Dayanand Mahila Mahavidyalaya में 41वें वार्षिक खेलकूद समारोह का समापन

मुख्य अतिथि डॉ. विजेश्वरी शर्मा ने विजेताओं को किया सम्मानित, कंवलजीत बनीं सर्वश्रेष्ठ एथलीट

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दयार्नद महिला महाविद्यालय में आयोजित 41वें वार्षिक खेलकूद समारोह का समापन उत्साह और उमंग के साथ हुआ। विभिन्न प्रतियोगिताओं में छात्राओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जबकि कंवलजीत को सत्र 2025–26 की सर्वश्रेष्ठ एथलीट घोषित किया गया।

दयार्नद महिला महाविद्यालय में आयोजित 41वें वार्षिक खेलकूद समारोह का समापन समारोह शुक्रवार को संपन्न हुआ। समापन दिवस पर विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

4×100 मीटर रिले दौड़ में काजल, खुशबू, प्रेरणा और कंवलजीत की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। भावना, खुशी, सिमरन और मेहक की टीम द्वितीय स्थान पर रही, जबकि मनप्रीत कौर, वंदना, रूपिंदर कौर और हर्षिता की टीम ने तृतीय स्थान हासिल किया।

स्लो साइक्लिंग प्रतियोगिता में मेहक ने प्रथम, कनिष्का ने द्वितीय और मुस्कान ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। बोरी दौड़ में अंशु प्रथम, मीनू द्वितीय और निशा तृतीय रहीं।

800 मीटर दौड़ में कंवलजीत ने प्रथम, काजल ने द्वितीय और खुशबू ने तृतीय स्थान हासिल किया। 400 मीटर दौड़ में भी कंवलजीत ने प्रथम, काजल ने द्वितीय और भावना ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

4×400 मीटर रिले दौड़ में काजल, खुशबू, प्रेरणा और कंवलजीत की टीम प्रथम स्थान पर रही। मनप्रीत कौर, वंदना, रूपिंदर कौर और हर्षिता की टीम ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया, जबकि वंशिका, कशिश, निशा और वंशिका की टीम तृतीय स्थान पर रही।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व प्राचार्या डॉ. विजेश्वरी शर्मा ने सभी विजेताओं को पदक एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया। सत्र 2025–26 के लिए ‘सर्वश्रेष्ठ एथलीट’ का पुरस्कार बीए तृतीय वर्ष की छात्रा कंवलजीत को प्रदान किया गया। उन्हें स्वर्गीय श्रीमती महिमा देवी स्मृति पुरस्कार के अंतर्गत 1,100 रुपये की नकद राशि भी भेंट की गई। यह पुरस्कार भर्तेंदु ढुल द्वारा स्थापित किया गया है।

अपने संबोधन में मुख्य अतिथि ने कहा कि प्राचीन भारतीय संस्कृति में महिलाओं को अत्यंत सम्मानित और पूजनीय स्थान प्राप्त था। गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषी महिलाओं ने दर्शन और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देकर नारी सम्मान को बढ़ाया। विदेशी आक्रमणों के दुष्प्रभाव के कारण समय के साथ महिलाओं की स्थिति में गिरावट आई।

उन्होंने कहा कि Swami Dayanand Saraswati, जिनके आदर्शों पर यह महाविद्यालय स्थापित है, ने महिलाओं को पुनः सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए विशेष प्रयास किए। उन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि आज महिलाएं न केवल अन्य क्षेत्रों में, बल्कि खेलों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं।

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Edited By: Karan Singh

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