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पीएयू के स्वदेशी एक्सपो में कठपुतलियों की खनक ने मोहा मन
राजस्थान की 1500 वर्ष पुरानी कठपुतली परंपरा ने बच्चों और बड़ों को किया मंत्रमुग्ध
Punjab Agricultural University में चल रहे स्वदेशी एक्सपो में राजस्थान की पारंपरिक कठपुतली कला ने दर्शकों, खासकर बच्चों, को आकर्षित किया।
Punjab Agricultural University (पीएयू) में आयोजित स्वदेशी एक्सपो के दौरान कठपुतलियों की मधुर खनक और रोशनी में चमकते उनके रंगीन चेहरे बच्चों और बड़ों दोनों को अपनी ओर खींच रहे हैं।
राजस्थान से आए कलाकार विक्की ने बताया कि उन्होंने यह कला अपने पूर्वजों से सीखी है और 15 वर्ष की आयु से मंचन कर रहे हैं। उनकी आवाज में इस विरासत के प्रति श्रद्धा और जिम्मेदारी साफ झलकती है।
राजस्थान का Bhatt community कठपुतली कला का मूल संरक्षक माना जाता है, जिसने करीब 1500 वर्षों तक इस लोक परंपरा को सहेजकर रखा। उनकी निष्ठा के कारण यह कला समय की आंधियों के बावजूद जीवित रही।
आज भी विक्की जैसे कलाकार इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित हैं। मेले में बच्चों ने उत्सुकता से कठपुतलियों को नाचते, नकली युद्ध करते और राजा-रानियों की कहानियां सुनाते देखा। डिजिटल युग में भी कठपुतली की जीवंतता और स्पर्श की जादुई अनुभूति लोगों को बांधे रखती है।
विक्की ने कहा, “यह कठिन काम है, लेकिन यही हमारी जिंदगी है।”
उन्होंने बताया कि ‘कठपुतली’ केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि कहानी कहने की सबसे शुद्ध विधा है। इसके माध्यम से लोककथाएं, पौराणिक प्रसंग और नैतिक संदेश प्रस्तुत किए जाते हैं। हर प्रस्तुति दर्शकों को एक ऐसे संसार में ले जाती है, जहां डोरियां किस्मत को दिशा देती हैं और हर हाव-भाव का अपना अर्थ होता है।
