प्रोफेसर से बने पर्यावरण योद्धा: पराली न जलाकर और DSR अपनाकर किसानों के लिए मिसाल बने हरिंदर सिंह

मंडी गोबिंदगढ़ के प्रोफेसर हरिंदर सिंह ने फसल अवशेष प्रबंधन और डायरेक्ट सीडेड राइस तकनीक से बढ़ाई पैदावार, बचाया पानी और मिट्टी की सेहत सुधारी

On

पंजाब के मटन गांव के किसान और प्रोफेसर हरिंदर सिंह खेती में पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बनकर उभरे हैं। उन्होंने पराली जलाने की बजाय फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) और डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक अपनाकर न केवल अपनी पैदावार बढ़ाई, बल्कि अन्य किसानों को भी टिकाऊ खेती के लिए प्रेरित किया।

पर्यावरण दिवस मनाने तक सीमित नहीं, खेती में भी पर्यावरण बचाने का मिशन चला रहे हैं हरिंदर सिंह

जहां अधिकांश लोग विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक दिन के लिए मनाते हैं, वहीं पंजाब के मटन गांव निवासी Harinder Singh पूरे साल पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली और खेती का हिस्सा बनाए हुए हैं।

RIMT University में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हरिंदर सिंह खेतों में भी पर्यावरण के सच्चे प्रहरी बन चुके हैं। उन्होंने फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) और डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) जैसी आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाकर किसानों के लिए नई मिसाल पेश की है।


लॉकडाउन में शुरू हुआ खेती में प्रयोग का सफर

हरिंदर सिंह का यह सफर वर्ष 2020 के कोरोना लॉकडाउन के दौरान शुरू हुआ। उस समय वे घर से ऑनलाइन पढ़ा रहे थे और उन्हें खेती में नए प्रयोग करने का अवसर मिला।

उन्होंने उस काम को करने का फैसला किया जिससे अधिकांश किसान बचते हैं—पराली प्रबंधन।

पहली बार पराली नहीं जलाई

हरिंदर सिंह ने दो एकड़ भूमि में धान की पराली जलाने की बजाय उसे मिट्टी में मिलाकर गेहूं की बुवाई की।

उनका यह प्रयोग पहले ही वर्ष सफल साबित हुआ।

मिले कई फायदे

  • मिट्टी की उर्वरता बढ़ी
  • फसल उत्पादन में वृद्धि हुई
  • मिट्टी की संरचना बेहतर हुई
  • जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ी

हरिंदर सिंह का कहना है कि पराली को मिट्टी में मिलाने से उन्हें उम्मीद से बेहतर परिणाम मिले।


2024 में Surface Seeder तकनीक अपनाई

साल 2024 में उन्होंने Punjab Agricultural University द्वारा उपलब्ध कराए गए सरफेस सीडर का उपयोग शुरू किया।

इस तकनीक के तहत खेत में मौजूद फसल अवशेषों को हटाने के बजाय मल्च (Mulch) के रूप में उपयोग किया गया।

इससे हुए बड़े लाभ

  • मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रही
  • जल धारण क्षमता बढ़ी
  • खरपतवार की समस्या कम हुई
  • कीटनाशकों और खरपतवारनाशकों का खर्च घटा
  • अगली फसल की तैयारी जल्दी हो सकी

हरिंदर सिंह के अनुसार, इससे खेती की लागत कम हुई और उत्पादन बेहतर हुआ।


DSR तकनीक से पानी की बचत में बड़ी सफलता

फसल अवशेष प्रबंधन के बाद हरिंदर सिंह ने एक और बड़ा कदम उठाया और पारंपरिक धान रोपाई की जगह Direct Seeded Rice (DSR) तकनीक को अपनाया।

DSR से क्या लाभ हुआ?

  • पानी की खपत लगभग एक-तिहाई कम हुई
  • मजदूरी खर्च में कमी आई
  • खेत में नमी का बेहतर उपयोग हुआ
  • खरपतवार नियंत्रण आसान हुआ
  • कीटनाशकों पर निर्भरता घटी

उन्होंने बताया कि पारंपरिक धान की खेती में जहां काफी पानी वाष्पित हो जाता है, वहीं DSR तकनीक में पानी सीधे मिट्टी में समाहित होकर बेहतर उपयोग में आता है।


किसानों को भी कर रहे हैं जागरूक

हरिंदर सिंह केवल खुद तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने आसपास के किसानों को भी अपनी सफलता की कहानी दिखाई और उन्हें पर्यावरण-अनुकूल खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।

किसानों को समझाए फायदे

  • पराली जलाने से बचाव
  • समय और लागत की बचत
  • उत्पादन में वृद्धि
  • प्रदूषण में कमी
  • मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार

