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कनाडा में गदर आंदोलन की विरासत का अनोखा मेला, 5 बार शामिल हो चुके हैं देश के प्रधानमंत्री
सरे के बेयर क्रीक पार्क में 30वें ‘मेला गदरी बाबेयां दा’ में हजारों लोगों ने लिया हिस्सा, शहीद गदरियों की याद में आयोजित हुआ कार्यक्रम
कनाडा के सरे में गदर आंदोलन के शहीदों की स्मृति में 30वां ‘मेला गदरी बाबेयां दा’ आयोजित हुआ। इस मेले में कनाडा के प्रधानमंत्री पांच बार शामिल हो चुके हैं।
जालंधर। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में गदर आंदोलन की भूमिका इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों में शामिल है। विदेशों में रहकर भारत की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले गदरियों की याद को जीवित रखने के लिए कनाडा में पिछले तीन दशकों से एक विशेष मेला आयोजित किया जा रहा है।
ब्रिटिश कोलंबिया के सरे स्थित बेयर क्रीक पार्क में 3 अगस्त को 30वां ‘मेला गदरी बाबेयां दा’ आयोजित किया गया। दिनभर चले इस कार्यक्रम में हजारों भारतीयों और कनाडाई नागरिकों ने हिस्सा लिया। मेले के दौरान पार्क का वातावरण गदर आंदोलन से जुड़े शहीदों और क्रांतिकारियों के चित्रों से सजाया गया था।
कनाडा के प्रधानमंत्री 5 बार मेले में पहुंचेगदर आंदोलन से जुड़े इस मेले की खास पहचान यह है कि कनाडा के प्रधानमंत्री अब तक पांच बार इसमें शामिल हो चुके हैं। यह तथ्य इस आयोजन की ऐतिहासिक और सामाजिक अहमियत को दर्शाता है।
मेले का उद्देश्य गदर आंदोलन के उन शहीदों की स्मृति को सम्मान देना है, जिन्होंने 20वीं सदी के शुरुआती दौर में भारत और विदेशों में देश की आजादी के लिए अपना जीवन बलिदान किया।
साहिब सिंह थिंड ने की थी मेले की शुरुआत
इस मेले की परिकल्पना कपूरथला जिले के सुल्तानपुर लोधी के मूल निवासी साहिब सिंह थिंड ने की थी। वह कपूरथला के ठट्ठा टिब्बा गांव से संबंध रखते हैं। गदर आंदोलन के इतिहास पर लंबे समय से शोध करने वाले थिंड ने इस मेले को गदरियों की विरासत और शहीदों को श्रद्धांजलि देने के मंच के रूप में विकसित किया।
कनाडा जाने के बाद उन्होंने गदर आंदोलन से जुड़े इतिहास और शहीदों की यादों को संरक्षित करने के लिए लगातार काम किया। पिछले 30 वर्षों से यह मेला प्रो. मोहन सिंह मेमोरियल फाउंडेशन (कनाडा) की ओर से आयोजित किया जा रहा है। साहिब सिंह थिंड वर्तमान में फाउंडेशन के अध्यक्ष हैं।
इस साल छह बब्बर अकालियों को समर्पित रहा मेला
इस वर्ष का मेला उन छह बब्बर अकालियों को समर्पित किया गया, जिन्हें 1916 में लाहौर में शहीद किया गया था। मेले की तैयारी के दौरान साहिब सिंह थिंड ने भारत का दौरा किया और इन शहीदों से जुड़े 35 गांवों में जाकर उनके जीवन और संघर्ष के बारे में जानकारी जुटाई।
उन्होंने कई महीनों तक शहीदों के संघर्ष और बलिदान से जुड़े दस्तावेज और स्थानीय जानकारी एकत्रित की।
गदरी विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास
साहिब सिंह थिंड ने बताया कि कनाडा में उन्हें गदर आंदोलन से जुड़े बाबा भगत सिंह बिलगा और ज्ञानी केसरी सिंह नॉवेलिस्ट से मिलने का अवसर मिला था। उन्होंने बताया कि दोनों उनके लिए इस मेले की प्रेरणा रहे।
