दिल्ली-एनसीआर में एलपीजी संकट से प्रवासी मजदूर और झुग्गी बस्तियों के लोग परेशान

छोटे सिलेंडरों की कीमतें चार गुना तक बढ़ीं, ब्लैक मार्केट में 5,000 रुपये तक पहुंचा दाम

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दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में जारी एलपीजी आपूर्ति संकट का सबसे ज्यादा असर प्रवासी मजदूरों, किराएदारों और झुग्गी-बस्ती में रहने वाले लोगों पर पड़ रहा है। छोटे सिलेंडरों और अनौपचारिक रिफिल पर निर्भर परिवारों को अब गैस महंगे दामों पर और सीमित मात्रा में मिल रही है।

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में चल रहे एलपीजी की कमी ने प्रवासी मजदूरों, किराएदारों और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। खाना पकाने के लिए छोटे सिलेंडरों या स्थानीय स्तर पर होने वाली रिफिलिंग पर निर्भर परिवारों के लिए गैस की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं और सप्लाई भी कम हो गई है।

बताया जा रहा है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण रसोई गैस की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे Gurugram और Faridabad की कई मजदूर बस्तियों और झुग्गी इलाकों में दैनिक जीवन बाधित हो गया है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार, कई कम आय वाले परिवार 5 लीटर के छोटे सिलेंडरों या स्थानीय विक्रेताओं से आंशिक रिफिल पर निर्भर रहते हैं, क्योंकि उनके पास नियमित एलपीजी कनेक्शन नहीं होता। लेकिन हाल के दिनों में इन सिलेंडरों की रिफिलिंग की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है।

लोगों का कहना है कि पहले रिफिल की कीमत लगभग 100 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो अब बढ़कर करीब 400 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। इतना अधिक भुगतान करने के बाद भी लोगों को अक्सर एक बार में केवल 1 किलो गैस ही दी जा रही है, जो कुछ ही दिनों में खत्म हो जाती है।

दुंडाहेड़ा में रहने वाले मैकेनिक रुक्शन ने बताया कि प्रवासी मजदूरों के लिए दस्तावेजों की कमी के कारण नियमित एलपीजी कनेक्शन लेना मुश्किल होता है। इसलिए वे छोटे सिलेंडरों की स्थानीय रिफिलिंग पर निर्भर रहते हैं, लेकिन अब कीमतें चार गुना बढ़ गई हैं और सप्लाई भी कम है।

चक्‍करपुर की घरेलू कामगार पूनम कुमारी ने बताया कि रिफिल न मिलने के कारण उनके परिवार को सामुदायिक रसोई या नियोक्ताओं से मिले बचे हुए भोजन पर निर्भर रहना पड़ा।

उन्होंने कहा, “बुधवार से हम बहुत परेशान हैं। दो दिन हमें बाहर का खाना खाना पड़ा। हमारे इलाके की दुकानों में स्टॉक नहीं है। मैं Kanhai और Wazirabad के बाजारों में भी गई, लेकिन सिलेंडर नहीं मिला।”

यह समस्या उन किराएदारों को भी प्रभावित कर रही है जो आवासीय सोसाइटियों में रहते हैं लेकिन उनके पास स्थायी एलपीजी कनेक्शन नहीं है।

राइजिंग होम्स रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीण मलिक ने कहा कि कई निवासी निजी विक्रेताओं पर निर्भर हैं क्योंकि पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की व्यवस्था दो साल बाद भी शुरू नहीं हो पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस स्थिति का फायदा उठाकर कुछ विक्रेता 900 रुपये के सिलेंडर को ब्लैक मार्केट में 4,000 से 5,000 रुपये तक में बेच रहे हैं।

इस बीच नियमित एलपीजी कनेक्शन वाले घरों को भी सिलेंडर बुकिंग में देरी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे संकट और गहरा गया है।

बढ़ती शिकायतों के बीच Gurugram प्रशासन ने टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं और लोगों से एलपीजी वितरकों द्वारा देरी या मना करने की शिकायत दर्ज कराने को कहा है।

 
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Edited By: Karan Singh

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