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यूपी में 2024 में 42,987 लोगों की हादसों में मौत, देश में तीसरा सबसे प्रभावित राज्य
एनसीआरबी रिपोर्ट में सड़क हादसे, डूबने और कार्यस्थल दुर्घटनाओं को बड़ी वजह बताया गया
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ‘एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2024 के दौरान 42,987 लोगों की आकस्मिक मौत हुई। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बाद यूपी देश का तीसरा सबसे अधिक प्रभावित राज्य रहा।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ‘एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2024 के दौरान 42,987 लोगों की आकस्मिक मौत हुई। इस तरह महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बाद यूपी देश का तीसरा सबसे अधिक प्रभावित राज्य बन गया।
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2024 में देशभर में हुई कुल 4,67,857 आकस्मिक मौतों में 9 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रही।
हालांकि, वर्ष 2023 में दर्ज 43,207 मौतों की तुलना में यह आंकड़ा 0.5 प्रतिशत कम रहा, लेकिन रिपोर्ट यह दर्शाती है कि सड़क दुर्घटनाएं, डूबने की घटनाएं, कार्यस्थल हादसे और अन्य रोकी जा सकने वाली वजहों से होने वाली मौतें अब भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं।आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन औसतन करीब 118 लोगों की आकस्मिक मौत हुई। रिपोर्ट में बताया गया कि “प्राकृतिक कारणों” से होने वाली मौतें 2023 में 852 थीं, जो 2024 में घटकर 801 रह गईं। वहीं “अन्य कारणों” से होने वाली मौतें 42,355 से घटकर 42,186 दर्ज की गईं।
मामूली गिरावट के बावजूद, कुल आकस्मिक मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश गुजरात, राजस्थान, बिहार और पश्चिम बंगाल से आगे रहा।
लिंग आधारित आंकड़ों में बड़ा असंतुलन देखने को मिला। राज्य में 35,023 पुरुषों, 7,964 महिलाओं और एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति की आकस्मिक मौत दर्ज की गई। यानी कुल मौतों में पुरुषों की हिस्सेदारी 81.5 प्रतिशत से अधिक रही। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क यात्रा, निर्माण कार्य, औद्योगिक गतिविधियों और कृषि कार्यों में पुरुषों की अधिक भागीदारी इसके प्रमुख कारण हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक रूप से सक्रिय आयु वर्ग को सबसे अधिक नुकसान हुआ। उत्तर प्रदेश में 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग के 13,470 लोगों की मौत हुई, जबकि 30 से 45 वर्ष आयु वर्ग में 12,912 और 45 से 60 वर्ष आयु वर्ग में 7,894 लोगों की जान गई। ये तीनों आयु वर्ग मिलाकर राज्य की कुल आकस्मिक मौतों का लगभग चार-पांचवां हिस्सा हैं।
एनसीआरबी के आंकड़ों ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। उत्तर प्रदेश में 14 वर्ष से कम आयु के 1,715 बच्चों और 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 862 किशोरों की हादसों में मौत हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि डूबने की घटनाएं, असुरक्षित सड़कें, ट्रैफिक नियमों के कमजोर पालन और ग्रामीण इलाकों में जोखिम भरे वातावरण बच्चों की मौतों की बड़ी वजह बने हुए हैं।
शहरों की बात करें तो लखनऊ में सबसे अधिक 1,006 आकस्मिक मौतें दर्ज की गईं। इसके बाद आगरा में 761 और वाराणसी में 361 मौतें हुईं। लखनऊ में 2023 की तुलना में आकस्मिक मौतों में 40.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि प्राकृतिक कारणों से होने वाली मौतों में 466.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ।
राष्ट्रीय स्तर पर भी आकस्मिक मौतों में वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2023 में देशभर में 4,44,104 आकस्मिक मौतें हुई थीं, जो 2024 में बढ़कर 4,67,857 हो गईं, यानी 5.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई।


