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उना के पक्षियों से शुरू हुआ सफर, आज देशभर में पहचान बना चुके हैं मूर्तिकार मोहिंदर मस्ताना
खेती की मिट्टी से पक्षियों की आकृतियां बनाने वाले मस्ताना ने संतinikेतन से हासिल की कला की नई दृष्टि, देश की प्रतिष्ठित कला दीर्घाओं में लगा चुके हैं प्रदर्शनियां
उना के पक्षियों और प्रकृति से बचपन में प्रभावित हुए मोहिंदर मस्ताना आज देश के चर्चित मूर्तिकारों में शामिल हैं। मिट्टी, लकड़ी, धातु और मिश्रित माध्यमों से उनकी कला को पहचान मिली है।
जालंधर। बचपन में अपने गृह क्षेत्र उना में छोटे-छोटे पक्षियों को निहारने वाले मोहिंदर मस्ताना ने शायद उस समय नहीं सोचा होगा कि यही पक्षी आगे चलकर उनकी कला की पहचान बनेंगे। खेतों से मिलने वाली मिट्टी से पक्षियों की आकृतियां बनाने की शुरुआत करने वाले मस्ताना आज क्षेत्र के चर्चित मूर्तिकारों में शामिल हैं।
प्रकृति और उसके आसपास दिखाई देने वाली दुनिया आज भी उनकी मूर्तिकला का प्रमुख विषय है। एपिजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स, जालंधर के मूर्तिकला विभाग के प्रमुख मोहिंदर मस्ताना के नाम कई पुरस्कार हैं। उनकी कलाकृतियां देश की प्रतिष्ठित कला दीर्घाओं में प्रदर्शित हो चुकी हैं, जिनमें मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलरी भी शामिल है।
पक्षी और प्रकृति उनकी कला का प्रमुख आधार
मस्ताना की मूर्तियों में प्रकृति और मानवीय भावनाओं का अनूठा मेल देखने को मिलता है। कहीं मां अपने बच्चे को मजबूती से गले लगाती नजर आती है, तो कहीं पक्षी टेढ़े-मेढ़े बर्तनों पर बैठे दिखाई देते हैं।उनकी रचनाओं में छोटे पक्षी विचारों में खोए चिंतकों के करीब पहुंचते हैं, जबकि कुछ आकृतियों में पक्षी सीढ़ियों पर संतुलन साधते नजर आते हैं। उनकी कला में मनुष्य को भी गहरे विचार और आत्ममंथन के क्षणों में प्रस्तुत किया गया है।
54 साल की उम्र में भी सीखने और देखने की निरंतरता
54 वर्षीय मस्ताना के लिए मूर्तिकला दुनिया को समझने और उसे अभिव्यक्त करने की भाषा है। पर्यावरण और आसपास की चीजों का बारीकी से अवलोकन उनके कला दृष्टिकोण की आधारशिला रहा है।
कला के प्रति उनकी प्रतिभा को शुरुआती दौर में ही पहचान मिल गई थी। उन्होंने चंडीगढ़ के गवर्नमेंट आर्ट कॉलेज से पढ़ाई की और इसके बाद प्रतिष्ठित छात्रवृत्ति पर शांतिनिकेतन स्थित विश्वभारती से मास्टर डिग्री की पढ़ाई की।
भाई से मिली कला को पेशा बनाने की प्रेरणा
मस्ताना के अनुसार, उनके बड़े भाई गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी, चंडीगढ़ में काम करते थे। वहीं उन्होंने पक्षियों और मिट्टी से बनी आकृतियों को करीब से देखा।
उनके भाई ने यह भी देखा था कि पास के गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज के कई विद्यार्थी संग्रहालय में आकर मूर्तियों और कलाकृतियों की नकल बनाते थे। मस्ताना के मुताबिक, कला को अपना पेशा बनाने के लिए प्रेरित करने वाले उनके भाई ही पहले व्यक्ति थे।
शांतिनिकेतन ने बदली कला की दृष्टि
कॉलेज की पढ़ाई के बाद छात्रवृत्ति मिलने पर मस्ताना दो वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए शांतिनिकेतन पहुंचे। वहां के वातावरण और कलाकारों ने उनकी कला को नई दिशा दी।
शांतिनिकेतन के प्रमुख कलाकारों में रामकिंकर बैज उनकी पसंदीदा हस्तियों में रहे। मस्ताना बताते हैं कि शांतिनिकेतन ने उनकी शैली पर गहरा प्रभाव डाला। प्रकृति के बीच रहकर सृजन करने का अनुभव उन्हें बेहद आकर्षक लगा और रामकिंकर बैज की मूर्तियों ने उनकी कला पर स्थायी प्रभाव छोड़ा।
मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद उन्हें जालंधर में नौकरी मिल गई।
26 वर्षों से एपिजे कॉलेज में दे रहे हैं कला शिक्षा
मोहिंदर मस्ताना पिछले 26 वर्षों से एपिजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स में अध्यापन कर रहे हैं और वर्तमान में कॉलेज के मूर्तिकला विभाग के प्रमुख हैं।
अपने लंबे कला सफर में उन्होंने मिट्टी के अलावा लकड़ी, धातु और मिश्रित माध्यमों का भी इस्तेमाल किया है। उनके काम को पंजाब के साथ-साथ कर्नाटक, राजस्थान, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में पहचान मिली है।
देश की प्रतिष्ठित गैलरियों में प्रदर्शनियां
मस्ताना की कलाकृतियां दिल्ली, कोलकाता, गुजरात और मुंबई समेत कई स्थानों की प्रतिष्ठित कला दीर्घाओं में प्रदर्शित हो चुकी हैं।
मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलरी में वे दो बार अपनी कला प्रदर्शित कर चुके हैं। इनमें एक प्रदर्शनी उन्होंने अपने विभागीय सहयोगी बसुदेव बिस्वास के साथ भी लगाई थी।
शांतिनिकेतन से लौटने के बाद कोलकाता की एक कला दीर्घा में प्रदर्शित उनकी रचनाएं पहली बार बिकी थीं। यही अनुभव उनके पेशेवर कला सफर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बना।
Key Highlights:
- मोहिंदर मस्ताना का बचपन उना में बीता।
- बचपन में पक्षियों और प्रकृति से मिली प्रेरणा उनकी कला में आज भी दिखाई देती है।
- खेत की मिट्टी से पक्षियों की आकृतियां बनाने से कला यात्रा शुरू हुई।
- उन्होंने गवर्नमेंट आर्ट कॉलेज, चंडीगढ़ से शिक्षा प्राप्त की।
- शांतिनिकेतन स्थित विश्वभारती से मास्टर डिग्री की।
- रामकिंकर बैज का उनकी कला शैली पर गहरा प्रभाव रहा।
- पिछले 26 वर्षों से एपिजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स में अध्यापन कर रहे हैं।
- मिट्टी, लकड़ी, धातु और मिश्रित माध्यमों में काम करते हैं।
- जहांगीर आर्ट गैलरी, मुंबई में दो बार प्रदर्शन कर चुके हैं।
- देश के कई राज्यों में पुरस्कार और प्रदर्शनियों से सम्मानित हो चुके हैं।
FAQ Section:
Q1. मोहिंदर मस्ताना कौन हैं?
उत्तर: मोहिंदर मस्ताना एक चर्चित मूर्तिकार हैं और जालंधर स्थित एपिजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स के मूर्तिकला विभाग के प्रमुख हैं।
Q2. मस्ताना की कला में प्रकृति का महत्व क्यों है?
उत्तर: बचपन में उना में पक्षियों और आसपास के प्राकृतिक वातावरण से मिली प्रेरणा ने उनकी कला दृष्टि को प्रभावित किया। यही कारण है कि प्रकृति उनके प्रमुख कलात्मक विषयों में शामिल है।
Q3. मोहिंदर मस्ताना ने कला की शिक्षा कहां से हासिल की?
उत्तर: उन्होंने गवर्नमेंट आर्ट कॉलेज, चंडीगढ़ से पढ़ाई की और बाद में छात्रवृत्ति पर शांतिनिकेतन स्थित विश्वभारती से मास्टर डिग्री की।
Q4. उनकी कला पर किस कलाकार का प्रभाव रहा?
उत्तर: शांतिनिकेतन के प्रसिद्ध मूर्तिकार रामकिंकर बैज का उनकी कला शैली पर गहरा प्रभाव रहा।
Q5. मस्ताना किन माध्यमों में मूर्तियां बनाते हैं?
उत्तर: वे मिट्टी, लकड़ी, धातु और मिश्रित माध्यमों का इस्तेमाल करते हैं।
Conclusion:
मोहिंदर मस्ताना की कला यात्रा इस बात का उदाहरण है कि बचपन की छोटी-सी रुचि भी समर्पण और निरंतर अभ्यास के साथ बड़ी पहचान में बदल सकती है। उना के पक्षियों और प्रकृति से प्रेरित होकर शुरू हुआ उनका सफर आज देश की प्रतिष्ठित कला दीर्घाओं तक पहुंच चुका है। अध्यापन और सृजन के माध्यम से वे नई पीढ़ी को भी कला की दुनिया से जोड़ रहे हैं।
