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हरियाणा में कथित फर्जी एनकाउंटर का मामला गरमाया, सरकार ने फैसला नहीं लिया तो हाईकोर्ट जाएगा रोर समाज
करनाल में 7 अगस्त को हरश और बीरबल की पुलिस मुठभेड़ में मौत की स्वतंत्र जांच की मांग; CBI या रिटायर्ड हाईकोर्ट जज से जांच कराने की मांग
रोर समाज ने करनाल में 7 अगस्त को हुई कथित पुलिस मुठभेड़ में दो युवकों की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग दोहराई है। सरकार से फैसला नहीं मिलने पर समाज ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट जाने की तैयारी की है।
हरियाणा के करनाल में 7 अगस्त को हुई कथित पुलिस मुठभेड़ को लेकर विवाद एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। रोर समाज ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार दो युवकों की मौत की स्वतंत्र जांच कराने की मांग पर फैसला नहीं लेती है, तो वह पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख करेगा।
समाज का आरोप है कि करनाल में हरश और कैथल के बीरबल की पुलिस कार्रवाई में हुई मौत की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। संगठन चाहता है कि मामले की जांच CBI या हाईकोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराई जाए।
रोर समाज की तीन मांगों में से दो मानी गईं
अखिल भारतीय रोर महासभा की रविवार को हुई बैठक में इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय की गई। बैठक की अध्यक्षता महासभा के अध्यक्ष बलकार सिंह ने की।समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार, उनकी तीन मांगों में से दो को सरकार ने स्वीकार कर लिया है।
कौन-कौन सी मांगें मानी गईं?
- करनाल विधायक जगमोहन आनंद द्वारा कथित बयानों को लेकर माफी।
- करनाल रेंज के IGP और करनाल के SP का तबादला।
- तीसरी मांग के तौर पर स्वतंत्र जांच अभी लंबित है।
रोर समाज का कहना है कि तीसरी मांग पर अब तक सरकार की ओर से कोई स्पष्ट फैसला नहीं आया है।
एक सप्ताह का दिया गया था समय
बलकार सिंह ने कहा कि पिछली बैठक में सरकार को स्वतंत्र जांच की मांग पर निर्णय लेने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया था। हालांकि, निर्धारित अवधि के बाद भी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि समाज को कुछ सूत्रों के माध्यम से जानकारी मिली है कि सरकार इस मामले में फैसला ले सकती है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
इसके लिए महासभा ने 11 सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति सोमवार से कानूनी प्रक्रिया पर काम शुरू करेगी।
क्यों उठी स्वतंत्र जांच की मांग?
यह पूरा मामला करनाल निवासी वीरू वाल्मीकि की हत्या के बाद शुरू हुआ। पुलिस के अनुसार, 5 अगस्त को बाइक सवार दो लोगों ने वीरू की कथित तौर पर हत्या कर दी थी।
इसके बाद पुलिस कार्रवाई में 7 अगस्त को हरश और बीरबल की मौत हो गई। पुलिस ने दावा किया था कि दोनों का संबंध वीरू वाल्मीकि की हत्या से था।
हरश की मौत के बाद रोर समाज में नाराजगी
हरश करनाल जिले के कला माजरा गांव का रहने वाला था और रोर समुदाय से संबंधित था। उसकी मौत के बाद समुदाय के लोगों ने पुलिस मुठभेड़ की परिस्थितियों पर सवाल उठाए और इसे कथित फर्जी एनकाउंटर बताया।
बीरबल कैथल जिले के मातरवा खेड़ी का निवासी था।
वीरू वाल्मीकि हत्याकांड से जुड़ा है विवाद
जानकारी के मुताबिक, वीरू वाल्मीकि की कथित हत्या से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram पर गैंगस्टर वंश के साथ विवाद हुआ था। यह विवाद कथित तौर पर “करनाल का बाप कौन” जैसे दावों को लेकर हुआ था।
वीरू की हत्या के बाद वाल्मीकि समुदाय और उसके परिवार में नाराजगी फैल गई थी। प्रदर्शनकारियों ने शुरुआत में शव उठाने से इनकार कर दिया था और सड़क जाम कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
इसके बाद करनाल विधायक जगमोहन आनंद पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और परिवार को आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था।
पश्चिमी यमुना नहर बाईपास के पास हुआ था एनकाउंटर
7 अगस्त को हरश और बीरबल की पुलिस मुठभेड़ वेस्टर्न यमुना कैनाल बाईपास के पास हुई थी। पुलिस का दावा था कि दोनों युवक वीरू वाल्मीकि हत्याकांड से जुड़े थे।
