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जाबोवाल सरकारी स्कूल के छात्रों का कमाल, राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञान प्रोजेक्ट को मिला ‘बेस्ट प्रोजेक्ट’ अवॉर्ड
ग्रामीण नवाचार को मिली नई पहचान, बायोमास आधारित कुकिंग सिस्टम ने राष्ट्रीय मंच पर बढ़ाया पंजाब का मान
पंजाब के जाबोवाल स्थित सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के दो छात्रों और एक शिक्षक द्वारा तैयार विज्ञान प्रोजेक्ट को शिक्षा मंत्रालय के ‘विकसित भारत बिल्डाथॉन’ में जिला श्रेणी के सर्वश्रेष्ठ प्रोजेक्ट का सम्मान मिला है। यह प्रोजेक्ट पर्यावरण संरक्षण और पोषण सुरक्षा पर आधारित है।
राष्ट्रीय स्तर पर चमका जाबोवाल स्कूल का विज्ञान प्रोजेक्ट
ग्रामीण क्षेत्रों में नवाचार और वैज्ञानिक सोच को नई पहचान देते हुए पंजाब के सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, जाबोवाल के छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। स्कूल के दो छात्रों और एक शिक्षक द्वारा विकसित विज्ञान प्रोजेक्ट को शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित ‘विकसित भारत बिल्डाथॉन’ में ‘बेस्ट प्रोजेक्ट अंडर डिस्ट्रिक्ट कैटेगरी’ का पुरस्कार मिला है।
यह उपलब्धि न केवल स्कूल बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गई है।
पर्यावरण और पोषण संरक्षण पर आधारित है प्रोजेक्ट
स्टीम तकनीक से भोजन पकाने का अनोखा मॉडल
“इनोवेटिव बायोमास-बेस्ड कुकिंग सिस्टम फॉर एन्हांस्ड न्यूट्रिशनल प्रिजर्वेशन एंड एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी” शीर्षक वाले इस प्रोजेक्ट को व्यावसायिक व्याख्याता (हॉर्टिकल्चर) संजीव कुमार के मार्गदर्शन में छात्रों साजनप्रीत सिंह और सुखबीर सिंह ने तैयार किया।इस मॉडल में भोजन को स्टीम तकनीक से पकाया जाता है, जिससे भोजन के पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं और पारंपरिक हानिकारक खाना पकाने की प्रक्रियाओं से बचाव होता है।
कृषि और बागवानी कचरे से तैयार किया बायोफ्यूल
प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि इसमें उपयोग होने वाला बायोमास ईंधन स्कूल द्वारा कृषि और बागवानी अपशिष्ट से तैयार किया गया।
जैविक कचरे का किया उपयोग
संजीव कुमार ने बताया कि बायोफ्यूल तैयार करने के लिए:
- पराली और कृषि अवशेष
- बगीचों का कचरा
- वेस्ट पेपर
- लकड़ी का बुरादा
- पार्थेनियम जैसे खरपतवार
का इस्तेमाल किया गया।
इससे न केवल कचरा प्रबंधन को बढ़ावा मिला बल्कि पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा उपयोग का भी संदेश दिया गया।
शिक्षा मंत्रालय से मिला सम्मान और नकद पुरस्कार
स्कूल को शिक्षा मंत्रालय की ओर से इस उपलब्धि की आधिकारिक पुष्टि मिल चुकी है। साथ ही प्रोजेक्ट को नकद पुरस्कार के लिए भी चुना गया है।
स्कूल प्रभारी जर्मनजीत सिंह ने छात्रों और शिक्षक को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि पूरे संस्थान के लिए गर्व और सम्मान का विषय है।
ग्रामीण छात्रों ने किसानों को भी किया जागरूक
दोनों छात्र ग्रामीण पृष्ठभूमि से हैं और वे किसानों तथा स्थानीय लोगों को टिकाऊ ऊर्जा उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं।
उन्होंने गांवों में जैविक अपशिष्ट से ईंधन तैयार करने और स्वच्छ ऊर्जा अपनाने को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाया।
क्या है विकसित भारत बिल्डाथॉन?
आत्मनिर्भर भारत की सोच को बढ़ावा देने वाली पहल
‘विकसित भारत बिल्डाथॉन’ शिक्षा मंत्रालय की राष्ट्रीय स्तर की पहल है, जिसका उद्देश्य युवाओं को नवाचार, आत्मनिर्भरता और सतत विकास की दिशा में प्रेरित करना है।
यह कार्यक्रम मुख्य रूप से चार विषयों पर केंद्रित है:
- आत्मनिर्भर भारत
- वोकल फॉर लोकल
- स्वदेशी
- समृद्ध भारत
इस पहल के जरिए छात्रों को ऐसे व्यावहारिक और सामाजिक रूप से उपयोगी समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जो देश और समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान कर सकें।
Key Highlights:
- जाबोवाल सरकारी स्कूल के विज्ञान प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय सम्मान
- शिक्षा मंत्रालय के विकसित भारत बिल्डाथॉन में मिला अवॉर्ड
- बायोमास आधारित कुकिंग सिस्टम पर आधारित है प्रोजेक्ट
- कृषि और बागवानी कचरे से तैयार किया गया बायोफ्यूल
- छात्रों को नकद पुरस्कार के लिए भी चुना गया
FAQ Section:
Q1. जाबोवाल स्कूल के प्रोजेक्ट को कौन-सा पुरस्कार मिला?
प्रोजेक्ट को ‘बेस्ट प्रोजेक्ट अंडर डिस्ट्रिक्ट कैटेगरी’ पुरस्कार मिला है।
Q2. यह प्रोजेक्ट किस विषय पर आधारित है?
यह प्रोजेक्ट बायोमास आधारित पर्यावरण अनुकूल कुकिंग सिस्टम और पोषण संरक्षण पर आधारित है।
Q3. प्रोजेक्ट किसने तैयार किया?
छात्र साजनप्रीत सिंह और सुखबीर सिंह ने शिक्षक संजीव कुमार के मार्गदर्शन में इसे तैयार किया।
Q4. विकसित भारत बिल्डाथॉन क्या है?
यह शिक्षा मंत्रालय की राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य छात्रों में नवाचार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।
Conclusion:
जाबोवाल सरकारी स्कूल के छात्रों और शिक्षक की यह उपलब्धि साबित करती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रतिभा और नवाचार की कोई कमी नहीं है। पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ ऊर्जा और वैज्ञानिक सोच पर आधारित यह प्रोजेक्ट आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। ऐसे प्रयास भारत को आत्मनिर्भर और पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

