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एनडीआरआई में ‘डॉ. केके अय्या मेमोरियल ऑरेशन’ आयोजित
नाबार्ड अध्यक्ष ने कहा— जलवायु जोखिम के दौर में डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत सहारा
ICAR-National Dairy Research Institute (एनडीआरआई) में 22वें दीक्षांत समारोह से पहले चल रहे शैक्षणिक पखवाड़े के दौरान डॉ. केके अय्या मेमोरियल ऑरेशन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में Shaji Krishnan V, अध्यक्ष National Bank for Agriculture and Rural Development (नाबार्ड), मुख्य अतिथि रहे।
ICAR-National Dairy Research Institute (एनडीआरआई) के 22वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर चल रहे शैक्षणिक पखवाड़े के तहत डॉ. केके अय्या मेमोरियल ऑरेशन का आयोजन Dr D Sundaresan Auditorium में किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एनडीआरआई के निदेशक Dheer Singh ने मुख्य अतिथि Shaji Krishnan V, अध्यक्ष National Bank for Agriculture and Rural Development (नाबार्ड), का स्वागत किया।
इस अवसर पर एनडीआरआई के दूरदर्शी निदेशक रहे KK Iya (1957–1965) को श्रद्धांजलि दी गई। वह भारत सरकार के पूर्व डेयरी विकास सलाहकार, Indian Council of Agricultural Research (आईसीएआर) में उप महानिदेशक और Food and Agriculture Organization (एफएओ) के विशेषज्ञ भी रह चुके थे। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलन और पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।
अपने व्याख्यान “Climate Risk and Rural Livelihoods: Strengthening Dairy as a Shock-Absorber for Smallholders” में डॉ. शाजी कृष्णन ने कहा कि भारत का डेयरी क्षेत्र ग्रामीण परिवारों की आर्थिक मजबूती का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गया है।
उन्होंने बताया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन चुका है और यहां सालाना लगभग 248 मिलियन टन दूध का उत्पादन होता है, जो वैश्विक उत्पादन का करीब 25 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि 2014 से 2025 के बीच दूध उत्पादन में 69 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है और इस दौरान औसत वार्षिक वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत रही है। इसी अवधि में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता भी 48 प्रतिशत बढ़कर 485 ग्राम प्रतिदिन हो गई है, जबकि 1950-51 में यह केवल 124 ग्राम प्रतिदिन थी।
