19 साल पुराना पारिवारिक संपत्ति विवाद सुलझा, रेवाड़ी ADR केंद्र की मध्यस्थता से मिला समाधान

सुप्रीम कोर्ट के ‘समाधान समारोह’ अभियान के तहत भाई-बहन के बीच चल रहा विवाद आपसी सहमति से समाप्त

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करीब 19 वर्षों से विभिन्न अदालतों में लंबित पारिवारिक संपत्ति विवाद का रेवाड़ी के वैकल्पिक विवाद निपटान (ADR) केंद्र में सफलतापूर्वक समाधान हो गया। सुप्रीम कोर्ट में लंबित यह मामला मध्यस्थता के जरिए आपसी सहमति से सुलझाया गया, जिससे दोनों पक्षों को राहत मिली।

19 साल पुराने विवाद का मध्यस्थता से हुआ अंत

हरियाणा के रेवाड़ी में वैकल्पिक विवाद निपटान (ADR) केंद्र ने एक लंबे समय से चले आ रहे पारिवारिक संपत्ति विवाद को सुलझाने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। लगभग 19 वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया से गुजर रहा यह मामला आखिरकार मध्यस्थता के माध्यम से सौहार्दपूर्ण तरीके से निपट गया।

यह मामला भाई और बहन के बीच पैतृक संपत्ति को लेकर था, जो विभिन्न न्यायिक मंचों से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था।

सुप्रीम कोर्ट में लंबित था मामला

‘संजोगिता एवं अन्य बनाम धर्मचंद (मृतक) उनके कानूनी उत्तराधिकारियों एवं अन्य’ नामक यह मामला लंबे समय से न्यायालयों में विचाराधीन था।

विवाद की प्रमुख बातें

  • मामला पैतृक संपत्ति से जुड़ा था।
  • विवाद भाई और बहन के बीच था।
  • करीब 19 वर्षों से कानूनी प्रक्रिया जारी थी।
  • मामला अंततः सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था।

लंबे समय तक चले मुकदमे के कारण दोनों पक्ष मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे थे।

ADR केंद्र में हुई कई दौर की बातचीत

रेवाड़ी स्थित ADR केंद्र में मध्यस्थता प्रक्रिया के तहत दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत कराई गई।

मध्यस्थता सत्रों के दौरान संवाद और आपसी सहमति के माध्यम से समाधान का रास्ता निकाला गया, जिसके बाद दोनों पक्ष विवाद समाप्त करने पर सहमत हो गए।

दोनों पक्षों को मिली राहत

समझौते के बाद:

  • वर्षों पुरानी कानूनी लड़ाई समाप्त हुई।
  • दोनों पक्षों को मानसिक और आर्थिक राहत मिली।
  • भविष्य के विवादों की संभावना कम हुई।
  • न्यायिक समय और संसाधनों की भी बचत हुई।

‘समाधान समारोह’ अभियान के तहत मिली सफलता

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), रेवाड़ी की मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी-सह-सचिव डॉ. रेनू सोलखे ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा देशभर में ‘समाधान समारोह’ अभियान शुरू किया गया है।

अभियान का उद्देश्य

  • लंबे समय से लंबित मामलों का निपटारा
  • मध्यस्थता और संवाद को बढ़ावा
  • आपसी सहमति से विवादों का समाधान
  • न्याय प्रक्रिया को अधिक सुलभ और त्वरित बनाना

इस पहल के तहत ऐसे मामलों की पहचान की जाती है जिनमें समझौते की संभावना हो।

मध्यस्थता की बढ़ती प्रभावशीलता का उदाहरण

डॉ. रेनू सोलखे ने कहा कि यह मामला मध्यस्थता प्रणाली की प्रभावशीलता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

उन्होंने बताया कि अदालतों में वर्षों तक लंबित रहने वाले कई मामलों को आपसी संवाद और समझौते के जरिए कम समय में सुलझाया जा सकता है।

मध्यस्थ अनुराधा की रही अहम भूमिका

इस मामले के समाधान में मध्यस्थ अनुराधा की भूमिका महत्वपूर्ण रही। उन्होंने दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक संवाद स्थापित करने और एक स्वीकार्य समझौते तक पहुंचने में मदद की।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मध्यस्थता न केवल विवादों को जल्दी सुलझाती है, बल्कि रिश्तों को भी बेहतर बनाए रखने में सहायक होती है।


Key Highlights:

  • रेवाड़ी ADR केंद्र में 19 साल पुराना विवाद सुलझा
  • मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था
  • भाई-बहन के बीच पैतृक संपत्ति को लेकर था विवाद
  • ‘समाधान समारोह’ अभियान के तहत हुआ निपटारा
  • कई दौर की मध्यस्थता बैठकों के बाद बनी सहमति
  • दोनों पक्षों को मिली कानूनी और मानसिक राहत
  • मध्यस्थ अनुराधा ने निभाई अहम भूमिका

FAQ Section:

Q1. यह विवाद कितने वर्षों से लंबित था?

यह मामला लगभग 19 वर्षों से विभिन्न अदालतों में लंबित था।

Q2. विवाद किस विषय से जुड़ा था?

यह भाई और बहन के बीच पैतृक संपत्ति से संबंधित विवाद था।

Q3. मामला किस अदालत में लंबित था?

मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था।

Q4. विवाद का समाधान कैसे हुआ?

रेवाड़ी के ADR केंद्र में मध्यस्थता और आपसी सहमति के माध्यम से समाधान निकाला गया।

Q5. ‘समाधान समारोह’ अभियान क्या है?

यह सुप्रीम कोर्ट की पहल है, जिसका उद्देश्य लंबे समय से लंबित मामलों को मध्यस्थता और समझौते के जरिए सुलझाना है।


Conclusion:

रेवाड़ी ADR केंद्र में 19 साल पुराने संपत्ति विवाद का समाधान न्यायिक प्रणाली में मध्यस्थता की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। यह मामला साबित करता है कि संवाद, सहमति और वैकल्पिक विवाद निपटान तंत्र के माध्यम से वर्षों पुराने कानूनी विवादों का भी शांतिपूर्ण समाधान संभव है। ‘समाधान समारोह’ जैसी पहलें न्याय को अधिक सुलभ, त्वरित और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही हैं।Screenshot_2244

Edited By: Karan Singh

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