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करनाल में सफाई संकट गहराया, डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने वाले कर्मचारी भी हड़ताल में शामिल
12 दिनों से जारी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के समर्थन में उतरे कर्मचारी, शहर में कूड़े के ढेर लगने लगे
Karnal में सफाई व्यवस्था का संकट मंगलवार को और गहरा गया, जब घर-घर से कूड़ा संग्रह करने वाले कर्मचारियों ने भी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन कर काम बंद कर दिया। इससे शहर में कूड़ा निस्तारण व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।
Karnal में मंगलवार को सफाई संकट और गहरा गया, जब डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रह करने वाले कर्मचारियों ने भी सफाई कर्मचारियों की जारी हड़ताल का समर्थन करते हुए काम बंद कर दिया। इससे पूरे शहर में कचरा निस्तारण व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हो गई।
पिछले 12 दिनों से सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं। अब घर-घर जाकर कूड़ा इकट्ठा करने वाले कर्मचारियों के समर्थन में आने से आवासीय कॉलोनियों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता और सफाई व्यवस्था और बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है।
कर्मचारी 1 मई से अपनी मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में संविदा कर्मचारियों को नियमित करना, न्यूनतम वेतन लागू करना और अग्निशमन सेवा कर्मचारियों की लंबित मांगों को पूरा करना शामिल है।जानकारी के अनुसार, डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रह का काम संभालने वाली निजी एजेंसी से जुड़े 287 कर्मचारी और 97 कचरा संग्रह वाहन मंगलवार को सड़कों पर नहीं उतरे।
इसके कारण शहर की लगभग सभी कॉलोनियों में वे वाहन नहीं पहुंचे, जिनमें ‘स्वच्छ भारत का इरादा कर लिया हमने’ गीत बजाते हुए घरों से कचरा एकत्र किया जाता था। नतीजतन सड़कों और बाजारों में कूड़े के ढेर लगने लगे।
निजी एजेंसी के एक कर्मचारी ने कहा, “हमने हड़ताल का समर्थन किया है और उनकी मांगें पूरी होने तक आज से घर-घर जाकर कूड़ा संग्रह नहीं करेंगे।”
हड़ताल का असर पूरे शहर में साफ दिखाई दिया। कूड़ेदान भर गए और कई जगहों पर कचरा नहीं उठने से लोगों और दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। यदि हड़ताल लंबी चली तो स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है।
सोमवार को कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल 14 मई तक बढ़ाने का फैसला लिया था।
Municipal Employees Union के करनाल इकाई अध्यक्ष राज कुमार और अन्य पदाधिकारियों ने डोर-टू-डोर कचरा संग्रह करने वाली एजेंसी के कर्मचारियों का समर्थन देने के लिए आभार जताया।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की एकजुटता से आंदोलन को मजबूती मिलेगी और सरकार उनकी मांगें मानने के लिए मजबूर होगी।


