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यूपी की डॉ. बीआर आंबेडकर मूर्ति विकास योजना की रफ्तार धीमी, तीन महीने बाद भी अधिकांश जिलों में काम शुरू नहीं
अप्रैल में शुरू हुई योजना पर अब तक विकास कार्य शुरू नहीं, केवल कुछ जिलों से ही प्रस्ताव पहुंचे
उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी डॉ. बीआर आंबेडकर मूर्ति विकास योजना शुरू होने के तीन महीने बाद भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है। अधिकांश जिलों में अभी तक प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई है, जबकि सरकार जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की बात कह रही है।
डॉ. बीआर आंबेडकर मूर्ति विकास योजना की प्रगति धीमी, कई जिलों से अभी तक प्रस्ताव नहीं
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई डॉ. बीआर आंबेडकर मूर्ति विकास योजना को लॉन्च हुए तीन महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन योजना का क्रियान्वयन अभी तक जमीन पर शुरू नहीं हो पाया है।
इस योजना के तहत डॉ. भीमराव आंबेडकर और अन्य दलित महापुरुषों की प्रतिमाओं के आसपास सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्य कराए जाने का प्रस्ताव है। हालांकि अब तक राज्य के अधिकांश जिलों में प्रारंभिक प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी है।
अप्रैल में मिली थी कैबिनेट की मंजूरी
राज्य मंत्रिमंडल ने इस योजना को 7 अप्रैल 2026 को मंजूरी दी थी। इसके बाद 14 अप्रैल, डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर योजना का औपचारिक शुभारंभ किया गया।योजना का उद्देश्य राज्यभर में स्थापित डॉ. आंबेडकर और अन्य दलित प्रेरणा स्रोतों की प्रतिमाओं का विकास, सौंदर्यीकरण और आसपास के क्षेत्र का उन्नयन करना है।
अब तक सीमित जिलों से ही पहुंचे प्रस्ताव
योजना से जुड़े सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से अब तक केवल 10 से 20 जिलों ने ही प्रतिमाओं की पहचान कर प्रस्ताव सरकार को भेजे हैं।
इस कारण योजना की प्रगति अपेक्षा से काफी धीमी बनी हुई है।
सरकार ने कहा- जल्द शुरू होगी टेंडर प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने स्वीकार किया कि फिलहाल किसी भी जिले में विकास कार्य शुरू नहीं हुआ है।
उन्होंने बताया कि विभाग ने योजना के लिए अनुपूरक बजट की मांग की है और कार्यान्वयन प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है।
मंत्री के अनुसार—
- योजना के लिए धन की कोई कमी नहीं है।
- जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- कार्य पूरा होने के साथ-साथ आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।
जिलाधिकारियों की समिति करेगी चयन
समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह के अनुसार, योजना के तहत प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति प्रतिमाओं के चयन और उनके विकास संबंधी प्रस्तावों को अंतिम रूप दे रही है।
उन्होंने बताया कि कई जिलाधिकारी प्रस्ताव भेज चुके हैं और शेष जिलों से भी प्रस्ताव प्राप्त होने की प्रक्रिया जारी है।
स्थानीय निकायों के साथ सरकारी निगमों को भी मिल सकती है जिम्मेदारी
सरकार इस योजना के तहत ग्राम सभाओं और नगर पंचायतों के अलावा राज्य सरकार के विभिन्न निगमों को भी निर्धारित मानकों के अनुसार विकास कार्य कराने की अनुमति देने पर विचार कर रही है।
इससे परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
Key Highlights:
- डॉ. बीआर आंबेडकर मूर्ति विकास योजना को तीन महीने पूरे।
- 7 अप्रैल को कैबिनेट से मंजूरी, 14 अप्रैल को हुआ शुभारंभ।
- 75 में से केवल 10-20 जिलों ने प्रस्ताव भेजे।
- किसी भी जिले में अभी तक विकास कार्य शुरू नहीं हुआ।
- समाज कल्याण मंत्री ने जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की बात कही।
- योजना के लिए धन की कमी नहीं होने का दावा।
- जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति करेगी प्रतिमाओं का चयन।
FAQ Section
Q1. डॉ. बीआर आंबेडकर मूर्ति विकास योजना क्या है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार की योजना है, जिसके तहत डॉ. भीमराव आंबेडकर और अन्य दलित महापुरुषों की प्रतिमाओं का सौंदर्यीकरण और आसपास के क्षेत्र का विकास किया जाएगा।
Q2. योजना कब शुरू हुई थी?
कैबिनेट ने 7 अप्रैल 2026 को मंजूरी दी थी और 14 अप्रैल 2026 को इसका शुभारंभ किया गया।
Q3. क्या योजना पर काम शुरू हो गया है?
सरकार के अनुसार अभी तक किसी भी जिले में विकास कार्य शुरू नहीं हुआ है।
Q4. कितने जिलों ने प्रस्ताव भेजे हैं?
सूत्रों के अनुसार 75 जिलों में से लगभग 10 से 20 जिलों ने ही प्रस्ताव भेजे हैं।
Q5. सरकार ने आगे क्या योजना बनाई है?
जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू कर विकास कार्यों को गति देने की तैयारी की जा रही है।
Conclusion:
डॉ. बीआर आंबेडकर मूर्ति विकास योजना सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, लेकिन तीन महीने बाद भी इसकी धीमी प्रगति प्रशासनिक चुनौतियों की ओर संकेत करती है। सरकार का दावा है कि बजट और टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही योजना को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।

