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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में किसानों की बाइक रैली, समझौते का मसौदा सार्वजनिक करने की मांग
देश बचाओ मोर्चा के आह्वान पर किसान, मजदूर, युवा और छोटे व्यापारियों ने जताया विरोध, संसद में चर्चा की उठाई मांग
प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में विभिन्न किसान संगठनों के नेतृत्व में बाइक रैली निकाली गई। प्रदर्शनकारियों ने कृषि, डेयरी, छोटे उद्योग और व्यापार पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताते हुए सरकार से समझौते का पूरा मसौदा सार्वजनिक करने की मांग की।
भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन, निकाली बाइक रैली
प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में बुधवार को विभिन्न किसान संगठनों के आह्वान पर किसानों, मजदूरों, युवाओं, कर्मचारियों और छोटे व्यापारियों ने बाइक रैली निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया।
यह रैली देश बचाओ मोर्चा के राष्ट्रव्यापी आंदोलन के आह्वान के तहत आयोजित की गई। प्रदर्शनकारियों ने शहर के विभिन्न हिस्सों में मोटरसाइकिल रैली निकालते हुए प्रस्तावित व्यापार समझौते के खिलाफ नारे लगाए और वार्ता प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की।
कई किसान संगठनों ने लिया रैली में हिस्सा
इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन कई किसान संगठनों ने संयुक्त रूप से किया। इनमें शामिल प्रमुख संगठन थे—- किसान मजदूर मोर्चा
- संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक)
- आजाद किसान मोर्चा
- भारतीय किसान मजदूर संघर्ष समिति
- भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) का मानसा गुट
रैली में बड़ी संख्या में किसानों के साथ अन्य वर्गों के लोगों ने भी भाग लिया।
कृषि, डेयरी और छोटे उद्योगों पर असर को लेकर जताई चिंता
सभा को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का प्रभाव कृषि, डेयरी, उद्योग, डिजिटल व्यापार, सेवा क्षेत्र, ऊर्जा और निवेश जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि कृषि और डेयरी उत्पादों पर आयात शुल्क में कमी की गई तो भारतीय किसानों, डेयरी उत्पादकों और लघु उद्योगों को विदेशी उत्पादों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।
बीज, दवाइयों और पेटेंट नियमों को लेकर भी चिंता
किसान नेताओं ने बीज, दवाइयों और पेटेंट से जुड़े नियमों में संभावित बदलावों पर भी चिंता व्यक्त की।
उनका कहना था कि ऐसे बदलाव बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रभाव को बढ़ा सकते हैं, जिससे किसानों की स्वायत्तता और देश की खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ने की आशंका है।
उन्होंने यह भी कहा कि सस्ते आयातित औद्योगिक उत्पादों की बढ़ती उपलब्धता से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) और छोटे व्यापारियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
संसद में चर्चा और मसौदा सार्वजनिक करने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से मांग की कि प्रस्तावित व्यापार समझौते का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए और किसी भी अंतिम निर्णय से पहले इस पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाए।
किसान नेताओं का कहना था कि देश की अर्थव्यवस्था, कृषि और खाद्य सुरक्षा पर दीर्घकालिक प्रभाव डालने वाले किसी भी समझौते पर व्यापक सार्वजनिक विमर्श होना चाहिए।
Key Highlights:
- प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में बाइक रैली आयोजित।
- देश बचाओ मोर्चा के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर हुआ प्रदर्शन।
- किसान, मजदूर, युवा, कर्मचारी और छोटे व्यापारी हुए शामिल।
- कई किसान संगठनों ने संयुक्त रूप से रैली का आयोजन किया।
- कृषि, डेयरी, उद्योग और MSME पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई।
- बीज, दवाइयों और पेटेंट नियमों में बदलाव की आशंका व्यक्त की।
- केंद्र सरकार से व्यापार समझौते का मसौदा सार्वजनिक करने की मांग।
- अंतिम निर्णय से पहले संसद में विस्तृत चर्चा कराने की मांग उठाई।
FAQ Section
Q1. बाइक रैली क्यों निकाली गई?
प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में और वार्ता प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर।
Q2. रैली का आयोजन किन संगठनों ने किया?
किसान मजदूर मोर्चा, संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक), आजाद किसान मोर्चा, भारतीय किसान मजदूर संघर्ष समिति और बीकेयू (मानसा गुट) सहित कई संगठनों ने।
Q3. प्रदर्शनकारियों ने किन क्षेत्रों पर चिंता जताई?
कृषि, डेयरी, उद्योग, डिजिटल व्यापार, सेवाएं, ऊर्जा और निवेश जैसे क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव को लेकर।
Q4. किसानों की मुख्य मांग क्या है?
व्यापार समझौते का मसौदा सार्वजनिक किया जाए और अंतिम निर्णय से पहले संसद में विस्तृत चर्चा हो।
Q5. किसानों ने बीज और पेटेंट नियमों को लेकर क्या आशंका जताई?
उन्होंने कहा कि संभावित बदलावों से बहुराष्ट्रीय कंपनियों का प्रभाव बढ़ सकता है और किसानों की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है।
Conclusion:
प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर किसानों और अन्य संगठनों ने अपनी चिंताओं को सार्वजनिक रूप से सामने रखा है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से वार्ता प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने, समझौते का विवरण सार्वजनिक करने और संसद में व्यापक चर्चा के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेने की मांग की है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर सरकार और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।

