सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर लाडोवाल टोल प्लाजा दो घंटे रहा टोल फ्री, कौमी इंसाफ मोर्चा का प्रदर्शन

पंजाबभर में विरोध प्रदर्शन के तहत दोपहर 12 से 2 बजे तक वाहनों से नहीं वसूला गया टोल, सरकार से मानवीय आधार पर कार्रवाई की मांग

On

सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा ने पंजाबभर में विरोध प्रदर्शन किया। इसी कड़ी में राज्य के सबसे व्यस्त टोल प्लाजाओं में शामिल लाडोवाल टोल प्लाजा दो घंटे तक टोल फ्री रखा गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से लंबे समय से जेल में बंद कैदियों की रिहाई के लिए कदम उठाने की मांग की।

सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर लाडोवाल टोल प्लाजा पर प्रदर्शन

सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर Quami Insaaf Morcha द्वारा पंजाबभर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए। इसी अभियान के तहत लुधियाना स्थित Ladhowal Toll Plaza, जो राज्य के सबसे व्यस्त टोल प्लाजाओं में से एक माना जाता है, को दो घंटे के लिए टोल फ्री कर दिया गया।

प्रदर्शन के दौरान दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक गुजरने वाले वाहनों से कोई टोल शुल्क नहीं लिया गया।

नवजोत कौर सिद्धू ने सरकार से की हस्तक्षेप की मांग

प्रदर्शन स्थल पर पहुंचीं Navjot Kaur Sidhu ने कहा कि वह लंबे समय से इस मुद्दे का समर्थन करती रही हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी वह इस मांग को लेकर मुख्यमंत्री आवास तक मार्च कर चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि मानवीय आधार पर उठाई गई मांग है, जिसे किसानों और विभिन्न संगठनों के संयुक्त मंच द्वारा उठाया जा रहा है।

‘सजा पूरी होने के बावजूद कैदी जेल में’

नवजोत कौर सिद्धू ने कहा कि जिन कैदियों की रिहाई की मांग की जा रही है, वे अपनी निर्धारित सजा पूरी कर चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें पैरोल या अन्य कानूनी राहत नहीं मिल पा रही है।

उन्होंने उठाए ये मुद्दे

  • कई कैदी अपनी सजा पूरी कर चुके हैं
  • परिवार वर्षों से कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं
  • पैरोल देने में देरी हो रही है
  • मामलों की मानवीय आधार पर समीक्षा होनी चाहिए

उन्होंने कहा कि इन मामलों को दोबारा देखा जाना चाहिए ताकि लंबे समय से जेल में बंद लोग अपने परिवारों के साथ जीवन बिता सकें।

मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक मुद्दा उठाने की अपील

सिद्धू ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वह इस विषय को प्रधानमंत्री के समक्ष उठाएं। उनका कहना था कि कई कैदी केवल इसलिए जेल में हैं क्योंकि उनके लिए पैरोल या जमानत की प्रक्रिया आगे बढ़ाने वाला कोई नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों की समीक्षा कर उचित समाधान निकालना चाहिए।

मोर्चा ने सरकार को पुराने वादे याद दिलाए

मोर्चा के सदस्यों ने कहा कि उनकी मांगें स्पष्ट और व्यवहारिक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले सरकार ने आश्वासन दिया था कि लोगों को सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उनकी बात सीधे सुनी जाएगी।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें

  • सिख कैदियों की रिहाई पर निर्णय
  • लंबित पैरोल मामलों की समीक्षा
  • कैदियों को कानूनी राहत उपलब्ध कराना
  • सरकार द्वारा किए गए वादों को पूरा करना

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि भीषण गर्मी में सड़कों पर उतरना उनकी मजबूरी बन गई है क्योंकि उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

केंद्र सरकार पर भी लगाए आरोप

मोर्चा कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे वर्षों से सिख कैदियों की रिहाई के लिए आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में पैरोल तक मंजूर नहीं की जा रही, जिसके चलते आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया गया है।

पुलिस और प्रशासन रहा सतर्क

प्रदर्शन के मद्देनजर प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क रहे। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए टोल प्लाजा और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

अधिकारियों ने पूरे कार्यक्रम के दौरान स्थिति पर नजर बनाए रखी और शांति व्यवस्था सुनिश्चित की।


Key Highlights:

  • लाडोवाल टोल प्लाजा दो घंटे तक टोल फ्री रहा
  • कौमी इंसाफ मोर्चा ने सिख कैदियों की रिहाई की मांग उठाई
  • दोपहर 12 से 2 बजे तक नहीं वसूला गया टोल
  • नवजोत कौर सिद्धू ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया
  • कैदियों की पैरोल और रिहाई की मांग दोहराई गई
  • प्रदर्शन के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा
  • सरकार और केंद्र से मामलों की समीक्षा की मांग

FAQ Section:

Q1. लाडोवाल टोल प्लाजा कितने समय के लिए टोल फ्री रहा?

टोल प्लाजा दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक, यानी दो घंटे के लिए टोल फ्री रखा गया।

Q2. प्रदर्शन किस संगठन द्वारा किया गया?

कौमी इंसाफ मोर्चा ने यह प्रदर्शन आयोजित किया।

Q3. प्रदर्शन की मुख्य मांग क्या थी?

सिख कैदियों की रिहाई और लंबित पैरोल मामलों की समीक्षा।

Q4. नवजोत कौर सिद्धू ने क्या कहा?

उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक नहीं बल्कि मानवीय मुद्दा है और सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

Q5. क्या प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की थी?

हाँ, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।


Conclusion:

लाडोवाल टोल प्लाजा पर हुआ यह प्रदर्शन सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन का हिस्सा था। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मानवीय आधार पर मामलों की समीक्षा करने और लंबे समय से जेल में बंद कैदियों को राहत देने की अपील की। वहीं प्रशासन ने पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखी।Screenshot_2258

Edited By: Karan Singh

खबरें और भी हैं

प्रोफेसर से बने पर्यावरण योद्धा: पराली न जलाकर और DSR अपनाकर किसानों के लिए मिसाल बने हरिंदर सिंह

Advertisement

नवीनतम

प्रोफेसर से बने पर्यावरण योद्धा: पराली न जलाकर और DSR अपनाकर किसानों के लिए मिसाल बने हरिंदर सिंह प्रोफेसर से बने पर्यावरण योद्धा: पराली न जलाकर और DSR अपनाकर किसानों के लिए मिसाल बने हरिंदर सिंह
पंजाब के मटन गांव के किसान और प्रोफेसर हरिंदर सिंह खेती में पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बनकर उभरे हैं। उन्होंने...
फतेहाबाद में जन शिकायत समिति की बैठक: मंत्री कृष्ण बेदी ने अपहरण मामले में SIT जांच के दिए आदेश, 8 शिकायतों का मौके पर निपटारा
सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर लाडोवाल टोल प्लाजा दो घंटे रहा टोल फ्री, कौमी इंसाफ मोर्चा का प्रदर्शन
कुरुक्षेत्र विवाद पर भड़का नर्सिंग स्टाफ, करनाल सिविल अस्पताल में दो घंटे की पेन-डाउन हड़ताल
जालंधर में खाद विक्रेताओं की बैठक, यूरिया के साथ अन्य उत्पाद बेचने पर सख्त चेतावनी
Copyright (c) Undekhi Khabar All Rights Reserved.
Powered By Vedanta Software