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वेतन भुगतान में देरी पर 68 स्कूल प्रमुखों को नोटिस, शिक्षक संगठनों ने सरकार पर फोड़ा ठीकरा
शिक्षा विभाग के शो-कॉज नोटिस का शिक्षक यूनियनों ने किया विरोध, कहा- स्टाफ की भारी कमी के कारण हुई देरी, स्कूल प्रमुखों को बनाया जा रहा बलि का बकरा।
पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा वेतन भुगतान में देरी के मामले में 68 प्रिंसिपलों और हेडमास्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने का शिक्षक संगठनों ने विरोध किया है। यूनियनों का कहना है कि प्रशासनिक और स्टाफ की कमी के कारण हुई देरी के लिए स्कूल प्रमुखों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
वेतन भुगतान में देरी पर 68 स्कूल प्रमुखों को नोटिस, शिक्षक संगठनों ने उठाए सवाल
पंजाब के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा वेतन भुगतान में देरी के मामले में 68 प्रिंसिपलों और हेडमास्टरों को जारी किए गए शो-कॉज नोटिस का शिक्षक संगठनों ने कड़ा विरोध किया है। जालंधर की विभिन्न शिक्षक यूनियनों ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी प्रशासनिक कमियों का ठीकरा स्कूल प्रमुखों पर फोड़ रही है।
नोटिस पाने वालों में जालंधर के दो, कपूरथला के तीन और होशियारपुर के दो स्कूल प्रमुख भी शामिल हैं।
14 जुलाई को जारी हुआ था नोटिस
शिक्षा विभाग ने 14 जुलाई को जारी पत्र में पंजाब सिविल सर्विसेज (Punishment and Appeal) Rules, 1970 के तहत संबंधित स्कूल प्रमुखों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव रखा।विभाग के अनुसार, इन स्कूल प्रमुखों ने मार्च माह (जिसका वेतन अप्रैल 2026 में दिया जाना था) के शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के वेतन बिल निर्धारित समय सीमा के भीतर ट्रेजरी में जमा नहीं कराए, जिससे वेतन भुगतान में देरी हुई।
सात दिन में मांगा जवाब
विभाग ने इस देरी को गंभीर लापरवाही बताते हुए संबंधित स्कूल प्रमुखों से सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।
पत्र में कहा गया है कि यदि निर्धारित समय के भीतर जवाब नहीं मिला तो बिना किसी अतिरिक्त अवसर के आगे की विभागीय कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
शिक्षक संगठनों ने किया विरोध
इन नोटिसों के बाद शिक्षक संगठनों ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वेतन भुगतान में हुई देरी किसी व्यक्तिगत लापरवाही का परिणाम नहीं, बल्कि स्टाफ की भारी कमी का नतीजा है।
'सरकार अपनी प्रशासनिक विफलता छिपा रही है'
डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (DTF) के अध्यक्ष दिग्विजयपाल शर्मा ने प्रेस बयान जारी कर आरोप लगाया कि सरकार अपनी प्रशासनिक विफलताओं की जिम्मेदारी स्कूल प्रमुखों पर डालने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि पंजाब में 1,100 से अधिक प्रिंसिपलों के पद खाली हैं, जबकि करीब 50 प्रतिशत हेडमास्टर पद भी रिक्त पड़े हैं।
एक ही प्रिंसिपल संभाल रहे कई स्कूल
शिक्षक संगठनों का कहना है कि कई प्रिंसिपलों को एक साथ कई स्कूलों का प्रभार संभालना पड़ रहा है। वहीं कई जगह एक ही क्लर्क कई स्कूलों के वेतन बिल तैयार करने का काम करता है।
यूनियनों के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में वेतन बिल तैयार करने और समय पर जमा कराने में देरी होना स्वाभाविक है।
Key Highlights:
- 68 प्रिंसिपलों और हेडमास्टरों को वेतन भुगतान में देरी पर शो-कॉज नोटिस जारी।
- जालंधर, कपूरथला और होशियारपुर के स्कूल प्रमुख भी सूची में शामिल।
- सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने के निर्देश।
- शिक्षक यूनियनों ने स्टाफ की कमी को देरी की मुख्य वजह बताया।
- DTF ने सरकार पर प्रशासनिक विफलताओं का ठीकरा स्कूल प्रमुखों पर फोड़ने का आरोप लगाया।
- पंजाब में 1,100 से अधिक प्रिंसिपल और लगभग 50% हेडमास्टर पद रिक्त होने का दावा।
FAQ Section
Q1. शिक्षा विभाग ने कितने स्कूल प्रमुखों को नोटिस जारी किया है?
विभाग ने 68 प्रिंसिपलों और हेडमास्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
Q2. नोटिस जारी करने का कारण क्या है?
मार्च माह के वेतन बिल समय पर ट्रेजरी में जमा न होने के कारण वेतन भुगतान में देरी होने पर नोटिस जारी किए गए हैं।
Q3. शिक्षक संगठनों का क्या कहना है?
उनका कहना है कि देरी का कारण स्टाफ की भारी कमी और प्रशासनिक दबाव है, न कि स्कूल प्रमुखों की लापरवाही।
Q4. DTF ने क्या दावा किया है?
DTF के अनुसार, पंजाब में 1,100 से अधिक प्रिंसिपल पद और लगभग 50 प्रतिशत हेडमास्टर पद खाली हैं।
Conclusion
वेतन भुगतान में देरी को लेकर शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठनों के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। जहां विभाग इसे प्रशासनिक लापरवाही मान रहा है, वहीं शिक्षक संगठन इसे स्टाफ की कमी और व्यवस्था संबंधी चुनौतियों का परिणाम बता रहे हैं। अब संबंधित अधिकारियों के जवाब और विभाग की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।

