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Dr RS Deol ने शिक्षा में एआई और ऑटोमेशन के समावेश पर दिया जोर
इंडस्ट्री 4.0 से 5.0 तक के बदलावों के साथ शिक्षा प्रणाली में हो रहा बड़ा परिवर्तन
लायलपुर खालसा कॉलेज टेक्निकल कैंपस के निदेशक डॉ. आरएस देओल ने कहा कि छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने के लिए शिक्षा में एआई, डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमेशन को शामिल करना जरूरी है।
लायलपुर खालसा कॉलेज टेक्निकल कैंपस, जालंधर के निदेशक Dr RS Deol ने शिक्षा प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमेशन को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि आज की दुनिया केवल ब्लैकबोर्ड और किताबों पर नहीं चलती, बल्कि एल्गोरिदम, रोबोट और बुद्धिमान सिस्टम पर आधारित है, जो पहले से कहीं ज्यादा तेजी से सीखते हैं। जैसे-जैसे उद्योग इंडस्ट्री 4.0 (ऑटोमेशन और डिजिटलीकरण) से इंडस्ट्री 5.0 (मानव-केंद्रित नवाचार और स्थिरता) की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे शिक्षा प्रणाली में भी बड़ा बदलाव आ रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इन औद्योगिक परिवर्तनों को अकादमिक पाठ्यक्रम में शामिल करना अब विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्यता बन चुका है, ताकि छात्रों को तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए तैयार किया जा सके।
इन बदलावों के अनुरूप “एजुकेशन 4.0” की अवधारणा सामने आई, जो डिजिटल लर्निंग, व्यक्तिगत शिक्षा और कौशल आधारित प्रशिक्षण पर केंद्रित है। आज कक्षाओं में वर्चुअल लैब, सिमुलेशन टूल और एआई आधारित प्लेटफॉर्म आम हो गए हैं। उदाहरण के तौर पर, वर्चुअल लर्निंग फैक्ट्री छात्रों को वास्तविक औद्योगिक वातावरण का अनुभव देती है, जहां वे बिना किसी जोखिम के व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं।
वहीं “एजुकेशन 5.0” शिक्षा को एक मानव-केंद्रित अनुभव के रूप में परिभाषित करता है। इसमें एआई के साथ भावनात्मक और नैतिक शिक्षा को जोड़ा जाता है, ताकि छात्र जलवायु परिवर्तन, असमानता और गलत सूचना जैसी वास्तविक समस्याओं का समाधान खोज सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों अवधारणाओं का सम्मिलन शिक्षा के नए युग को जन्म दे रहा है, जिसे एजुकेशन 4.0 और 5.0 के रूप में जाना जाता है। यह बदलाव “तकनीक के बारे में सीखने” से आगे बढ़कर “समाज के लिए और उसके साथ सीखने” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
दुनिया भर के शैक्षणिक संस्थान पहले ही इन बदलावों को अपना रहे हैं। यूरोप के कई विश्वविद्यालयों में “लर्निंग फैक्ट्री” स्थापित की गई हैं, जहां छात्र वास्तविक औद्योगिक सिस्टम और आधुनिक मशीनों के साथ काम करके व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करते हैं।
इसी तरह, एशिया के प्रमुख संस्थानों ने वर्चुअल सिमुलेशन लैब शुरू की हैं। इन लैब्स में छात्र एआई आधारित टूल्स की मदद से जटिल कार्य—जैसे चिकित्सा प्रक्रियाएं—सुरक्षित वातावरण में सीख सकते हैं। ये नवाचार न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ा रहे हैं, बल्कि पारंपरिक प्रशिक्षण में होने वाले जोखिम और लागत को भी कम कर रहे हैं।
