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हरियाणा सरकार के 590 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में एफआईआर दर्ज
चंडीगढ़ स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक की शाखाओं से जुड़ा मामला, उच्चस्तरीय समिति गठित
State Vigilance and Anti-Corruption Bureau ने हरियाणा सरकार के खातों से जुड़े 590 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में बैंक अधिकारियों और सार्वजनिक सेवकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मुख्यमंत्री ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
State Vigilance and Anti-Corruption Bureau ने चंडीगढ़ स्थित IDFC First Bank और AU Small Finance Bank की शाखाओं में हरियाणा सरकार के खातों से जुड़े कथित 590 करोड़ रुपये के घोटाले में एफआईआर दर्ज की है।
यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत बैंक अधिकारियों, लोक सेवकों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज किया गया है।
मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने हरियाणा विधानसभा में कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बाद में मीडिया से बातचीत में मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की घोषणा भी की।
विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। नेता प्रतिपक्ष Bhupinder Singh Hooda ने सरकार से पूछा कि घोटाले के उजागर होने के बाद क्या कदम उठाए गए। कांग्रेस विधायक Ashok Arora ने सवाल किया कि सरकारी धन राष्ट्रीयकृत बैंक के बजाय निजी बैंक में क्यों रखा गया।
मुख्यमंत्री सैनी ने मामले को “बेहद गंभीर” बताते हुए आश्वस्त किया कि राज्य का धन सुरक्षित है और हर एक पैसा वापस लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि तीन-चार विभागों ने अपने फंड इस बैंक में जमा किए थे, लेकिन अनियमितता सामने आने पर खातों को बंद कर धनराशि अन्य बैंकों में स्थानांतरित कर दी गई है। साथ ही संबंधित बैंक को डि-एम्पैनल कर दिया गया है।
हालांकि, विपक्ष का दावा है कि घोटाले का खुलासा बैंक की ओर से किया गया, जबकि सरकार ने इसका श्रेय स्वयं लिया।
इसी बीच AU Small Finance Bank ने स्पष्ट किया है कि उपलब्ध तथ्यों और प्रारंभिक जांच के आधार पर बैंक पर किसी वित्तीय प्रभाव या धोखाधड़ी की कोई पुष्टि नहीं हुई है।
