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अमृतसर में SGPC ने मनाई भाई लालो की जयंती, ईमानदार मेहनत और सेवा का संदेश अपनाने की अपील
गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में अखंड पाठ के भोग के बाद धार्मिक कार्यक्रम; कीर्तन, अरदास और कथा का आयोजन
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने अमृतसर के दरबार साहिब परिसर स्थित गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में भाई लालो की जयंती श्रद्धा और धार्मिक भावना के साथ मनाई।
H2: SGPC ने श्रद्धा के साथ मनाई भाई लालो की जयंती
अमृतसर में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की ओर से गुरुवार को श्री गुरु नानक देव जी से जुड़े श्रद्धेय सिख भाई लालो की जयंती मनाई गई।
धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन दरबार साहिब परिसर स्थित गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद हुई।H2: गुरबाणी कीर्तन और अरदास का आयोजन
कार्यक्रम के दौरान हजूरी रागी गुरदेव सिंह और उनके जत्थे ने गुरबाणी कीर्तन किया। इसके बाद प्रेम सिंह ने अरदास की।
कथावाचक ज्ञानी विशाल सिंह ने पवित्र हुकमनामा का वाचन किया और संगत के साथ भाई लालो के जीवन, उनके विचारों और गुरु नानक देव जी के साथ उनके संबंधों पर प्रकाश डाला।
H2: भाई लालो का जीवन ईमानदार मेहनत की प्रेरणा
ज्ञानी विशाल सिंह ने कहा कि भाई लालो का जीवन समाज के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन देता है। उन्होंने बताया कि भाई लालो ने ईमानदारी से मेहनत करके आजीविका कमाने और परमात्मा से जुड़े रहने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी ने भाई लालो को विशेष सम्मान दिया और उनके जीवन के माध्यम से ईमानदार श्रम की महत्ता का संदेश समाज तक पहुंचाया।
H2: ‘किरत करो, नाम जपो और वंड छको’ का संदेश
ज्ञानी विशाल सिंह ने संगत से गुरु नानक देव जी के बताए सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाने की अपील की।
उन्होंने ‘किरत करो, नाम जपो और वंड छको’ के सिद्धांत को जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया। इसका अर्थ ईमानदारी से मेहनत करके कमाना, परमात्मा का स्मरण करना और अपनी कमाई व संसाधनों को जरूरतमंदों के साथ साझा करना है।
H2: समाज के लिए भाई लालो की शिक्षाओं की प्रासंगिकता
भाई लालो का जीवन सादगी, ईमानदार मेहनत और आध्यात्मिक जुड़ाव की प्रेरणा के रूप में देखा जाता है। धार्मिक कार्यक्रम के दौरान संगत को इन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
Key Highlights:
• SGPC ने अमृतसर में भाई लालो की जयंती मनाई।
• कार्यक्रम गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में आयोजित हुआ।
• श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद धार्मिक कार्यक्रम हुआ।
• हजूरी रागी गुरदेव सिंह और जत्थे ने गुरबाणी कीर्तन किया।
• प्रेम सिंह ने अरदास की।
• ज्ञानी विशाल सिंह ने हुकमनामा का वाचन किया और भाई लालो के जीवन पर प्रकाश डाला।
• संगत से ‘किरत करो, नाम जपो और वंड छको’ के सिद्धांत अपनाने की अपील की।
FAQ Section:
Q1. भाई लालो की जयंती कहां मनाई गई?
A. भाई लालो की जयंती अमृतसर के दरबार साहिब परिसर स्थित गुरुद्वारा श्री मंजी साहिब दीवान हॉल में मनाई गई।
Q2. कार्यक्रम का आयोजन किसने किया?
A. कार्यक्रम का आयोजन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की ओर से किया गया।
Q3. कार्यक्रम में क्या धार्मिक आयोजन हुए?
A. श्री अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद गुरबाणी कीर्तन, अरदास और कथा का आयोजन किया गया।
Q4. भाई लालो के जीवन से क्या संदेश मिलता है?
A. भाई लालो का जीवन ईमानदार मेहनत से आजीविका कमाने और परमात्मा से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है।
Q5. ‘किरत करो, नाम जपो और वंड छको’ का क्या अर्थ है?
A. इसका अर्थ ईमानदारी से मेहनत करना, परमात्मा का स्मरण करना और अपनी कमाई व संसाधनों को दूसरों के साथ साझा करना है।
Conclusion:
अमृतसर में SGPC की ओर से भाई लालो की जयंती धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में गुरबाणी कीर्तन, अरदास और कथा के माध्यम से भाई लालो के जीवन और गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं को याद किया गया। संगत से ईमानदार मेहनत, नाम सिमरन और जरूरतमंदों के साथ साझा करने के सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाने की अपील की गई।
