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डेरा बाबा नानक में Zero Line पर जाने से रोका गया सिख जत्था, करतारपुर कॉरिडोर खोलने के लिए होनी थी विशेष अरदास
BSF ने सुरक्षा प्रोटोकॉल का हवाला देकर Giani Kuldeep Singh Gargaj के नेतृत्व वाले जत्थे को आगे बढ़ने से रोका, बैरिकेड के पास बैठकर की अरदास
गुरदासपुर के डेरा बाबा नानक में सोमवार को उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब BSF ने अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज के नेतृत्व वाले सिख जत्थे को इंटरनेशनल बॉर्डर की Zero Line तक जाने से रोक दिया। जत्था करतारपुर कॉरिडोर दोबारा खोलने और दोनों देशों के बीच शांति के लिए विशेष अरदास करना चाहता था।
गुरदासपुर के डेरा बाबा नानक में सोमवार को उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज के नेतृत्व में पहुंचे सिख श्रद्धालुओं के एक समूह को इंटरनेशनल बॉर्डर की Zero Line तक जाने से रोक दिया। BSF ने इसके पीछे सुरक्षा कारणों और तय प्रोटोकॉल का हवाला दिया।
सिख श्रद्धालु करतारपुर कॉरिडोर को दोबारा खोलने की मांग को लेकर Zero Line पर विशेष अरदास करना चाहते थे। भारत और पाकिस्तान, दोनों तरफ के सिख श्रद्धालुओं की ओर से इस मौके पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
H2: Zero Line पर अरदास की थी योजनाभारत और पाकिस्तान के सिख श्रद्धालुओं ने करतारपुर कॉरिडोर को फिर से खोलने की मांग को लेकर Zero Line पर विशेष अरदास की योजना बनाई थी। यह कॉरिडोर पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब को भारत से जोड़ता है।
भारत की ओर से ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज के आह्वान पर डेरा बाबा नानक और आसपास के सीमावर्ती इलाकों से बड़ी संख्या में सिख श्रद्धालु पहुंचे थे।
योजना के अनुसार Zero Line के पास Rehras Sahib का पाठ, गुरबाणी कीर्तन और विशेष अरदास की जानी थी।
H2: पाकिस्तान की ओर से भी निकला नगर कीर्तन
गुरु नानक देव जी के ज्योति ज्योत दिवस के अवसर पर पाकिस्तान की ओर से भी नगर कीर्तन आयोजित किया गया था। पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (PSGPC) के अध्यक्ष रमेश सिंह अरोड़ा के नेतृत्व में नगर कीर्तन को पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारे से Zero Line की ओर ले जाने का कार्यक्रम था।
इस दौरान दोनों देशों के सिख श्रद्धालुओं की ओर से करतारपुर कॉरिडोर के जल्द दोबारा खुलने और दोनों पड़ोसी देशों के बीच शांति के लिए अरदास करने की योजना थी।
H2: BSF ने सुरक्षा प्रोटोकॉल का दिया हवाला
BSF अधिकारियों के अनुसार, श्रद्धालुओं को पहले से तय सीमा के भीतर रहने का अनुरोध किया गया था। पंजाब फ्रंटियर के BSF Inspector General अतुल फुलजले ने बताया कि स्थानीय प्रशासन और सिख श्रद्धालुओं के बीच यह सहमति बनी थी कि उन्हें Zero Line से कुछ गज आगे स्थित गुरुद्वारे में अरदास करने की अनुमति दी जाएगी।
उनके अनुसार, श्रद्धालु Zero Line की ओर आगे बढ़ना चाहते थे, जिसकी अनुमति सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत नहीं दी जा सकती थी।
H3: पांच सिंहों को Zero Line तक जाने की भी मांग
जानकारी के अनुसार, ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने BSF से कम से कम पांच सिंहों को Zero Line तक जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।
इन पांच सिंहों को श्री गुरु ग्रंथ साहिब के लिए रुमाला साहिब और पंज प्यारों के लिए सिरोपे सौंपने थे। हालांकि, BSF की ओर से इसकी अनुमति नहीं दी गई।
H2: बैरिकेड के पास बैठकर किया विरोध
Zero Line की ओर जाने से रोके जाने के बाद जत्थेदार और श्रद्धालु बैरिकेड के पास बैठ गए। इसके बाद उन्होंने Rehras Sahib का पाठ किया और शबद कीर्तन किया।
श्रद्धालुओं ने करतारपुर कॉरिडोर को दोबारा खोलने तथा भारत और पाकिस्तान के बीच शांति के लिए विशेष अरदास भी की।
H2: जत्थेदार ने केंद्र सरकार पर जताई नाराजगी
ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने BSF द्वारा रोके जाने पर नाराजगी जताई और केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय को लंबे समय से सीमा पार स्थित अपने धार्मिक स्थलों तक पहुंच को लेकर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पाकिस्तान की ओर से सिख समुदाय को Zero Line तक पहुंचने की अनुमति दी गई, तो भारत की ओर से ऐसी अनुमति क्यों नहीं दी गई।
H2: BSF और सिख प्रतिनिधियों के बीच बनी स्थिति
स्वर्ण मंदिर के मैनेजर राजिंदर सिंह रूबी और गुरुद्वारा डेरा बाबा नानक के मैनेजर रंजीत सिंह ने दावा किया कि जत्थेदार के दौरे को लेकर सुबह ही BSF और पंजाब पुलिस के अधिकारियों से बातचीत हुई थी।
हालांकि, बाद में Zero Line तक जाने को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद की स्थिति बनी। BSF ने इसे सुरक्षा व्यवस्था और निर्धारित सीमा से जुड़ा मामला बताया।
H2: पाकिस्तान में भी सिख संगत ने की अरदास
एक श्रद्धालु के अनुसार, पाकिस्तान की ओर बड़ी संख्या में सिख संगत ने नगर कीर्तन में हिस्सा लिया और करतारपुर कॉरिडोर के दोबारा खुलने के लिए अरदास की।
इस घटनाक्रम के दौरान दोनों ओर मौजूद श्रद्धालुओं ने धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से कॉरिडोर को जल्द दोबारा खोलने की इच्छा व्यक्त की।
Key Highlights:
- डेरा बाबा नानक में BSF ने सिख जत्थे को Zero Line तक जाने से रोका।
- जत्थे का नेतृत्व अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज कर रहे थे।
- श्रद्धालु करतारपुर कॉरिडोर को दोबारा खोलने के लिए विशेष अरदास करना चाहते थे।
- BSF ने सुरक्षा कारणों और तय प्रोटोकॉल का हवाला दिया।
- पांच सिंहों को Zero Line तक जाने की अनुमति भी नहीं मिली।
- श्रद्धालुओं ने बैरिकेड के पास बैठकर Rehras Sahib और शबद कीर्तन किया।
- भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ सिख श्रद्धालुओं ने धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
- पाकिस्तान की ओर से Zero Line की तरफ नगर कीर्तन आयोजित किया गया।
- BSF ने कहा कि श्रद्धालुओं को तय सीमा के भीतर रहने को कहा गया था।
- जत्थेदार ने करतारपुर कॉरिडोर जल्द खोलने की मांग दोहराई।
FAQ Section:
Q1. डेरा बाबा नानक में सिख जत्थे को क्यों रोका गया?
BSF के अनुसार, श्रद्धालुओं को Zero Line तक जाने की अनुमति सुरक्षा कारणों और निर्धारित सीमा प्रोटोकॉल के तहत नहीं दी गई।
Q2. जत्था Zero Line पर क्यों जाना चाहता था?
सिख श्रद्धालु करतारपुर कॉरिडोर को दोबारा खोलने और दोनों देशों के बीच शांति के लिए विशेष अरदास करना चाहते थे।
Q3. क्या पांच सिंहों को Zero Line तक जाने की अनुमति मिली?
नहीं। ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने कम से कम पांच सिंहों को Zero Line तक जाने की अनुमति देने का अनुरोध किया था, लेकिन BSF ने इसकी अनुमति नहीं दी।
Q4. श्रद्धालुओं ने रोकने के बाद क्या किया?
जत्थेदार और श्रद्धालु बैरिकेड के पास बैठ गए। उन्होंने Rehras Sahib का पाठ, शबद कीर्तन और करतारपुर कॉरिडोर को दोबारा खोलने के लिए अरदास की।
Q5. BSF का इस मामले में क्या कहना है?
BSF पंजाब फ्रंटियर के IG अतुल फुलजले के अनुसार, श्रद्धालुओं को पहले से तय सीमा के भीतर रहने को कहा गया था। उन्होंने बताया कि Zero Line से कुछ गज आगे स्थित गुरुद्वारे में अरदास की अनुमति थी, लेकिन Zero Line की ओर आगे बढ़ने की अनुमति सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत नहीं दी जा सकती थी।
Conclusion:
डेरा बाबा नानक में करतारपुर कॉरिडोर को दोबारा खोलने की मांग को लेकर आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान Zero Line तक जाने को लेकर BSF और सिख श्रद्धालुओं के बीच मतभेद की स्थिति बनी। सुरक्षा प्रोटोकॉल के चलते श्रद्धालुओं को आगे जाने की अनुमति नहीं मिली, जिसके बाद उन्होंने बैरिकेड के पास बैठकर पाठ, कीर्तन और अरदास की। वहीं, पाकिस्तान की ओर भी सिख संगत ने नगर कीर्तन और अरदास में हिस्सा लिया।
