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सीएम नायब सिंह सैनी का विपक्ष पर हमला, खरीद प्रक्रिया को बताया पारदर्शी
किसानों को गुमराह करने का आरोप, सरकार ने हर दाना खरीदने का किया दावा
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि राज्य में फसल खरीद प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सुचारु है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर फसल खरीद को लेकर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने सभी मंडियों में सुचारु, पारदर्शी और बिना किसी परेशानी के खरीद प्रक्रिया सुनिश्चित की है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सैनी ने बताया कि हर मंडी में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, जबकि अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों को जिला स्तर पर जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा मंत्री, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस मौके पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी भी मौजूद थे।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए सैनी ने कहा, “उनके 10 साल के शासनकाल में प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर रही और किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।” उन्होंने आरोप लगाया कि पहले किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए मंडियों के बाहर 3 से 7 दिन तक इंतजार करना पड़ता था, बोरी (गनny बैग) की कमी रहती थी और बारिश के कारण फसल खराब हो जाती थी। कई बार किसानों को अपनी जेब से तिरपाल की व्यवस्था करनी पड़ती थी।
उन्होंने कांग्रेस से यह भी सवाल किया कि उनके कार्यकाल में कितने गोदाम बनाए गए। उन्होंने कहा कि खरीद में कटौती, भुगतान में देरी और मात्र 2 रुपये का मुआवजा देना किसानों के प्रति पिछली सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए सैनी ने कहा, “हम किसानों द्वारा पैदा किए गए एक-एक दाने की खरीद करेंगे।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस की नीतियां जनकल्याण के बजाय सीमित हितों के लिए काम करती थीं।
खरीद के आंकड़े साझा करते हुए उन्होंने बताया कि 28 मार्च से सरसों की 16,046 मीट्रिक टन आवक हुई, जिसमें से 3,421 मीट्रिक टन की खरीद की जा चुकी है। इसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 6,200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से 4.94 करोड़ रुपये का भुगतान DBT के जरिए किया गया है।
गेहूं की खरीद, जो 1 अप्रैल से शुरू हुई, में 17.37 लाख मीट्रिक टन आवक दर्ज की गई, जिसमें से 3.92 लाख मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है। इसके लिए MSP 2,585 रुपये प्रति क्विंटल के अनुसार 13.09 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
