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हरियाणा में सस्ते प्लॉट पर बने निजी अस्पतालों पर लोकायुक्त की सख्ती, गरीबों को नहीं मिल रहा मुफ्त इलाज
HSVP और HSIIDC ने रियायती दरों पर 29 अस्पताल साइटें आवंटित कीं, लेकिन BPL और EWS मरीजों के लिए मुफ्त या सब्सिडी वाले इलाज की व्यवस्था पर सवाल
हरियाणा लोकायुक्त ने कहा है कि रियायती दरों पर सरकारी जमीन हासिल करने वाले कई निजी अस्पताल गरीब मरीजों को मुफ्त या रियायती इलाज नहीं दे रहे हैं। लोकायुक्त ने सरकार से नीति को जल्द लागू करने की सिफारिश की है।
हरियाणा में रियायती दरों पर सरकारी जमीन हासिल कर बनाए गए निजी अस्पतालों में गरीब मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। हरियाणा लोकायुक्त ने कहा है कि HSVP और HSIIDC द्वारा रियायती दरों पर आवंटित जमीन पर बने निजी अस्पतालों में गरीब मरीजों को मुफ्त या सब्सिडी वाला इलाज उपलब्ध कराने की शर्त को प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है।
लोकायुक्त के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) और हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम (HSIIDC) इस व्यवस्था को लागू कराने के लिए अब तक प्रभावी तंत्र विकसित नहीं कर सके हैं।
गरीब मरीजों के इलाज की नीति लागू करने की सिफारिश
लोकायुक्त न्यायमूर्ति हरि पाल वर्मा (सेवानिवृत्त) ने सक्षम प्राधिकारी और मुख्यमंत्री से सिफारिश की है कि गरीब मरीजों को इलाज में मिलने वाली रियायत से संबंधित नीति को जल्द अंतिम रूप दिया जाए।उन्होंने कहा कि नीति को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे प्रभावी रूप से लागू किया जाना चाहिए, ताकि समाज के गरीब वर्ग को इसका वास्तविक लाभ मिल सके।
HSVP ने 21 अस्पताल साइटें रियायती दर पर दीं
कार्यवाही के दौरान HSVP ने जानकारी दी कि उसने अलग-अलग वर्षों में 21 अस्पताल साइटें रियायती दरों पर आवंटित की थीं।
इनमें शामिल हैं:
- गुरुग्राम में 5 साइटें
- फरीदाबाद में 7
- पंचकूला में 4
- हिसार में 3
- रेवाड़ी में 1
- सोनीपत में 1
इन आवंटनों में गुरुग्राम के मेदांता, मैक्स, फोर्टिस हार्ट एंड मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल और आर्टेमिस मेडिकेयर जैसे अस्पताल शामिल हैं। फरीदाबाद में सर्वोदय अस्पताल और मेट्रो अस्पताल तथा पंचकूला में ओजस मेडिकल सर्विसेज और साक अस्पताल का भी उल्लेख किया गया।
गरीब मरीजों के इलाज की शर्त थी शामिल
HSVP की ओर से बताया गया कि इन अस्पतालों को जमीन आवंटित करते समय BPL और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के मरीजों को मुफ्त या रियायती इलाज उपलब्ध कराने की शर्त नियम एवं शर्तों में शामिल की गई थी।
इसके बावजूद इस शर्त के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर लोकायुक्त ने सवाल उठाए हैं।
HSIIDC ने भी रियायती दरों पर अस्पताल साइटें आवंटित कीं
HSIIDC ने लोकायुक्त के समक्ष बताया कि उसने भी अलग-अलग समय में 8 अस्पताल साइटें रियायती दरों पर आवंटित की थीं।
इनमें गुरुग्राम के मानेसर स्थित रॉकलैंड अस्पताल और पंचकूला का पार्क वेलनेस सर्विसेज शामिल हैं। HSIIDC के अनुसार, इन अस्पतालों पर भी गरीब मरीजों को मुफ्त या सब्सिडी वाला इलाज उपलब्ध कराने की शर्त लागू थी।
2016 में शुरू हुई थी लोकायुक्त की कार्यवाही
इस मामले में लोकायुक्त के समक्ष कार्यवाही की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी। गुरुग्राम निवासी RTI कार्यकर्ता असीम टक्यार ने HSIIDC के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में रॉकलैंड अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया गया था।
जांच में सामने आया था नियम लागू न करने का मामला
