रशासन से खरीद प्रक्रिया तेज करने की मांग की।
FAQ Section
1. Haryana में धान की सरकारी खरीद कब शुरू हुई?
राज्य सरकार ने 29 सितंबर से धान की आधिकारिक सरकारी खरीद शुरू की थी।
2. Karnal की मंडियों में किसानों को कितने दिन इंतजार करना पड़ रहा है?
किसानों के अनुसार कई किसान चार से सात दिनों से अपनी फसल लेकर मंडियों में खरीद का इंतजार कर रहे हैं।
3. धान खरीद में देरी की क्या वजह बताई जा रही है?
राइस मिलर्स ने नई geo-fencing व्यवस्था, दस्तावेजी प्रक्रिया, verification और खरीद एजेंसियों के साथ मिलों को जोड़ने में लग रहे अतिरिक्त समय को देरी की वजह बताया है।
4. किसानों ने MSP को लेकर क्या आरोप लगाया है?
कुछ किसानों का दावा है कि खरीद में देरी के कारण उन्हें मजबूरी में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP से कम कीमत पर धान बेचने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
5. किसानों की मुख्य मांग क्या है?
किसानों ने मंडियों में सरकारी खरीद प्रक्रिया तेज करने और खरीद एजेंसियों व राइस मिलर्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।
Conclusion:
करनाल जिले की मंडियों में धान खरीद की धीमी रफ्तार ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। एक तरफ किसान कई दिनों से अपनी फसल लेकर मंडियों में इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राइस मिलर्स दस्तावेजी प्रक्रिया और नई geo-fencing व्यवस्था को देरी की वजह बता रहे हैं। ऐसे में किसानों को राहत देने के लिए खरीद प्रक्रिया में तेजी लाना और मंडियों में समय पर खरीद व्यवस्था सुनिश्चित करना अहम होगा।