बाबा भगत सिंह बिलगा 1996 में आयोजित पहले मेले में मौजूद थे। थिंड के अनुसार भाई भाग सिंह कनाडियन, भाई मेवा सिंह लोपोके और भाई बलवंत सिंह जैसे गदर आंदोलन से जुड़े लोगों ने भारत और कनाडा में देश के लिए बलिदान दिया।
400 गदरियों के नाम पर स्कूलों का प्रस्ताव
साहिब सिंह थिंड ने बताया कि वह पंजाब सरकार के संपर्क में हैं और गदर आंदोलन से जुड़े शहीदों के पैतृक गांवों में करीब 400 स्कूलों का नाम उनके नाम पर रखने की मांग कर रहे हैं।
उनके अनुसार लगभग 400 गदरियों में से 100 को फांसी दी गई थी, जबकि 300 को आजीवन कारावास की सजा भुगतनी पड़ी।
गदर आंदोलन की विरासत को याद करने का मंच
‘मेला गदरी बाबेयां दा’ केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम में विदेशों में सक्रिय रहे क्रांतिकारियों की भूमिका को याद करने का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।
तीन दशक से जारी यह आयोजन कनाडा में रह रहे भारतीय समुदाय की ऐतिहासिक जड़ों और गदर आंदोलन की विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में भी भूमिका निभा रहा है।
Key Highlights:
• कनाडा के सरे में 30वां ‘मेला गदरी बाबेयां दा’ आयोजित हुआ।
• कार्यक्रम 3 अगस्त को बेयर क्रीक पार्क में हुआ।
• मेले में हजारों भारतीयों और कनाडाई नागरिकों ने हिस्सा लिया।
• कनाडा के प्रधानमंत्री इस मेले में पांच बार शामिल हो चुके हैं।
• मेले की शुरुआत कपूरथला के ठट्ठा टिब्बा गांव के साहिब सिंह थिंड की पहल पर हुई।
• यह आयोजन पिछले 30 वर्षों से प्रो. मोहन सिंह मेमोरियल फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है।
• इस वर्ष का मेला 1916 में लाहौर में शहीद हुए छह बब्बर अकालियों को समर्पित था।
• साहिब सिंह थिंड गदर आंदोलन के इतिहास पर लंबे समय से शोध कर रहे हैं।
• उन्होंने करीब 400 गदरियों के नाम पर उनके पैतृक गांवों में स्कूलों के नामकरण की मांग की है।
FAQ Section:
Q1. ‘मेला गदरी बाबेयां दा’ कहां आयोजित होता है?
उत्तर: यह मेला कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया स्थित सरे के बेयर क्रीक पार्क में आयोजित होता है।
Q2. इस वर्ष कौन सा मेला आयोजित किया गया?
उत्तर: इस वर्ष 3 अगस्त को ‘मेला गदरी बाबेयां दा’ का 30वां संस्करण आयोजित किया गया।
Q3. मेले की शुरुआत किसने की थी?
उत्तर: मेले की परिकल्पना कपूरथला जिले के ठट्ठा टिब्बा गांव के साहिब सिंह थिंड ने की थी।
Q4. मेले में कनाडा के प्रधानमंत्री कितनी बार शामिल हो चुके हैं?
उत्तर: कनाडा के प्रधानमंत्री इस मेले में पांच बार शामिल हो चुके हैं।
Q5. इस वर्ष का मेला किसे समर्पित था?
उत्तर: इस वर्ष का मेला 1916 में लाहौर में शहीद हुए छह बब्बर अकालियों की स्मृति को समर्पित था।
Conclusion:
कनाडा में आयोजित ‘मेला गदरी बाबेयां दा’ गदर आंदोलन के इतिहास और उसके शहीदों की विरासत को जीवित रखने का महत्वपूर्ण प्रयास है। पिछले 30 वर्षों से जारी यह आयोजन भारत के स्वतंत्रता संग्राम में विदेशों में सक्रिय रहे क्रांतिकारियों के योगदान को याद करता है। साहिब सिंह थिंड और प्रो. मोहन सिंह मेमोरियल फाउंडेशन की पहल के जरिए गदर आंदोलन की कहानियां नई पीढ़ी तक पहुंच रही हैं।