उन्होंने बताया कि कई किसानों ने फसल अवशेष प्रबंधन अपनाया है, लेकिन अभी भी DSR तकनीक अपनाने में झिझक दिखाई देती है।


नुकसान होने पर खुद भरपाई करने का भी दिया भरोसा

हरिंदर सिंह ने किसानों का विश्वास जीतने के लिए एक अनोखा कदम उठाया।

उन्होंने कहा कि यदि कोई किसान उनके कहने पर DSR अपनाता है और उसे नुकसान होता है, तो वे उसकी भरपाई अपनी जेब से करने को तैयार हैं।

यह उनका खेती और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण दर्शाता है।


कृषि विभाग को खेतों तक पहुंचने की सलाह

हरिंदर सिंह का मानना है कि केवल जागरूकता शिविर लगाने या साहित्य बांटने से बदलाव नहीं आएगा।

उन्होंने कहा कि यदि पंजाब में DSR तकनीक को सफल बनाना है, तो कृषि विभाग के अधिकारियों को सीधे खेतों में जाकर किसानों के साथ काम करना होगा और उन्हें व्यावहारिक सहायता प्रदान करनी होगी।


Key Highlights:

  • मटन गांव के प्रोफेसर हरिंदर सिंह बने पर्यावरण संरक्षण की मिसाल
  • 2020 में पराली न जलाकर शुरू किया फसल अवशेष प्रबंधन
  • मिट्टी की उर्वरता और उत्पादन में हुआ सुधार
  • 2024 में Surface Seeder तकनीक अपनाई
  • DSR तकनीक से पानी की खपत लगभग एक-तिहाई कम हुई
  • कीटनाशकों और मजदूरी पर खर्च घटा
  • अन्य किसानों को भी पर्यावरण-अनुकूल खेती के लिए कर रहे प्रेरित

FAQ Section:

Q1. हरिंदर सिंह कौन हैं?

वे मटन गांव के निवासी, प्रोफेसर और प्रगतिशील किसान हैं जो पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा दे रहे हैं।

Q2. उन्होंने पराली प्रबंधन कब शुरू किया?

उन्होंने वर्ष 2020 में लॉकडाउन के दौरान यह प्रयोग शुरू किया।

Q3. DSR तकनीक क्या है?

Direct Seeded Rice (DSR) धान की ऐसी तकनीक है जिसमें सीधे बीज बोए जाते हैं और पारंपरिक रोपाई की आवश्यकता नहीं होती।

Q4. DSR तकनीक से क्या लाभ हुआ?

पानी की बचत, मजदूरी खर्च में कमी और कीटनाशकों पर निर्भरता घटने जैसे कई फायदे मिले।

Q5. हरिंदर सिंह किसानों को क्या संदेश दे रहे हैं?

वे किसानों को पराली न जलाने और आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल खेती तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।


Conclusion:

हरिंदर सिंह की कहानी यह साबित करती है कि यदि किसान नई तकनीकों और पर्यावरण-अनुकूल उपायों को अपनाएं तो खेती को अधिक लाभदायक और टिकाऊ बनाया जा सकता है। पराली प्रबंधन और DSR जैसी तकनीकों के जरिए उन्होंने न केवल अपनी खेती को बेहतर बनाया, बल्कि पंजाब के किसानों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत किया है।Screenshot_2259

Edited By: Karan Singh

खबरें और भी हैं

प्रोफेसर से बने पर्यावरण योद्धा: पराली न जलाकर और DSR अपनाकर किसानों के लिए मिसाल बने हरिंदर सिंह

Advertisement

नवीनतम

प्रोफेसर से बने पर्यावरण योद्धा: पराली न जलाकर और DSR अपनाकर किसानों के लिए मिसाल बने हरिंदर सिंह प्रोफेसर से बने पर्यावरण योद्धा: पराली न जलाकर और DSR अपनाकर किसानों के लिए मिसाल बने हरिंदर सिंह
पंजाब के मटन गांव के किसान और प्रोफेसर हरिंदर सिंह खेती में पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बनकर उभरे हैं। उन्होंने...
फतेहाबाद में जन शिकायत समिति की बैठक: मंत्री कृष्ण बेदी ने अपहरण मामले में SIT जांच के दिए आदेश, 8 शिकायतों का मौके पर निपटारा
सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर लाडोवाल टोल प्लाजा दो घंटे रहा टोल फ्री, कौमी इंसाफ मोर्चा का प्रदर्शन
कुरुक्षेत्र विवाद पर भड़का नर्सिंग स्टाफ, करनाल सिविल अस्पताल में दो घंटे की पेन-डाउन हड़ताल
जालंधर में खाद विक्रेताओं की बैठक, यूरिया के साथ अन्य उत्पाद बेचने पर सख्त चेतावनी
Copyright (c) Undekhi Khabar All Rights Reserved.
Powered By Vedanta Software