रोपड़ में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल पांचवें दिन भी जारी, शहरों में लगे कूड़े के ढेर

नियमितीकरण और वेतन बढ़ाने की मांग पर अड़े कर्मचारी, स्थानीय निकाय चुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक विवाद

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Rupnagar district में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल लगातार पांचवें दिन भी जारी रही, जिससे Nangal, Rupnagar और Anandpur Sahib समेत कई शहरों में कूड़े के ढेर लग गए हैं। कर्मचारी सेवाएं नियमित करने और वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

Rupnagar district में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल रविवार को लगातार पांचवें दिन भी जारी रही। इसके चलते Nangal, Rupnagar और Anandpur Sahib सहित कई शहरों में कूड़े के ढेर जमा हो गए हैं।

घर-घर से कचरा उठाने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई इलाकों के निवासियों ने बदबू और बिगड़ती सफाई व्यवस्था को लेकर शिकायतें शुरू कर दी हैं।

इस हड़ताल ने जिले भर में नगर परिषदों और सफाई सेवाओं के नियमित कामकाज को प्रभावित किया है। बाजारों, रिहायशी कॉलोनियों और सड़कों के किनारे बने डंपिंग प्वाइंट्स पर कूड़े के ढेर दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि कर्मचारी अपनी मांगों के समर्थन में काम पर नहीं लौटे हैं।

हाल के समय में जिले में सफाई कर्मचारियों का यह दूसरा बड़ा आंदोलन है। पिछले साल भी कर्मचारी लगभग 10 दिनों तक हड़ताल पर रहे थे, जिससे शहरों में कूड़े के ढेर लग गए थे और गंदगी की स्थिति पैदा हो गई थी।

कई स्थानों पर पिछली हड़ताल के दौरान जमा हुआ कचरा अब भी सड़कों और खाली प्लॉटों पर पड़ा हुआ है, जो शहरी क्षेत्रों में खराब ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को दर्शाता है।

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारी अपनी सेवाओं को नियमित करने और वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। नगर परिषदों में कार्यरत बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी निजी ठेकेदारों के माध्यम से काम कर रहे हैं।

कर्मचारियों का आरोप है कि ठेकेदारी व्यवस्था शोषणकारी है और इससे उन्हें उचित वेतन, नौकरी की सुरक्षा और नियमित सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले सामाजिक लाभ नहीं मिलते।

कर्मचारियों का कहना है कि आवश्यक नागरिक सेवाएं देने के बावजूद उन्हें कम वेतन दिया जा रहा है और पर्याप्त सुविधाओं के बिना काम कराया जा रहा है। उनका कहना है कि सेवाओं के नियमितीकरण को लेकर बार-बार आश्वासन दिए गए, लेकिन उन्हें पूरा नहीं किया गया, जिसके कारण उन्हें फिर से आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

स्थानीय निकाय चुनावों से पहले यह हड़ताल राजनीतिक रंग भी लेने लगी है। सफाई कर्मचारियों के आंदोलन ने विपक्षी दलों को नागरिक सुविधाओं और ठेका भर्ती व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरने का मौका दे दिया है।

Subhash Sharma ने प्रदर्शनकारी कर्मचारियों को समर्थन देते हुए उनके साथ धरने पर बैठकर सेवाओं के नियमितीकरण की मांग की। बीजेपी नेताओं ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह नगर निकायों में बड़े पैमाने पर संविदा कर्मचारियों पर निर्भर होने के बावजूद उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रही है।

Indian National Congress ने भी आंदोलन को समर्थन दिया और शहरों में बिगड़ती सफाई व्यवस्था को लेकर सरकार की आलोचना की। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार पिछले आंदोलनों के बावजूद सफाई कर्मचारियों की शिकायतों का समाधान करने में विफल रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी नगर निगम चुनावों से पहले यह हड़ताल सत्तारूढ़ दल के लिए चुनौती बन सकती है। स्थानीय चुनावों में सफाई और नागरिक सुविधाएं प्रमुख मुद्दे रहती हैं और शहरों में लगे कूड़े के ढेर शहरी मतदाताओं के बीच सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

कई शहरों के निवासियों ने बिगड़ती सफाई व्यवस्था पर चिंता जताते हुए प्रशासन से जल्द से जल्द गतिरोध समाप्त करने की अपील की है। दुकानदारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हड़ताल लंबे समय तक जारी रही, तो खासकर गर्मी के मौसम में इससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे पैदा हो सकते हैं।

 
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Edited By: Karan Singh

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