देशी गायों की संख्या बढ़ाने का आह्वान, स्वास्थ्य और खेती से जोड़ा संबंध

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत बोले—प्राकृतिक खेती और देशी नस्ल ही भविष्य

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गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने पशुपालकों से देशी गायों की संख्या बढ़ाने और प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे भूमि की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य दोनों में सुधार होगा।

गुजरात के राज्यपाल Acharya Devvrat ने किसान-पशुपालकों से देशी गायों की संख्या बढ़ाने का आह्वान किया और कहा कि उपजाऊ भूमि तथा बेहतर स्वास्थ्य इसके साथ जुड़े हुए हैं। वे International Haryana Breed Cattle Show & Expo 2026 में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे, जो बहू अकबरपुर गांव स्थित International Institute of Veterinary Education and Research में आयोजित किया गया।

उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों द्वारा हरियाणा की देशी गायों और विदेशी नस्लों के दूध पर किए गए शोध से पता चलता है कि देशी गाय का दूध मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है, जबकि विदेशी नस्लों का दूध कुछ बीमारियों का कारण बन सकता है। उन्होंने दावा किया कि देशी गाय का दूध न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को मजबूत करता है, बल्कि बौद्धिक क्षमता को भी बढ़ाता है।

राज्यपाल ने बताया कि देशी गायों की संख्या तेजी से बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक प्रमुख है।
“इस तकनीक के माध्यम से एक ही देशी गाय से कई गायें उत्पन्न की जा सकती हैं। वर्तमान में राज्य में देशी गायों की संख्या सीमित है, लेकिन इस तकनीक से हजारों उच्च गुणवत्ता वाली गायें विकसित की जा सकती हैं, जो प्रतिदिन 20 से 22 किलोग्राम दूध दे सकती हैं,” उन्होंने कहा।

Acharya Devvrat ने यह भी कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता में भारी कमी आई है।
उन्होंने कहा, “इसे पुनः सुधारने के लिए देशी गाय आधारित प्राकृतिक खेती अपनाना जरूरी है। गोबर और गोमूत्र से बने जैविक उत्पाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं। एक ग्राम गोबर में लगभग 3 अरब लाभकारी बैक्टीरिया होते हैं, जबकि गोमूत्र खनिजों का समृद्ध स्रोत है।”

उन्होंने बताया कि Kurukshetra के गुरुकुल में जीवामृत और घन जीवामृत बनाने के लिए निःशुल्क प्रशिक्षण उपलब्ध है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि सुनिश्चित की जा सके और हर घर में देशी गाय पालन को बढ़ावा मिले।

इस अवसर पर उन्होंने संस्थान को 5 लाख रुपये की अनुदान राशि देने की घोषणा भी की। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए पशुओं का प्रदर्शन किया गया और आचार्य देवव्रत ने मंच पर देशी गाय का दूध निकालकर पशुपालकों को प्रेरित किया।Screenshot_2272

Edited By: Karan Singh

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