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करनाल में खाद-बीज व्यापारियों की हड़ताल, कंपनियों की ‘जबरन टैगिंग’ का विरोध
यूरिया-DAP के साथ अन्य उत्पाद थोपने पर नाराजगी, मांगें पूरी न होने पर अनिश्चितकालीन बंद की चेतावनी
करनाल में खाद, बीज और कीटनाशक व्यापारियों ने कंपनियों द्वारा जबरन उत्पाद थोपने के खिलाफ एक दिन की हड़ताल की और सरकार से नीति में बदलाव की मांग की।
करनाल जिला खाद, कीटनाशक और बीज विक्रेता संघ ने सोमवार को एक दिन की हड़ताल कर कंपनियों और थोक विक्रेताओं द्वारा सब्सिडी वाले खाद (जैसे यूरिया और DAP) के साथ अन्य अनचाहे कृषि उत्पाद जबरन थोपने की प्रथा का विरोध किया।
सोमवार को न्यू ग्रेन मार्केट में संघ के अध्यक्ष राम कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में व्यापारियों की बैठक हुई, जिसमें इस प्रथा का कड़ा विरोध किया गया।
गुप्ता ने कहा कि जब सीलबंद कीटनाशक के नमूने गुणवत्ता परीक्षण में फेल हो जाते हैं, तो डीलरों को “पहला पक्ष” (first party) बनाया जाता है, जबकि ये उत्पाद कंपनियों द्वारा टैग कर जबरन उन्हें दिए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को कई बार सरकार और वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष उठाया गया है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। “जबरन टैगिंग की प्रथा बंद होनी चाहिए। जिन उत्पादों को रखने के लिए डीलरों को मजबूर किया जाता है, उनकी विफलता के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता,” गुप्ता ने कहा।
उन्होंने बताया, “हमने एक दिन की सांकेतिक हड़ताल की है, जिसमें सभी संबद्ध व्यापारियों ने भाग लिया। यदि सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो हमें अपनी दुकानें अनिश्चितकाल के लिए बंद करने पर मजबूर होना पड़ सकता है।”
व्यापारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं—
सब्सिडी वाले खाद के साथ गैर-सब्सिडी उत्पादों की अनिवार्य बिक्री पर रोक लगाई जाए, जैसा कि उत्तर प्रदेश सरकार की नीति में है;
कंपनियां खाद सीधे डीलरों के बिक्री केंद्र तक पहुंचाएं;
बढ़ती लागत और महंगाई को देखते हुए डीलर मार्जिन कम से कम 8 प्रतिशत किया जाए।