हालांकि, हरश के रोर समुदाय से होने के कारण समाज ने मुठभेड़ पर गंभीर सवाल उठाए और स्वतंत्र जांच की मांग शुरू कर दी।
मुख्यमंत्री से भी मिल चुका है प्रतिनिधिमंडल
रोर समुदाय के प्रतिनिधियों ने 13 अगस्त को मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। उस दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें 16 अगस्त तक इंतजार करने को कहा था और स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों का हवाला दिया था।
इसके बाद जब सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो समुदाय ने 24 अगस्त को करनाल में पंचायत की। इसके बाद शहर में विरोध मार्च भी निकाला गया।
समुदाय ने 30 अगस्त को तरावड़ी में प्रस्तावित मुख्यमंत्री की रैली के बहिष्कार की चेतावनी भी दी थी। हालांकि, बाद में हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र का हवाला देते हुए रैली स्थगित कर दी गई।
स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंपी गई जांच
विवाद बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच ADGP संजय कुमार के नेतृत्व वाली स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंप दी।
हालांकि, रोर समाज इस कदम से संतुष्ट नहीं है। समुदाय का कहना है कि पुलिस विभाग की एजेंसी के बजाय CBI या हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
अब हाईकोर्ट जाने की तैयारी
बलकार सिंह के मुताबिक, समाज कानूनी रास्ते से अपनी मांग आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। 11 सदस्यीय समिति अब मामले से जुड़े कानूनी कदमों पर काम करेगी।
समाज का कहना है कि दोनों युवकों की मौत की परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई के पीछे की पूरी स्थिति स्पष्ट करने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है। अब सरकार के अगले फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं।
Key Highlights:
- करनाल में कथित पुलिस एनकाउंटर को लेकर रोर समाज नाराज।
- 7 अगस्त को हरश और बीरबल की पुलिस कार्रवाई में मौत हुई थी।
- पुलिस ने दोनों को वीरू वाल्मीकि हत्याकांड से जुड़ा बताया था।
- रोर समाज ने एनकाउंटर को कथित फर्जी बताते हुए सवाल उठाए।
- CBI या रिटायर्ड हाईकोर्ट जज से जांच की मांग।
- तीन मांगों में से दो स्वीकार होने का समाज का दावा।
- स्वतंत्र जांच की मांग अभी लंबित।
- मामले के लिए 11 सदस्यीय समिति बनाई गई।
- सरकार ने जांच स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंपी है।
- रोर समाज ने मांग पूरी नहीं होने पर हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी।
FAQ Section:
Q1. रोर समाज हाईकोर्ट जाने की बात क्यों कह रहा है?
Answer: समाज करनाल में 7 अगस्त को हुई पुलिस मुठभेड़ में हरश और बीरबल की मौत की स्वतंत्र जांच चाहता है। सरकार से निर्णय नहीं मिलने पर हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है।
Q2. रोर समाज किस तरह की जांच चाहता है?
Answer: समाज CBI या हाईकोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग कर रहा है।
Q3. हरश और बीरबल की मौत कब हुई थी?
Answer: दोनों की मौत 7 अगस्त को करनाल में वेस्टर्न यमुना कैनाल बाईपास के पास हुई पुलिस मुठभेड़ में हुई थी।
Q4. पुलिस ने दोनों युवकों को किस मामले से जोड़ा था?
Answer: पुलिस ने दोनों को 5 अगस्त को हुई वीरू वाल्मीकि की हत्या से कथित तौर पर जुड़ा बताया था।
Q5. सरकार ने मामले की जांच किसे सौंपी है?
Answer: राज्य सरकार ने जांच ADGP संजय कुमार के नेतृत्व वाली स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंपी है।
Conclusion:
करनाल एनकाउंटर को लेकर रोर समाज और सरकार के बीच विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है। जहां सरकार ने जांच स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंप दी है, वहीं समाज इससे संतुष्ट नहीं है और स्वतंत्र जांच की मांग पर कायम है। अब यदि सरकार इस मांग पर जल्द फैसला नहीं लेती, तो 11 सदस्यीय समिति के जरिए हाईकोर्ट में कानूनी कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।
