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UP कैबिनेट का बड़ा फैसला, पंचायत चुनावों में OBC आरक्षण के लिए बनेगा विशेष आयोग
योगी सरकार ने तीन स्तरीय पंचायत राज संस्थाओं में पिछड़ा वर्ग आरक्षण के लिए समर्पित आयोग को दी मंजूरी
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए विशेष आयोग गठन को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही जन्म-मृत्यु पंजीकरण नियम 2026 और पशु चिकित्सकों की इंटर्नशिप भत्ता बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए।
उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में तीन स्तरीय पंचायत राज संस्थाओं में OBC आरक्षण के लिए एक विशेष आयोग गठित करने को मंजूरी दी गई।
यह आयोग ग्रामीण स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में पिछड़े वर्गों के आरक्षण से जुड़े मुद्दों का अध्ययन करेगा और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।
हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज होंगे आयोग के अध्यक्ष
सरकार द्वारा गठित किए जाने वाले “उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण स्थानीय निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग” में कुल पांच सदस्य होंगे। आयोग की अध्यक्षता हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे।आयोग को छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। माना जा रहा है कि आयोग की रिपोर्ट के बाद ही पंचायत चुनावों में OBC आरक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
पंचायत चुनाव टलने की संभावना
वर्तमान पंचायत राज संस्थाओं का कार्यकाल मई से जुलाई 2026 के बीच समाप्त होने वाला है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि नए पंचायत चुनाव 2027 के विधानसभा चुनावों के बाद कराए जा सकते हैं।
हालांकि वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने पंचायत चुनाव टालने के सवाल पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
सुप्रीम कोर्ट के ‘ट्रिपल टेस्ट’ नियम के तहत कदम
सरकार का कहना है कि यह आयोग सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित “ट्रिपल टेस्ट” व्यवस्था के तहत गठित किया जा रहा है। इस व्यवस्था के अनुसार OBC आरक्षण लागू करने से पहले राज्य सरकार को पिछड़ेपन की प्रकृति और प्रभावों का अध्ययन करने के लिए विशेष आयोग बनाना जरूरी है।
सुरेश खन्ना ने बताया कि पंचायतों में आरक्षण उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1947, उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम 1961 और संविधान के अनुच्छेद 243-D के तहत दिया जाता है।
जन्म और मृत्यु पंजीकरण नियम 2026 को भी मंजूरी
कैबिनेट बैठक में “उत्तर प्रदेश जन्म और मृत्यु पंजीकरण नियम 2026” को भी मंजूरी दी गई। नए नियमों के तहत जन्म या मृत्यु का पंजीकरण 21 दिनों के भीतर मुफ्त होगा।
इसके बाद पंजीकरण कराने पर अलग-अलग अवधि के अनुसार शुल्क लिया जाएगा:
देरी से पंजीकरण पर शुल्क:
- 21 से 30 दिन के भीतर: ₹20
- 30 दिन से 1 वर्ष तक: ₹50
- 1 वर्ष के बाद: ₹100
इसके अलावा टाइपिंग त्रुटि सुधार, माता-पिता के नाम जोड़ने और पुराने प्रमाण पत्र खोजने के लिए भी शुल्क तय किया गया है।
पशु चिकित्सकों का इंटर्नशिप भत्ता तीन गुना बढ़ा
राज्य कैबिनेट ने पशु चिकित्सकों के इंटर्नशिप भत्ते को 4,000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 12,000 रुपये प्रतिमाह करने को भी मंजूरी दी।
पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि अन्य राज्यों में अधिक भत्ता मिलने के कारण यूपी सरकार ने यह फैसला लिया है। इस निर्णय से राज्य सरकार पर सालाना 4.20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
Key Highlights:
- पंचायत चुनावों में OBC आरक्षण के लिए विशेष आयोग बनेगा
- आयोग की अध्यक्षता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे
- पंचायत चुनाव टलने की संभावना बढ़ी
- जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नए नियमों को मंजूरी
- पशु चिकित्सकों का इंटर्नशिप भत्ता ₹4,000 से बढ़ाकर ₹12,000 किया गया
FAQ Section:
Q1. यूपी सरकार ने किस आयोग के गठन को मंजूरी दी है?
सरकार ने पंचायत चुनावों में OBC आरक्षण के लिए विशेष पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दी है।
Q2. आयोग में कितने सदस्य होंगे?
आयोग में कुल पांच सदस्य होंगे।
Q3. जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नए नियम क्या हैं?
21 दिनों के भीतर पंजीकरण मुफ्त होगा, इसके बाद देरी के अनुसार शुल्क देना होगा।
Q4. पशु चिकित्सकों का इंटर्नशिप भत्ता कितना बढ़ाया गया?
भत्ता ₹4,000 से बढ़ाकर ₹12,000 प्रतिमाह कर दिया गया है।
Conclusion:
उत्तर प्रदेश कैबिनेट के ये फैसले पंचायत चुनावों, OBC आरक्षण व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। विशेष आयोग के गठन से पंचायत चुनावों की दिशा और समयसीमा पर बड़ा असर पड़ सकता है। वहीं जन्म-मृत्यु पंजीकरण और पशु चिकित्सकों के भत्ते से जुड़े फैसले भी आम लोगों और युवाओं के लिए अहम साबित होंगे।

