राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर पीएम मोदी से मिला खेती विरासत मिशन का प्रतिनिधिमंडल, प्राकृतिक खेती से बनी खादी का तिरंगा किया भेंट

फरीदकोट के खेती विरासत मिशन के किसानों और महिला बुनकरों ने संसद भवन स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर प्राकृतिक खेती और स्वदेशी कपास आधारित ‘फार्म-टू-फैब्रिक’ मॉडल की जानकारी दी।

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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर फरीदकोट स्थित खेती विरासत मिशन (KVM) का 20 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने प्राकृतिक खेती से उगाई गई स्वदेशी कपास से तैयार हाथ से काता और बुना खादी का राष्ट्रीय ध्वज प्रधानमंत्री को भेंट किया।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर पंजाब के फरीदकोट से जुड़े खेती विरासत मिशन (KVM) के 20 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने संसद भवन स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने प्राकृतिक खेती से उगाई गई स्वदेशी, गैर-बीटी कपास से हाथ से कातकर और हाथ से बुनकर तैयार किया गया खादी का राष्ट्रीय ध्वज प्रधानमंत्री को भेंट किया।

प्रतिनिधिमंडल में 10 प्राकृतिक खेती करने वाले किसान एवं किसान-प्रशिक्षक और 10 बुनकर शामिल थे। इनमें अधिकांश महिलाएं थीं, जो फरीदकोट जिले के जैतो स्थित KVM की नव-त्रिंजन हथकरघा पहल से जुड़ी हुई हैं।


## प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं के कार्य की सराहना की

खेती विरासत मिशन के कार्यकारी निदेशक उमेंद्र दत्त के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रतिनिधिमंडल के साथ करीब आधे घंटे तक बातचीत की। उन्होंने संगठन के कार्यों की जानकारी ली और विशेष रूप से महिला बुनकरों की मेहनत एवं समर्पण की सराहना की।

उमेंद्र दत्त ने बताया कि प्रधानमंत्री ने कहा कि इस प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात ने उनके लिए राष्ट्रीय हथकरघा दिवस को और अधिक सार्थक बना दिया। उन्होंने प्राकृतिक खेती को भविष्य के लिए सबसे प्रभावी और टिकाऊ रास्ता भी बताया।


## 'फार्म-टू-फैब्रिक' मॉडल की दी जानकारी

खेती विरासत मिशन की निदेशक और नव-त्रिंजन पहल की प्रमुख रूपसी गर्ग ने प्रधानमंत्री को बताया कि पंजाब के विभिन्न गांवों, विशेष रूप से फरीदकोट-मोगा क्षेत्र में पारंपरिक कताई और बुनाई से जुड़े कारीगरों की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षित किया गया।

उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत स्वदेशी कपास की खेती से लेकर धागा तैयार करने और खादी बुनने तक की पूरी 'फार्म-टू-फैब्रिक' वैल्यू चेन विकसित की गई है, जिससे ग्रामीण आजीविका और पारंपरिक हथकरघा कला को बढ़ावा मिल रहा है।


## प्रधानमंत्री को भेंट किए स्वदेशी कपास के बीज और खादी शॉल

नव-त्रिंजन समिति के अध्यक्ष सुरिंदर पाल सिंह सियाग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वदेशी कपास के बीज और खादी के कपड़े के नमूने भी भेंट किए।

इसके अलावा, फरीदकोट जिले के चैना गांव की बुनकर रामनदीप कौर द्वारा हाथ से बुना गया खादी का शॉल भी प्रधानमंत्री को सम्मान स्वरूप भेंट किया गया।


Key Highlights:

  • ● राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर KVM का 20 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पीएम मोदी से मिला।
  • ● प्राकृतिक खेती से उगाई गई गैर-बीटी स्वदेशी कपास से बना खादी का तिरंगा भेंट किया गया।
  • ● प्रतिनिधिमंडल में 10 प्राकृतिक किसान और 10 बुनकर शामिल थे।
  • ● अधिकांश महिला बुनकर फरीदकोट के जैतो स्थित नव-त्रिंजन पहल से जुड़ी हैं।
  • ● प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक खेती को भविष्य का महत्वपूर्ण मार्ग बताया।
  • ● प्रतिनिधिमंडल ने 'फार्म-टू-फैब्रिक' मॉडल और ग्रामीण हस्तकरघा पहल की जानकारी साझा की।
  • ● प्रधानमंत्री को स्वदेशी कपास के बीज, खादी के नमूने और हाथ से बुना शॉल भी भेंट किया गया।

FAQ Section

Q1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने वाला प्रतिनिधिमंडल किस संगठन का था?

उत्तर: यह प्रतिनिधिमंडल फरीदकोट स्थित खेती विरासत मिशन (KVM) का था।

Q2. प्रधानमंत्री को क्या भेंट किया गया?

उत्तर: प्राकृतिक खेती से उगाई गई स्वदेशी गैर-बीटी कपास से तैयार हाथ से काता और बुना खादी का राष्ट्रीय ध्वज, स्वदेशी कपास के बीज, खादी के नमूने और हाथ से बुना खादी शॉल भेंट किया गया।

Q3. प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल थे?

उत्तर: इसमें 10 प्राकृतिक किसान एवं किसान-प्रशिक्षक और 10 बुनकर शामिल थे, जिनमें अधिकांश ग्रामीण महिलाएं थीं।

Q4. नव-त्रिंजन पहल का उद्देश्य क्या है?

उत्तर: स्वदेशी कपास आधारित 'फार्म-टू-फैब्रिक' मॉडल विकसित कर पारंपरिक कताई-बुनाई, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देना।


Conclusion:

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर खेती विरासत मिशन के प्रतिनिधिमंडल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात ने प्राकृतिक खेती, स्वदेशी कपास और पारंपरिक हथकरघा उद्योग को नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। यह पहल ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण, टिकाऊ कृषि और स्थानीय हस्तशिल्प को प्रोत्साहित करने का एक प्रेरक उदाहरण भी है।Screenshot_591

Edited By: Atul Sharma

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