राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं से पहले उम्र सत्यापन की प्रक्रिया बनी परेशानी, अस्पतालों के चक्कर लगा रहे युवा खिलाड़ी

फतेहाबाद में खिलाड़ियों को कोहनी, गर्दन और छाती के एक्स-रे के लिए भेजे जाने का दावा; ग्रामीण खिलाड़ियों का अभ्यास और समय दोनों प्रभावित

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राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं के लिए चयनित युवा खिलाड़ी इन दिनों मैदान में अभ्यास करने के बजाय उम्र सत्यापन के लिए अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं। खिलाड़ियों और अभिभावकों का कहना है कि जांच प्रक्रिया में घंटों लग रहे हैं।

 

राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं के लिए चयनित युवा खिलाड़ियों के सामने उम्र सत्यापन की प्रक्रिया अब बड़ी परेशानी बनती जा रही है। फतेहाबाद में कई खिलाड़ी इन दिनों खेल मैदान पर अभ्यास करने के बजाय अस्पतालों में जांच के लिए घंटों इंतजार करते नजर आ रहे हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले कई खिलाड़ी सिविल अस्पताल में एक्स-रे कक्ष के बाहर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि स्कूलों की ओर से जारी स्लिप के आधार पर उन्हें उम्र सत्यापन के लिए कोहनी, गर्दन और छाती के एक्स-रे कराने के लिए भेजा जा रहा है।

H2: कई खिलाड़ियों को एक से ज्यादा एक्स-रे कराने पड़ रहे

खिलाड़ियों के अनुसार, उम्र सत्यापन के लिए अलग-अलग हिस्सों के एक्स-रे कराने पड़ रहे हैं। सिविल अस्पताल में जबड़े का एक्स-रे उपलब्ध नहीं होने के कारण कुछ खिलाड़ियों को निजी केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है।

बताया गया है कि निजी केंद्रों पर एक खिलाड़ी को एक्स-रे के लिए करीब 400 से 900 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।

इस अतिरिक्त खर्च का बोझ खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों पर पड़ रहा है, जबकि ग्रामीण इलाकों से आने वाले खिलाड़ियों को अस्पताल और निजी जांच केंद्र तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त समय भी लग रहा है।

H2: अभ्यास का समय हो रहा प्रभावित

खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों का कहना है कि उम्र सत्यापन की पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले खिलाड़ियों के लिए परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि उन्हें आने-जाने, अस्पताल में इंतजार करने, जांच कराने और रिपोर्ट हासिल करने में कई घंटे लग जाते हैं।

खिलाड़ियों का कहना है कि राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं नजदीक होने के कारण इस समय मैदान पर अभ्यास बेहद जरूरी है। लेकिन जांच प्रक्रिया में समय जाने के कारण उनके नियमित अभ्यास पर असर पड़ रहा है।

H2: सिविल अस्पताल के अधिकारी ने भी उठाया सवाल

सिविल अस्पताल के एक अधिकारी के अनुसार, पहले उम्र सत्यापन की प्रक्रिया मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों के लिए की जाती थी।

अब अंडर-11 और अंडर-14 वर्ग के खिलाड़ियों को भी एक्स-रे के लिए भेजा जा रहा है। अधिकारी के मुताबिक कुछ बच्चों के दो से तीन एक्स-रे तक किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों के मामले में अनावश्यक या बार-बार एक्स-रे कराने से बचना चाहिए। अधिकारी ने इस मुद्दे को जिला शिक्षा अधिकारी के सामने भी उठाया, लेकिन उनके अनुसार वहां से संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

H3: छोटे खिलाड़ियों के लिए प्रक्रिया पर उठे सवाल

अंडर-11 और अंडर-14 वर्ग में शामिल बच्चों की कम उम्र को देखते हुए बार-बार एक्स-रे कराने की आवश्यकता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

अस्पताल अधिकारी का कहना है कि जहां जांच जरूरी हो, वहां प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए, लेकिन अनावश्यक या दोहराए गए एक्स-रे से बचना जरूरी है।

H2: खेल विभाग ने मुख्यालय के निर्देशों का दिया हवाला

सहायक शिक्षा अधिकारी (खेल) केवल कंबोज ने बताया कि इस वर्ष विभाग के मुख्यालय की ओर से राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए चयनित खिलाड़ियों की उम्र सत्यापन के उद्देश्य से मेडिकल जांच कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।

