एशियन गेम्स 2026: हरियाणा की परवीन हुड्डा ने जीता गोल्ड, गांव में जश्न का माहौल

रोहतक के रुड़की गांव की 26 वर्षीय बॉक्सर परवीन हुड्डा ने जापान में आयोजित एशियन गेम्स में महिला 65 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण पदक जीता। परिवार और ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटकर और पटाखे जलाकर जीत का जश्न मनाया।

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हरियाणा की बॉक्सर परवीन हुड्डा ने एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीतकर अपने गांव और परिवार को गौरवान्वित किया। इससे पहले वह डोपिंग नियमों के उल्लंघन के कारण प्रतिबंध का सामना कर चुकी थीं।

हरियाणा के रोहतक जिले के रुड़की गांव की 26 वर्षीय बॉक्सर परवीन हुड्डा ने एशियन गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। जापान के आइची-नागोया में आयोजित प्रतियोगिता में परवीन ने महिला 65 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में चीनी ताइपे की बॉक्सर चेन निएन-चेन को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

परवीन की इस उपलब्धि से उनके गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। जैसे ही उनकी जीत की खबर परिवार और ग्रामीणों तक पहुंची, घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने लड्डू बांटकर और पटाखे जलाकर जश्न मनाया।

11-12 साल की उम्र में शुरू किया था बॉक्सिंग का सफर

परवीन हुड्डा ने महज 11-12 साल की उम्र में गांव के मैदान से बॉक्सिंग का अभ्यास शुरू किया था। गांव के कोच विजय हुड्डा के अनुसार, वर्ष 2012 में परवीन ने बॉक्सिंग रिंग में कदम रखा था। उस समय कोच विजय हुड्डा और पूर्व सरपंच सुधीर हुड्डा गांव के स्टेडियम में खासकर लड़कियों को बॉक्सिंग के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे।

परवीन ने लगातार मेहनत और अनुशासन के साथ अपने खेल को निखारा। उनकी इसी मेहनत का परिणाम है कि आज उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल किया है।

डोपिंग प्रतिबंध के बाद की दमदार वापसी

परवीन हुड्डा का सफर चुनौतियों से भरा रहा है। उन्होंने वर्ष 2023 में हांगझोऊ एशियन गेम्स में कांस्य पदक जीता था। हालांकि, दिसंबर 2022 से मई 2024 के बीच लोकेशन संबंधी नियमों के तीन बार उल्लंघन के कारण उन्हें 22 महीने के प्रतिबंध का सामना करना पड़ा।

इस प्रतिबंध के चलते भारत ने उनके द्वारा हासिल किया गया 57 किलोग्राम वर्ग का ओलंपिक कोटा गंवा दिया था। इसके अलावा, उनका एशियन गेम्स का कांस्य पदक भी वापस ले लिया गया था।

इन मुश्किलों के बावजूद परवीन ने बॉक्सिंग में वापसी की और अब 65 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है।

ITBP में ASI हैं परवीन हुड्डा

परवीन हुड्डा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) के पद पर तैनात हैं। खेल के साथ-साथ वह अपने परिवार की जिम्मेदारियां भी निभाती हैं। उनकी मां नीलम गृहिणी हैं और परिवार की आर्थिक मदद के लिए दूध भी बेचती हैं।

परवीन के पिता लखपत हुड्डा पिछले चार वर्षों से कैंसर से जूझ रहे हैं। वह हृदय रोग से भी पीड़ित हैं। परिवार के पास थोड़ी-सी कृषि भूमि है। परवीन के ITBP में चयन के बाद परिवार को आर्थिक सहारा मिला और वह घर की जिम्मेदारियों में भी योगदान देने लगीं।

बेटी की जीत पर भावुक हुईं मां नीलम

परवीन की मां नीलम ने बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने परवीन की सफलता का श्रेय उसकी कड़ी मेहनत और खेल के प्रति समर्पण को दिया।

नीलम के अनुसार, परिवार ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। पिता की बीमारी के बीच परवीन ने अपने खेल को जारी रखा और परिवार का सहारा भी बनीं। अब उनकी अंतरराष्ट्रीय सफलता से पूरे गांव में खुशी का माहौल है।

मुख्य बातें

  • हरियाणा के रोहतक जिले के रुड़की गांव की परवीन हुड्डा ने एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीता।

  • उन्होंने महिला 65 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में चीनी ताइपे की चेन निएन-चेन को हराया।

  • परवीन ने 11-12 साल की उम्र में बॉक्सिंग शुरू की थी।

  • वर्ष 2023 के एशियन गेम्स में उन्होंने कांस्य पदक जीता था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया।

  • डोपिंग नियमों के उल्लंघन के कारण उन्हें 22 महीने का प्रतिबंध झेलना पड़ा था।

  • परवीन ITBP में ASI के पद पर तैनात हैं।

  • उनकी जीत पर गांव में लड्डू बांटकर और पटाखे जलाकर जश्न मनाया गया।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. परवीन हुड्डा कौन हैं?

परवीन हुड्डा हरियाणा के रोहतक जिले के रुड़की गांव की बॉक्सर हैं। वह ITBP में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) भी हैं।

2. परवीन हुड्डा ने एशियन गेम्स 2026 में कौन-सा पदक जीता?

परवीन हुड्डा ने महिला 65 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।

3. परवीन हुड्डा ने फाइनल में किसे हराया?

उन्होंने फाइनल मुकाबले में चीनी ताइपे की चेन निएन-चेन को हराया।

4. परवीन हुड्डा पर प्रतिबंध क्यों लगा था?

विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA) के नियमों के तहत 12 महीने की अवधि में तीन बार अपनी उपलब्धता संबंधी जानकारी देने में विफल रहने के कारण उन पर 22 महीने का प्रतिबंध लगाया गया था।

5. परवीन हुड्डा ने बॉक्सिंग कब शुरू की थी?

परवीन ने लगभग 11-12 साल की उम्र में बॉक्सिंग शुरू की थी। वर्ष 2012 में उन्होंने गांव के स्टेडियम में अभ्यास करना शुरू किया था।

निष्कर्ष

परवीन हुड्डा की एशियन गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतने की उपलब्धि उनके लंबे संघर्ष और मेहनत की कहानी को दर्शाती है। शुरुआती सफलता, प्रतिबंध और फिर बॉक्सिंग रिंग में वापसी के बाद उन्होंने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक हासिल किया है। उनकी जीत से रुड़की गांव में उत्सव का माहौल है और परिवार ने इस उपलब्धि पर गर्व जताया है।Screenshot_368

Edited By: Atul Sharma

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