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लांबरा में गूंजा खेल का बिगुल, गांव को मिली अपनी फुटबॉल टीम
पूर्व आईएएस काहन सिंह पन्नू की पहल से बच्चों को मिला नया मंच, नशे से दूर रखने की कोशिश
होशियारपुर के लांबरा गांव में Kahn Singh Pannu की पहल पर Lambra Kangri Agriculture Cooperative Society ने फुटबॉल टीम की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य बच्चों को खेलों से जोड़कर सकारात्मक दिशा देना है।
Hoshiarpur जिले के शांत गांव लांबरा में अब हर शाम सीटी की आवाज गूंजती है, जो बच्चों को खेल मैदान की ओर बुलाती है। कभी सुनसान रहने वाला मैदान अब ऊर्जा, उत्साह और उद्देश्य से भर गया है। गांव के युवाओं को अब अपनी फुटबॉल टीम का गौरव मिला है।
पूर्व आईएएस अधिकारी Kahn Singh Pannu की दूरदर्शिता के चलते Lambra Kangri Agriculture Cooperative Society ने अपनी फुटबॉल टीम शुरू की है। एक साधारण विचार से शुरू हुई यह पहल अब अनुशासन, टीमवर्क और सामुदायिक एकता का प्रतीक बन चुकी है। यह पहल एक बड़े खेल प्रोजेक्ट की शुरुआत है, जिसके तहत धीरे-धीरे अन्य खेलों की टीमें भी बनाई जाएंगी।
पन्नू ने वर्ष 1999 में इस सोसायटी को गोद लिया था और यह प्रयास उनके ग्रामीण विकास के प्रति लंबे समय से चले आ रहे समर्पण को दर्शाता है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को स्वस्थ गतिविधियों में व्यस्त रखना और उन्हें नशे तथा अत्यधिक स्क्रीन समय जैसी बुरी आदतों से दूर रखना है।
इस पहल में लड़कियों को भी मैदान में उतरने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे अपनी बेटियों को भी अभ्यास सत्रों में भेजें। यह पहल केवल खेल तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और समानता का संदेश भी देती है। संदेश स्पष्ट है — खेल का मैदान सबका है।
Kahn Singh Pannu ने कहा कि यह विचार खेल से कहीं आगे है; यह पीढ़ियों को जोड़ने और गांव की जीवंत संस्कृति को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा, “जब बच्चे शाम को खेलते हैं तो बुजुर्ग भी उन्हें देखने आते हैं, उनका उत्साह बढ़ाते हैं, दूध या घर का बना नाश्ता लेकर आते हैं। यही गांव की असली ताकत है — सब मिलकर आगे बढ़ना।”
सोसायटी के सचिव जसविंदर सिंह ने इसे पन्नू का ड्रीम प्रोजेक्ट बताया। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य बच्चों को सही दिशा और अवसर प्रदान करना है, ताकि वे खेलों में उत्कृष्टता हासिल कर सकें और हानिकारक प्रभावों से दूर रह सकें।
आज लांबरा का मैदान सिर्फ खेल का मैदान नहीं रहा, बल्कि गांव का नया मिलन केंद्र बन चुका है, जहां हर शाम खेल के साथ-साथ अपनापन और उत्साह भी पनपता है।
