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पूर्व पंजाब DGP पुरुषोत्तम लाल की 10वीं पुस्तक 'Tulsi Ramayana' लॉन्च, रामचरितमानस का अंग्रेजी पद्य अनुवाद किया प्रस्तुत
पंजाब के पूर्व डीजीपी ने साहित्य जगत में दर्ज की नई उपलब्धि, राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने किया 553 पृष्ठों की पुस्तक का विमोचन।
पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) पुरुषोत्तम लाल ने अपनी दसवीं पुस्तक 'Tulsi Ramayana' प्रकाशित की है। यह गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस का अंग्रेजी पद्य (Verse) अनुवाद है, जिसका विमोचन पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने किया।
पूर्व DGP पुरुषोत्तम लाल की साहित्यिक उपलब्धि, 'Tulsi Ramayana' का हुआ विमोचन
पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) पुरुषोत्तम लाल ने अपनी साहित्यिक यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ते हुए 'Tulsi Ramayana' नामक अपनी दसवीं पुस्तक प्रकाशित की है। यह पुस्तक गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस का अंग्रेजी पद्य (English Verse) अनुवाद है।
553 पृष्ठों वाली इस पुस्तक का विमोचन सोमवार शाम आयोजित एक समारोह में पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने किया।
1973 में फगवाड़ा से शुरू हुआ पुलिस सेवा का सफर
पुरुषोत्तम लाल ने अपने पुलिस करियर की शुरुआत 1973 में फगवाड़ा में सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) के रूप में की थी। बाद में उन्होंने कपूरथला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और अंततः पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) के पद तक पहुंचे।सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह साहित्य और लेखन के लिए समर्पित कर दिया।
सेवानिवृत्ति के बाद लेखन में बनाई अलग पहचान
पुरुषोत्तम लाल ने बताया कि पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने लेखन को अपना प्रमुख कार्य बना लिया।
अब तक वे 10 पुस्तकें लिख चुके हैं और देश के प्रमुख समाचार पत्रों में 125 से अधिक लेख प्रकाशित कर चुके हैं।
रामचरितमानस की लय और भाव को बनाए रखने का प्रयास
लेखक के अनुसार, उनकी नई पुस्तक में 16वीं शताब्दी में रचित रामचरितमानस का अंग्रेजी पद्य अनुवाद इस तरह किया गया है कि मूल ग्रंथ की लय (Rhythm) और छंद (Cadence) को यथासंभव सुरक्षित रखा जा सके।
उन्होंने कहा कि यह अनुवाद इस प्रकार तैयार किया गया है कि इसका पाठ और गायन भी सहज रूप से किया जा सके।
पूर्व राज्यपाल गुरबचन जगत ने लिखी भूमिका
पुस्तक की भूमिका (Foreword) मणिपुर के पूर्व राज्यपाल गुरबचन जगत ने लिखी है।
पुस्तक के आवरण पर काकभुशुंडी का चित्र दर्शाया गया है, जिसमें वे भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ को भगवान श्रीराम की कथा सुनाते हुए दिखाई देते हैं।
यह कलाकृति प्रसिद्ध 'कंचन चित्र रामायण' की स्वर्ण अलंकृत लघु चित्रकला से प्रेरित है, जिसे 1796 से 1814 के बीच काशी (वर्तमान वाराणसी) के महाराजा उदित नारायण सिंह के संरक्षण में तैयार कराया गया था।
बताया गया कि इस ऐतिहासिक पांडुलिपि की कुछ ही मूल प्रतियां आज उपलब्ध हैं, जबकि कई चित्र दुनिया भर के प्रतिष्ठित कला संग्रहों का हिस्सा बन चुके हैं।
Key Highlights:
- पूर्व पंजाब DGP पुरुषोत्तम लाल की 10वीं पुस्तक 'Tulsi Ramayana' का विमोचन।
- रामचरितमानस का अंग्रेजी पद्य (Verse) अनुवाद पुस्तक का मुख्य विषय।
- पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने पुस्तक का लोकार्पण किया।
- 553 पृष्ठों की पुस्तक में मूल ग्रंथ की लय और छंद को बनाए रखने का प्रयास।
- सेवानिवृत्ति के बाद पुरुषोत्तम लाल 10 पुस्तकें और 125 से अधिक लेख लिख चुके हैं।
- पुस्तक की भूमिका पूर्व राज्यपाल गुरबचन जगत ने लिखी है।
FAQ Section
Q1. 'Tulsi Ramayana' पुस्तक के लेखक कौन हैं?
इस पुस्तक के लेखक पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) पुरुषोत्तम लाल हैं।
Q2. यह पुस्तक किस ग्रंथ पर आधारित है?
यह गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस का अंग्रेजी पद्य अनुवाद है।
Q3. पुस्तक का विमोचन किसने किया?
पुस्तक का विमोचन पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने किया।
Q4. पुस्तक की विशेषता क्या है?
इसमें रामचरितमानस का अंग्रेजी अनुवाद मूल ग्रंथ की लय और छंद को यथासंभव बनाए रखते हुए प्रस्तुत किया गया है।
Conclusion
पूर्व DGP पुरुषोत्तम लाल की नई पुस्तक 'Tulsi Ramayana' भारतीय साहित्य और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक पाठकों तक पहुंचाने का एक उल्लेखनीय प्रयास है। रामचरितमानस के अंग्रेजी पद्य अनुवाद के माध्यम से उन्होंने मूल काव्य की भावनात्मक और साहित्यिक गरिमा को संरक्षित रखने का प्रयास किया है।

