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संघर्ष से सिल्वर तक का सफर! पंजाब की हरजिंदर कौर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में फिर बढ़ाया देश का मान
नाभा के छोटे किसान की बेटी हरजिंदर कौर ने महिला 69 किग्रा वेटलिफ्टिंग में सिल्वर मेडल जीतकर रचा इतिहास। आर्थिक तंगी, सामाजिक तानों और कठिन संघर्ष के बावजूद दूसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीता।
पंजाब के नाभा के मेहस गांव की रहने वाली वेटलिफ्टर हरजिंदर कौर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला 69 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। इससे पहले वह 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल भी जीत चुकी हैं।
पंजाब के पटियाला जिले के नाभा स्थित मेहस गांव की रहने वाली हरजिंदर कौर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला 69 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में रजत पदक (सिल्वर मेडल) अपने नाम किया है।
यह उपलब्धि उनके शानदार करियर में एक और बड़ी सफलता है। इससे पहले उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश और पंजाब का नाम रोशन किया था।
मुकाबले से पहले ही था जीत का भरोसा

प्रीतपाल ने कहा कि उनकी यह बात सच साबित हुई और हरजिंदर ने एक बार फिर पोडियम पर जगह बनाकर परिवार और देश को गर्व का मौका दिया।
छोटे किसान की बेटी ने संघर्ष से लिखी सफलता की कहानी
हरजिंदर कौर एक सीमांत किसान के परिवार से आती हैं। उनके पिता साहिब सिंह ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद बेटी के खेल करियर को कभी रुकने नहीं दिया।
परिवार के लिए प्रशिक्षण, पौष्टिक आहार और प्रतियोगिताओं में भाग लेने का खर्च जुटाना आसान नहीं था। कई बार पिता को कर्ज लेकर उनकी ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं का खर्च उठाना पड़ा।
सामाजिक तानों के बावजूद नहीं टूटा हौसला
हरजिंदर के भाई ने बताया कि शुरुआती दिनों में कई लोग परिवार की आलोचना करते थे कि वे बेटी को खेलों में आगे बढ़ा रहे हैं। लेकिन परिवार ने इन बातों पर ध्यान नहीं दिया और हरजिंदर का हौसला बढ़ाता रहा।
पिता साहिब सिंह ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी की मेहनत और प्रतिभा पर पूरा भरोसा था।
रोज 5 किलोमीटर साइकिल से जाती थीं स्कूल
हरजिंदर का बचपन संघर्षों से भरा रहा। वह रोजाना मेहस गांव से नाभा तक लगभग 5 किलोमीटर साइकिल चलाकर स्कूल जाती थीं।
उनके पिता ने याद करते हुए बताया कि कई बार रास्ते में साइकिल पंचर हो जाती थी, लेकिन हरजिंदर कभी शिकायत नहीं करती थीं। वह चुपचाप साइकिल को पैदल घर तक ले आती थीं क्योंकि उन्हें परिवार की आर्थिक स्थिति का पूरा एहसास था।
खेतों में काम करते-करते बनी मजबूत खिलाड़ी
पढ़ाई के साथ-साथ हरजिंदर अपने पिता का खेती के काम में भी हाथ बंटाती थीं।
वह चारा काटने वाली मशीन (चाफ कटर) से पशुओं के लिए चारा तैयार करती थीं। हरजिंदर का मानना रहा कि इसी मेहनत ने उनके हाथों को मजबूत बनाया, जिसका फायदा बाद में वेटलिफ्टिंग में मिला।
कबड्डी से शुरू हुआ सफर, वेटलिफ्टिंग ने बदली जिंदगी
प्रीतपाल सिंह के अनुसार, हरजिंदर ने 11वीं कक्षा में खेलों की शुरुआत कबड्डी से की थी।
बाद में उनके पहले कोच परमजीत शर्मा ने उनकी शारीरिक ताकत को देखते हुए उन्हें टग ऑफ वॉर अपनाने की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने वेटलिफ्टिंग की ओर रुख किया और यही फैसला उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
हालांकि शुरुआत में उन्हें इस खेल को लेकर संकोच भी था। उन्हें चिंता थी कि वेटलिफ्टिंग से उनका शरीर बदल जाएगा। लेकिन उनके माता-पिता ने उन्हें समझाया कि खेल ही उनके उज्ज्वल भविष्य का रास्ता बन सकता है।
महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड से भी हो चुकी हैं सम्मानित
हरजिंदर कौर को हाल ही में महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने अपने शानदार खेल करियर में एक और उपलब्धि जोड़ दी है।
Key Highlights:
- पंजाब की हरजिंदर कौर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीता।
- महिला 69 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में हासिल की सफलता।
- 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं।
- सीमांत किसान परिवार से आने वाली हरजिंदर ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद सफलता हासिल की।
- पिता ने बेटी के खेल करियर के लिए कर्ज लेकर प्रशिक्षण का खर्च उठाया।
- हाल ही में महाराजा रणजीत सिंह अवॉर्ड से भी सम्मानित हुईं।
FAQ Section:
Q1. हरजिंदर कौर ने कौन-सा पदक जीता है?
उत्तर: उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की महिला 69 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता है।
Q2. हरजिंदर कौर किस गांव की रहने वाली हैं?
उत्तर: वह पंजाब के नाभा स्थित मेहस गांव की रहने वाली हैं।
Q3. उन्होंने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में कौन-सा पदक जीता था?
उत्तर: उन्होंने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।
Q4. हरजिंदर कौर ने खेल करियर की शुरुआत किस खेल से की थी?
उत्तर: उन्होंने शुरुआत कबड्डी से की थी, बाद में टग ऑफ वॉर और फिर वेटलिफ्टिंग को अपना करियर बनाया।
Conclusion:
हरजिंदर कौर की सफलता इस बात का प्रमाण है कि मेहनत, परिवार का समर्थन और दृढ़ संकल्प किसी भी कठिन परिस्थिति को मात दे सकते हैं। एक छोटे किसान की बेटी से अंतरराष्ट्रीय स्तर की पदक विजेता बनने तक का उनका सफर देशभर के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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