डॉ. बीआर अंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (DBRANLU), सोनीपत द्वारा नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) के सहयोग से आयोजित तीसरी राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता-2026 का समापन तीन दिनों तक चली कानूनी बहस और शैक्षणिक गतिविधियों के बाद भव्य समारोह के साथ हुआ।
यह प्रतियोगिता 13 मार्च को शुरू हुई, जिसमें भाग लेने वाली टीमों का पंजीकरण और मेमोरियल की हार्ड कॉपी जमा कराई गई। उद्घाटन समारोह के साथ कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई, जिसके बाद टीमों के बीच लॉटरी निकालकर मेमोरियल का आदान-प्रदान किया गया। प्रतिभागियों की शोध और विश्लेषण क्षमता को परखने के लिए रिसर्चर्स टेस्ट भी आयोजित किया गया।
दूसरे दिन प्रारंभिक राउंड-I और II आयोजित किए गए, जिनमें प्रतिभागी टीमों ने प्रतिष्ठित जजों के सामने अपने कानूनी तर्क प्रस्तुत किए। प्रदर्शन के आधार पर शीर्ष टीमों ने क्वार्टरफाइनल राउंड में जगह बनाई, जहां वकालत और कानूनी तर्कों का स्तर और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया।
प्रतियोगिता का फाइनल राउंड एक प्रतिष्ठित जज पैनल द्वारा निर्णीत किया गया, जिसमें
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जस्टिस ओ.पी. शुक्ला और जस्टिस मिनी पुष्करणा — दिल्ली हाई कोर्ट
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जस्टिस पंकज जैन — पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट
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जस्टिस अशोक कुमार जैन — राजस्थान हाई कोर्ट
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जस्टिस अजय भनोट — इलाहाबाद हाई कोर्ट शामिल थे।
समापन समारोह में जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के न्यायाधीश, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि जस्टिस मिनी पुष्करणा, दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायाधीश विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. देविंदर सिंह ने मुख्य अतिथि का आभार व्यक्त करते हुए विभिन्न संस्थानों, संकाय सदस्यों और मूट कोर्ट सोसायटी की भागीदारी की सराहना की।
वहीं जोगिंदर सिंह, रजिस्ट्रार (लॉ), नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन ने प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए विश्वविद्यालय की प्रशंसा की और कहा कि मूटिंग के लिए स्पष्ट सोच, गहन तैयारी और समर्पण आवश्यक होता है।
जस्टिस अशोक कुमार जैन ने कहा कि मूट कोर्ट युवा वकीलों को यह सिखाते हैं कि वकालत केवल कानून की धाराओं में महारत हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नैतिकता और जिम्मेदारी को समझना भी जरूरी है।
वहीं जस्टिस मिनी पुष्करणा ने कहा कि कानून केवल जीविका कमाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सेवा करने और जरूरतमंदों को न्याय दिलाने का साधन भी है। उन्होंने विशेष रूप से महिला वकीलों को समर्पण, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास बनाए रखने की प्रेरणा दी।