इसी निर्देश के तहत खिलाड़ियों को मेडिकल परीक्षण और उम्र सत्यापन के लिए भेजा जा रहा है।

हालांकि, खिलाड़ियों और अभिभावकों की चिंता यह है कि प्रक्रिया को इस तरह व्यवस्थित किया जाए कि उनकी तैयारी और प्रतियोगिताओं से पहले का अभ्यास प्रभावित न हो।

Key Highlights:

  • राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए चयनित खिलाड़ी उम्र सत्यापन के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं।
  • फतेहाबाद सिविल अस्पताल में कई खिलाड़ी एक्स-रे कक्ष के बाहर इंतजार करते दिखे।
  • खिलाड़ियों को कोहनी, गर्दन और छाती के एक्स-रे कराने की बात सामने आई है।
  • सिविल अस्पताल में जबड़े का एक्स-रे उपलब्ध नहीं होने से कुछ खिलाड़ी निजी केंद्रों पर जा रहे हैं।
  • निजी केंद्रों पर करीब 400 से 900 रुपये खर्च होने की बात कही गई है।
  • ग्रामीण खिलाड़ियों का आने-जाने और जांच में कई घंटे का समय लग रहा है।
  • खिलाड़ियों के अनुसार इससे राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं की तैयारी प्रभावित हो रही है।
  • अस्पताल अधिकारी ने अंडर-11 और अंडर-14 खिलाड़ियों के कई एक्स-रे कराए जाने पर चिंता जताई।
  • अधिकारी ने अनावश्यक या बार-बार एक्स-रे से बचने की जरूरत बताई।
  • खेल विभाग ने मुख्यालय के निर्देश पर मेडिकल जांच कराने की बात कही है।

FAQ Section:

खिलाड़ियों को एक्स-रे के लिए क्यों भेजा जा रहा है?
राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए चयनित खिलाड़ियों की उम्र सत्यापन के लिए मेडिकल जांच के तहत एक्स-रे कराने के निर्देश दिए गए हैं।

किन आयु वर्ग के खिलाड़ियों को जांच के लिए भेजा जा रहा है?
सिविल अस्पताल के अधिकारी के अनुसार अब अंडर-11 और अंडर-14 वर्ग के खिलाड़ियों को भी उम्र सत्यापन के लिए एक्स-रे कराया जा रहा है।

निजी केंद्रों पर एक्स-रे का कितना खर्च बताया गया है?
जिन खिलाड़ियों को जबड़े के एक्स-रे के लिए निजी केंद्रों पर जाना पड़ रहा है, उनके लिए करीब 400 से 900 रुपये तक खर्च होने की बात सामने आई है।

खिलाड़ियों को सबसे ज्यादा परेशानी किस बात से हो रही है?
खिलाड़ियों और अभिभावकों के अनुसार आने-जाने, अस्पताल में इंतजार करने, जांच और रिपोर्ट लेने में कई घंटे लग रहे हैं, जिससे खेल अभ्यास प्रभावित हो रहा है।

सिविल अस्पताल अधिकारी ने क्या चिंता जताई?
अधिकारी ने कहा कि छोटे बच्चों के मामले में अनावश्यक या बार-बार एक्स-रे कराने से बचना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे को जिला शिक्षा अधिकारी के सामने भी उठाया है।

खेल विभाग ने क्या कहा है?
सहायक शिक्षा अधिकारी (खेल) केवल कंबोज के अनुसार विभाग के मुख्यालय ने इस वर्ष राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए चयनित खिलाड़ियों की उम्र सत्यापन हेतु मेडिकल जांच के निर्देश दिए हैं।

Conclusion:

राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए चयनित खिलाड़ियों के उम्र सत्यापन की प्रक्रिया का उद्देश्य पात्रता सुनिश्चित करना है, लेकिन फतेहाबाद में इसकी मौजूदा व्यवस्था खिलाड़ियों और अभिभावकों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। अस्पतालों में घंटों लगने वाला समय, निजी जांच का खर्च और अभ्यास प्रभावित होने की शिकायतों के बीच जरूरत इस बात की है कि उम्र सत्यापन की प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और खिलाड़ियों के लिए सुविधाजनक बनाया जाए।Screenshot_734

Edited By: Atul Sharma

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