पंजाब में बेअदबी मामलों की जांच के लिए नया SOP लागू, अब क्रिप्टो ट्रेल और AI डीपफेक जांच भी होगी

गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन कानून के बाद पुलिस को धार्मिक मर्यादा के साथ हाई-टेक जांच के निर्देश

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पंजाब में Jaagat Jot Sri Guru Granth Sahib Satkar (Amendment) Bill लागू होने के बाद पुलिस ने बेअदबी मामलों की जांच के लिए नया SOP जारी किया है। इसमें धार्मिक मर्यादा का पालन, क्रिप्टोकरेंसी ट्रैकिंग, AI डीपफेक पहचान और मानसिक स्थिति की जांच जैसे प्रावधान शामिल हैं।

पंजाब में राज्यपाल द्वारा Jaagat Jot Sri Guru Granth Sahib Satkar (Amendment) Bill को मंजूरी मिलने के बाद, Punjab Police ने बेअदबी मामलों की जांच के लिए एक नया और विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू किया है। यह SOP पारंपरिक जांच से आगे बढ़कर धार्मिक मर्यादा और आधुनिक तकनीकी जांच दोनों को समान महत्व देता है।

🛕 घटनास्थल पर धार्मिक मर्यादा अनिवार्य

नई गाइडलाइन के अनुसार, Guru Granth Sahib के ‘अंगों’ को पूरी श्रद्धा और मर्यादा के साथ संभालना पुलिस अधिकारियों के लिए अनिवार्य होगा।

घटनास्थल पर दो स्तर की घेराबंदी की जाएगी—

  • अंदरूनी क्षेत्र: सबूतों के लिए
  • बाहरी क्षेत्र: भीड़ नियंत्रण के लिए

स्थानीय गुरुद्वारा कमेटी और धार्मिक प्रतिनिधियों को शुरुआत से ही शामिल किया जाएगा। बिना अनुमति कोई भी व्यक्ति पवित्र अंगों को नहीं छू सकेगा। सबूत इकट्ठा करने से पहले हाई-रेजोल्यूशन फोटो और वीडियो बनाना जरूरी होगा।


📱 डिजिटल बेअदबी पर सख्ती

SOP में डिजिटल अपराधों को भी गंभीरता से लिया गया है। व्हाट्सएप, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर फैलाई गई मॉर्फ्ड तस्वीरें, डीपफेक वीडियो और आपत्तिजनक मीम्स को गंभीर अपराध माना जाएगा।

जांच अधिकारी URL, टाइमस्टैम्प, पोस्ट ID और डिवाइस फिंगरप्रिंट सुरक्षित करेंगे और Meta, X और YouTube से कंटेंट हटाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।


🧠 मानसिक स्थिति की जांच

यदि आरोपी मानसिक रूप से अस्थिर दिखाई देता है, तो फोरेंसिक मनोचिकित्सकों की एक मेडिकल बोर्ड बनाई जाएगी। यह बोर्ड तय करेगा कि आरोपी अपने कृत्य को समझने में सक्षम था या किसी ने उसे उकसाया या इस्तेमाल किया।


💰 क्रिप्टोकरेंसी और अंतरराष्ट्रीय साजिश की जांच

नई व्यवस्था के तहत अब जांच अधिकारी Bitcoin सहित अन्य क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन की भी जांच करेंगे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं बेअदबी की घटनाओं के पीछे अंतरराष्ट्रीय फंडिंग या साजिश तो नहीं है।

इसके लिए Chainalysis और Bubblemaps जैसे एडवांस ब्लॉकचेन टूल्स का उपयोग किया जाएगा।


⚖️ समयबद्ध जांच और कानूनी प्रक्रिया

  • 7 साल या उससे अधिक सजा वाले मामलों में जांच 90 दिनों में पूरी करनी होगी
  • अन्य मामलों में 60 दिनों की समयसीमा होगी

यह नियम जमानत पर बाहर आरोपियों पर भी लागू होगा।

डिजिटल सबूतों—जैसे CCTV फुटेज, ईमेल और सोशल मीडिया डेटा—को Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023 की धारा 63 के तहत प्रमाणित करना होगा।


📄 चार्जशीट और पारदर्शिता

चार्जशीट अब डिजिटल रूप में दाखिल की जाएगी—

  • स्कैन और इंडेक्स की गई PDF
  • डिजिटल सिग्नेचर के साथ

जांच की प्रगति 90 दिनों के भीतर पीड़ित या शिकायतकर्ता को ऑनलाइन साझा करना भी अनिवार्य होगा।


⚠️ सख्त चेतावनी

SOP में साफ कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों को कोर्ट में समय पर गवाही देनी होगी। देरी को न्याय में बाधा माना जाएगा और इससे आरोपियों के मौलिक अधिकारों पर असर पड़ सकता है।Screenshot_516

Edited By: Karan Singh

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