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'सतलुज' फिल्म हटाए जाने के विरोध में अकाली दल वारिस पंजाब दे का प्रदर्शन, राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन
जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म को Zee5 से हटाने के फैसले का विरोध, प्रदर्शनकारियों ने लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया।
अकाली दल वारिस पंजाब दे ने जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म Zee5 से हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शन मार्च निकाला। प्रदर्शन के बाद राज्यपाल के नाम ज्ञापन जिला उपायुक्त को सौंपा गया।
'सतलुज' फिल्म हटाने के विरोध में निकाला गया प्रदर्शन मार्च
अकाली दल वारिस पंजाब दे ने मंगलवार को जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और संघर्ष पर आधारित फिल्म 'सतलुज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म Zee5 से हटाए जाने के विरोध में बड़ा प्रदर्शन मार्च निकाला।
इस प्रदर्शन का नेतृत्व सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने किया। मार्च के बाद प्रदर्शनकारियों ने पंजाब के राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन जिला उपायुक्त (डीसी) को सौंपा।
प्रदर्शन में विधायक मनप्रीत सिंह अयाली (दाखा), अमरजीत सिंह वणछीरी, हरभजन सिंह तूर, एडवोकेट करमवीर सिंह, सुखदेव सिंह कादियां, प्रगट सिंह मियांविंड, जुगराज सिंह मेहता और शमशेर सिंह पाधरी सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।जसवंत सिंह खालड़ा के योगदान का किया उल्लेख
सभा को संबोधित करते हुए तरसेम सिंह ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा ने मानवाधिकारों की रक्षा और सच्चाई को दुनिया के सामने लाने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया।
उन्होंने कहा कि खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म पहले ही लंबे समय तक रिलीज में देरी का सामना कर चुकी थी। ऐसे में रिलीज के केवल दो दिन बाद ही इसे Zee5 से हटाया जाना अत्यंत निंदनीय है।
लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया फैसला
तरसेम सिंह ने कहा कि किसी फिल्म को इस तरह हटाने से यह संदेश जाता है कि संवेदनशील ऐतिहासिक घटनाओं और सिख समुदाय से जुड़े मानवाधिकार के मुद्दों को आम लोगों तक पहुंचने से रोका जा रहा है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐतिहासिक तथ्यों और घटनाओं को जनता तक पहुंचने दिया जाना चाहिए, न कि उन्हें दबाया जाना चाहिए।
राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग
प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल के नाम दिए गए ज्ञापन में इस मामले में हस्तक्षेप करने और फिल्म को हटाए जाने के फैसले पर उचित कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और ऐतिहासिक विषयों पर आधारित रचनाओं के प्रति निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
Key Highlights:
- अकाली दल वारिस पंजाब दे ने 'सतलुज' फिल्म हटाने के विरोध में प्रदर्शन किया।
- सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया।
- राज्यपाल के नाम ज्ञापन जिला उपायुक्त को सौंपा गया।
- प्रदर्शनकारियों ने फैसले को लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया।
- फिल्म जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और संघर्ष पर आधारित है।
- ऐतिहासिक तथ्यों को दबाने का आरोप लगाया गया।
FAQ Section
Q1. विरोध प्रदर्शन किस मुद्दे को लेकर किया गया?
जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म 'सतलुज' को Zee5 से हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया गया।
Q2. प्रदर्शन का नेतृत्व किसने किया?
प्रदर्शन का नेतृत्व सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने किया।
Q3. प्रदर्शन के बाद क्या कदम उठाया गया?
राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन जिला उपायुक्त को सौंपा गया।
Q4. प्रदर्शनकारियों की मुख्य आपत्ति क्या थी?
उनका कहना था कि फिल्म को हटाने का फैसला लोकतांत्रिक मूल्यों और ऐतिहासिक तथ्यों को जनता तक पहुंचाने की भावना के विपरीत है।
Conclusion
'सतलुज' फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के मुद्दे पर अकाली दल वारिस पंजाब दे ने विरोध दर्ज कराते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और ऐतिहासिक विषयों से जुड़े विमर्श का मामला बताया है। संगठन ने राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग करते हुए मामले में उचित कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।

