आयुर्वेदिक दवाओं के साइड इफेक्ट को नजरअंदाज न करें: कुलपति

प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा—दुष्प्रभावों की रिपोर्टिंग जरूरी, तभी होगा सही अध्ययन

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श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में विशेषज्ञों ने आयुर्वेदिक, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथिक दवाओं के दुष्प्रभावों की सही रिपोर्टिंग और फार्माकोविजिलेंस के महत्व पर जोर दिया।

श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि आयुर्वेदिक दवाओं के संभावित साइड इफेक्ट्स को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और इनके बारे में पूरी जानकारी के साथ रिपोर्ट करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि यह मान लेना सही नहीं है कि आयुर्वेदिक दवाओं से कभी कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। दरअसल, इस विषय पर पर्याप्त अध्ययन नहीं हो पाया है क्योंकि दुष्प्रभावों की रिपोर्ट करने की आदत अभी तक विकसित नहीं हुई है।

वे सोमवार को विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित “आयुर्वेद, सिद्ध, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सकों में फार्माकोविजिलेंस के प्रति जागरूकता” विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

इस कार्यक्रम में डॉ. अल्लमप्रभु गुड्डा, जो नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (NCISM) के आयुर्वेद बोर्ड के अध्यक्ष हैं, भी शामिल हुए।

सेमिनार में प्रमुख वक्ताओं में डॉ. तरुण शर्मा, सहायक प्रोफेसर, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, जयपुर और IPVC के समन्वयक, तथा डॉ. विधान महाजन, NPVC के समन्वयक शामिल थे।

कार्यक्रम में हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों से करीब 345 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

इस दौरान शोधकर्ताओं डॉ. सुनील गोदारा और डॉ. पियूष चौधरी ने भी सेमिनार में अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।

 
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Edited By: Karan Singh

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