भूजल गिरावट से निपटने के लिए जल-संवेदनशील खेती अपनाने की अपील

डॉ. सी. श्रीनिवास राव ने किसानों से माइक्रो-इरिगेशन और नई तकनीकों अपनाने को कहा

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किसानों को गिरते भूजल स्तर से निपटने के लिए जल बचाने वाली खेती अपनाने की सलाह दी गई है। वैज्ञानिकों ने माइक्रो-इरिगेशन और डायरेक्ट सीडेड राइस जैसी तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया।

गिरते हुए भूजल स्तर को कृषि के लिए एक बड़ी चुनौती बताते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के निदेशक और कुलपति (नई दिल्ली) डॉ. सी. श्रीनिवास राव ने किसानों से जल-संवेदनशील खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने किसानों को माइक्रो-इरिगेशन (सूक्ष्म सिंचाई) तकनीकों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।

सोमवार को आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र करनाल में आयोजित प्रशिक्षण-cum-बीज वितरण कार्यक्रम के दौरान किसानों से बातचीत करते हुए डॉ. राव ने कहा कि कई राज्यों में भूजल स्तर में लगातार गिरावट चिंता का विषय बन गया है।

उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में धान जैसी अधिक पानी वाली फसलें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी के कारण बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं, वहां जल संकट और भी गंभीर हो रहा है। इसलिए किसानों को पानी बचाने वाली खेती की पद्धतियां अपनानी चाहिए

डॉ. राव ने बताया कि डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक पर भी शोध किया जा रहा है, ताकि खरपतवार प्रबंधन की समस्या का समाधान किया जा सके। उन्होंने कहा कि पारंपरिक धान की खेती के विकल्प के रूप में उपयुक्त राज्यों में DSR को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा भी आयोजित की जाएगी।

उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM‑RKVY) के तहत अनुसूचित जाति घटक परियोजना और Scheduled Caste Sub-Plan (SCSP) के अंतर्गत आयोजित किया गया।

डॉ. राव ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को बेहतर कृषि पद्धतियों, गुणवत्तापूर्ण बीजों और जलवायु-अनुकूल तकनीकों के बारे में जागरूक करना है, ताकि खेती की उत्पादकता और स्थिरता दोनों को बढ़ाया जा सके।

 
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Edited By: Karan Singh

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