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अमृतसर में मिला आंध्र प्रदेश का 15 वर्षीय लापता किशोर, 5 दिन बाद परिवार से हुआ पुनर्मिलन
विशाखापत्तनम से 6 अगस्त को लापता हुआ था बच्चा; रेलवे चाइल्ड हेल्प डेस्क, बाल संरक्षण विभाग और बाल कल्याण समिति की मदद से परिजनों तक पहुंचा
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम से 6 अगस्त को लापता हुआ 15 वर्षीय किशोर अमृतसर में मिला। रेलवे चाइल्ड हेल्प डेस्क और बाल कल्याण समिति की मदद से उसकी पहचान कर 11 अगस्त को परिवार से मिलाया गया।
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम से लापता हुआ 15 वर्षीय किशोर अमृतसर में सुरक्षित मिल गया और उसे उसके परिवार से मिला दिया गया। बच्चा 6 अगस्त से लापता था। उसकी तलाश में रेलवे चाइल्ड हेल्प डेस्क, बाल संरक्षण विभाग और बाल कल्याण समिति (BKS), अमृतसर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बच्चे के तेलुगु भाषा बोलने के कारण शुरुआत में उसकी पहचान और परिवार की जानकारी हासिल करना चुनौतीपूर्ण रहा। काउंसलिंग के दौरान उसके विशाखापत्तनम से होने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मदद से उसके परिजनों का पता लगाया गया।
H2: रेलवे पुलिस को 6 अगस्त को मिली जानकारीबाल कल्याण समिति, अमृतसर के अधिवक्ता एमके शर्मा के अनुसार, 6 अगस्त को अमृतसर रेलवे पुलिस को किशोर के संबंध में जानकारी मिली थी।
सूचना मिलने के बाद रेलवे चाइल्ड हेल्प डेस्क सक्रिय हुआ और टीम ने किशोर को सुरक्षित बरामद किया। इसके बाद उसकी काउंसलिंग कराई गई ताकि उसके परिवार और घर के बारे में जानकारी हासिल की जा सके।
H2: तेलुगु बोलने के कारण परिवार का पता लगाने में आई मुश्किल
काउंसलिंग के दौरान पता चला कि किशोर विशाखापत्तनम का रहने वाला है। वह तेलुगु भाषा बोलता था, जिसके कारण शुरुआती स्तर पर उसके परिवार से जुड़ी जानकारी हासिल करना आसान नहीं था।
अधिवक्ता एमके शर्मा के अनुसार, बच्चे की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उसे Children's Home for Boys भेजा गया।
H2: विशाखापत्तनम प्रशासन की मदद से परिवार तक पहुंची टीम
किशोर के गृह क्षेत्र की जानकारी मिलने के बाद अमृतसर प्रशासन ने विशाखापत्तनम प्रशासन से संपर्क किया। इसके बाद पुलिस और Child Welfare Committee की सहायता ली गई।
समन्वित प्रयासों के जरिए किशोर के परिवार का पता लगाया गया और उसके माता-पिता को अमृतसर आने के लिए कहा गया।
H2: 11 अगस्त को माता-पिता से मिला किशोर
किशोर के माता-पिता 11 अगस्त को अमृतसर पहुंचे। आवश्यक पहचान प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्चे को उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया गया।
इस तरह रेलवे चाइल्ड हेल्प डेस्क, बाल संरक्षण विभाग और बाल कल्याण समिति के प्रयासों से कई दिनों से परिवार से दूर किशोर सुरक्षित अपने माता-पिता तक पहुंच सका।
H2: शिक्षक की डांट के बाद घर से निकला था बच्चा
परिवार ने बताया कि शिक्षक द्वारा डांटे जाने के बाद किशोर घर से निकल गया था। इसके बाद वह अपने परिवार से अलग हो गया और अमृतसर पहुंच गया।
बच्चे के परिवार तक पहुंचने और सुरक्षित वापसी में स्थानीय प्रशासन तथा बाल संरक्षण से जुड़े संस्थानों के बीच समन्वय अहम रहा।
Key Highlights:
- विशाखापत्तनम का 15 वर्षीय किशोर अमृतसर में मिला।
- किशोर 6 अगस्त से लापता था।
- अमृतसर रेलवे पुलिस को 6 अगस्त को उसके बारे में जानकारी मिली।
- रेलवे चाइल्ड हेल्प डेस्क ने उसे सुरक्षित बरामद किया।
- बाल संरक्षण विभाग और बाल कल्याण समिति ने भी मदद की।
- किशोर तेलुगु बोलता था, जिससे परिवार की जानकारी जुटाने में मुश्किल आई।
- उसे सुरक्षा के लिए Children's Home for Boys भेजा गया।
- विशाखापत्तनम प्रशासन, पुलिस और Child Welfare Committee की मदद से परिवार का पता चला।
- 11 अगस्त को उसके माता-पिता अमृतसर पहुंचे।
- पहचान की प्रक्रिया के बाद किशोर को परिवार से मिला दिया गया।
- परिवार के अनुसार शिक्षक की डांट के बाद वह घर से निकला था।
FAQ Section:
किशोर कहां का रहने वाला था?
15 वर्षीय किशोर आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम का रहने वाला था।
वह कब लापता हुआ था?
किशोर 6 अगस्त को लापता हुआ था।
किशोर अमृतसर में कैसे मिला?
अमृतसर रेलवे पुलिस को जानकारी मिलने के बाद रेलवे चाइल्ड हेल्प डेस्क ने कार्रवाई की और किशोर को सुरक्षित बरामद किया।
किशोर की पहचान करने में क्या परेशानी आई?
किशोर तेलुगु भाषा बोलता था, जिसके कारण शुरुआत में उसके परिवार और पते से जुड़ी जानकारी हासिल करने में कठिनाई हुई।
किशोर को कहां रखा गया था?
उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उसे Children's Home for Boys भेजा गया था।
परिवार से उसका पुनर्मिलन कब हुआ?
किशोर के माता-पिता 11 अगस्त को अमृतसर पहुंचे और पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे अपने साथ ले गए।
किशोर घर से क्यों निकला था?
परिवार के अनुसार शिक्षक द्वारा डांटे जाने के बाद किशोर घर से निकल गया था।
Conclusion:
विशाखापत्तनम से लापता हुए 15 वर्षीय किशोर को अमृतसर में सुरक्षित खोजकर उसके परिवार से मिलाने में रेलवे चाइल्ड हेल्प डेस्क, बाल संरक्षण विभाग और बाल कल्याण समिति की भूमिका महत्वपूर्ण रही। भाषा की चुनौती के बावजूद प्रशासन और पुलिस के समन्वित प्रयासों से बच्चे के परिजनों का पता लगाया गया। 11 अगस्त को माता-पिता के अमृतसर पहुंचने के बाद किशोर को सुरक्षित उनके सुपुर्द कर दिया गया।
