आयुष्मान भारत योजना पर बहस के बीच हरियाणा विधानसभा से कांग्रेस का वॉकआउट

निजी अस्पतालों द्वारा इलाज से इनकार के आरोपों पर सीएम सैनी के जवाब से असंतुष्ट रहा विपक्ष

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आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों द्वारा मरीजों को इलाज से इनकार करने के आरोपों को लेकर हरियाणा विधानसभा में तीखी बहस हुई। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

Indian National Congress के विधायकों ने सोमवार को Haryana Vidhan Sabha से वॉकआउट कर दिया। यह कदम उन्होंने मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini के उस जवाब से असंतुष्ट होकर उठाया, जिसमें निजी अस्पतालों द्वारा Ayushman Bharat योजना के तहत इलाज से इनकार किए जाने के आरोपों को खारिज किया गया था।

कांग्रेस विधायक Ashok Arora, BB Batra और Geeta Bhukkal ने इस मुद्दे पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव रखा था। उनका आरोप था कि करीब 600 निजी अस्पतालों ने सरकार की ओर से 700 से 800 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान के कारण मरीजों का इलाज करने से इनकार कर दिया है, जिससे राज्य में स्वास्थ्य आपात स्थिति जैसी स्थिति बन रही है।

सरकार ने आरोपों को बताया गलत

स्वास्थ्य मंत्री Aarti Singh Rao ने सदन को बताया कि फरवरी 2026 में (21 फरवरी तक) निजी अस्पतालों की ओर से 33,911 प्री-ऑथराइजेशन अनुरोध भेजे गए, जो औसतन प्रतिदिन 1,615 के आसपास हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में सूचीबद्ध निजी अस्पतालों ने कुल 5.92 लाख क्लेम दायर किए, यानी प्रतिदिन औसतन 1,804 क्लेम। वहीं जनवरी और फरवरी 2026 के दौरान 82,563 क्लेम दाखिल किए गए, जिनका औसत 1,588 प्रतिदिन रहा।

मंत्री ने कहा कि ये आंकड़े दर्शाते हैं कि योजना का उपयोग लगातार जारी है और यह कहना तथ्यात्मक रूप से गलत है कि हाल के महीनों में लाभार्थियों को इलाज से वंचित किया गया है।

भुगतान और लंबित राशि का विवरण

मंत्री ने बताया कि वर्ष 2024-25 में निजी अस्पतालों ने 1,236 करोड़ रुपये के क्लेम जमा किए थे, जिनमें से 1,100 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया, यानी 89 प्रतिशत क्लेम का निपटान हो चुका है।

करीब 136 करोड़ रुपये (लगभग 11 प्रतिशत) के क्लेम लंबित हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए करीब 1,128 करोड़ रुपये के क्लेम देय होने का अनुमान है, जिनमें से 918 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। वर्तमान में करीब 200 करोड़ रुपये के क्लेम प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में हैं।

कांग्रेस विधायकों ने उठाए सवाल

बहस के दौरान कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की भारी कमी है, जबकि निजी अस्पतालों के बिल महीनों से लंबित पड़े हैं।

विधायक बीबी बत्रा ने योजना के पैकेज रेट पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई बड़ी सर्जरी निजी अस्पतालों में योजना के तहत कवर नहीं होतीं।

उन्होंने कहा, “आईसीयू में भर्ती के लिए केवल 1,000 रुपये की अनुमति है, जो बहुत कम है। अन्य पैकेजों की स्थिति भी ऐसी ही है।”

मुख्यमंत्री का जवाब

इस पर हस्तक्षेप करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा कि पिछले पांच महीनों में किसी भी लाभार्थी की ओर से ऐसा कोई शिकायत नहीं आई है, जिसमें यह कहा गया हो कि आयुष्मान भारत योजना के तहत भुगतान न होने के कारण अस्पताल ने इलाज से इनकार किया हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी अस्पतालों द्वारा किए गए क्लेम का उचित सत्यापन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि अस्पताल मरीजों को भर्ती करने से इनकार कर रहे होते तो इतनी बड़ी संख्या में प्री-ऑथराइजेशन अनुरोध नहीं आते।Screenshot_1670

Edited By: Karan Singh

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