लोकायुक्त के रजिस्ट्रार की प्रारंभिक जांच में यह निष्कर्ष सामने आया कि HSIIDC अस्पताल के साथ हुए कन्वेयंस डीड की धारा 13 को लागू कराने में विफल रहा। यह धारा गरीब मरीजों को सब्सिडी वाला इलाज उपलब्ध कराने से संबंधित थी।
HSIIDC के तत्कालीन जनरल मैनेजर, फाइनेंस-कम-CEO महावीर सिंह ने तथ्य-जांच के दौरान यह भी कहा था कि अस्पताल में किसी EWS मरीज को रेफर नहीं किया गया था, इसलिए अस्पताल की ओर से नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ।
स्वास्थ्य विभाग को भी जानकारी नहीं थी
वर्ष 2022 में लोकायुक्त की कार्यवाही के दौरान तत्कालीन गुरुग्राम डिप्टी चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. रेनू सरोहा भी पेश हुई थीं।
उन्होंने बताया था कि स्वास्थ्य विभाग को इस बात की जानकारी नहीं थी कि HSIIDC ने रॉकलैंड अस्पताल को रियायती दर पर जमीन आवंटित की थी।
यह मामला सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी को भी सामने लाता है।
2022 में HSVP ने बनाई EWS मरीजों के लिए नीति
मामले के दौरान वर्ष 2022 में HSVP ने EWS मरीजों के लिए रियायत से संबंधित नीति जारी की। इसके बाद HSIIDC ने भी इस नीति को अपनाने का फैसला किया।
अब लोकायुक्त ने इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने और गरीब मरीजों तक इसका लाभ पहुंचाने पर जोर दिया है।
Key Highlights:
- हरियाणा लोकायुक्त ने निजी अस्पतालों में गरीब मरीजों के इलाज पर सवाल उठाए।
- HSVP और HSIIDC ने रियायती दरों पर अस्पतालों के लिए जमीन आवंटित की।
- HSVP ने 21 अस्पताल साइटें आवंटित की थीं।
- HSIIDC ने 8 अस्पताल साइटें आवंटित की थीं।
- BPL और EWS मरीजों को मुफ्त या सब्सिडी वाला इलाज देने की शर्त थी।
- लोकायुक्त के अनुसार, नियम लागू कराने के लिए प्रभावी तंत्र नहीं बनाया गया।
- मामले की कार्यवाही 2016 में RTI कार्यकर्ता असीम टक्यार की शिकायत पर शुरू हुई।
- 2022 में HSVP ने EWS मरीजों के लिए रियायत संबंधी नीति बनाई।
- HSIIDC ने भी HSVP की नीति अपनाई।
- लोकायुक्त ने मुख्यमंत्री से नीति को जल्द लागू करने की सिफारिश की।
FAQ Section:
Q1. हरियाणा लोकायुक्त ने निजी अस्पतालों को लेकर क्या कहा?
Answer: लोकायुक्त ने कहा कि रियायती दरों पर सरकारी जमीन हासिल करने वाले अस्पतालों में गरीब मरीजों को मुफ्त या सब्सिडी वाला इलाज देने की शर्त प्रभावी रूप से लागू नहीं हो रही है।
Q2. HSVP ने कितनी अस्पताल साइटें रियायती दर पर आवंटित कीं?
Answer: HSVP ने अलग-अलग वर्षों में 21 अस्पताल साइटें रियायती दरों पर आवंटित की थीं।
Q3. HSIIDC ने कितनी अस्पताल साइटें आवंटित कीं?
Answer: HSIIDC ने बताया कि उसने आठ अस्पताल साइटें रियायती दरों पर आवंटित की थीं।
Q4. किन मरीजों के लिए मुफ्त या रियायती इलाज की शर्त थी?
Answer: अस्पतालों के आवंटन की शर्तों में BPL और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS मरीजों को मुफ्त या सब्सिडी वाला इलाज देने का प्रावधान शामिल था।
Q5. मामले की लोकायुक्त कार्यवाही कब शुरू हुई थी?
Answer: मामले में लोकायुक्त की कार्यवाही वर्ष 2016 में RTI कार्यकर्ता असीम टक्यार की शिकायत के बाद शुरू हुई थी।
Conclusion:
हरियाणा लोकायुक्त की टिप्पणी ने रियायती दरों पर सरकारी जमीन हासिल करने वाले निजी अस्पतालों में गरीब मरीजों के लिए निर्धारित स्वास्थ्य सुविधाओं की निगरानी और क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अब मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों से नीति को स्पष्ट रूप से लागू करने की उम्मीद है, ताकि BPL और EWS वर्ग के मरीजों को निर्धारित मुफ्त या रियायती इलाज का वास्तविक लाभ मिल सके।
