प्राकृतिक खेती से मिट्टी स्वस्थ रहेगी, उत्पादन भी बढ़ेगा: श्याम सिंह राणा

एनडीआरआई के राष्ट्रीय डेयरी मेला एवं कृषि एक्सपो 2026 के समापन समारोह में किसानों को दिया संदेश

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कृषि एवं पशुपालन मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि प्राकृतिक और जैविक खेती से मिट्टी की सेहत बेहतर रहती है, जिससे कृषि उत्पादन भी अच्छा होता है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करने और पशुपालन पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया।

Shyam Singh Rana, कृषि एवं पशुपालन मंत्री, ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है जहां पहले प्राकृतिक और जैविक खेती की परंपरा रही है। समय के साथ किसानों ने खेतों में रासायनिक उर्वरकों का अधिक उपयोग करना शुरू कर दिया, जिससे मिट्टी को काफी नुकसान हुआ है।

उन्होंने कहा कि देश के लोग दूध और दही का सेवन करते हुए सेना में सेवा कर चुके हैं और ओलंपिक में भी पदक जीत चुके हैं।

मंत्री ने किसानों को मिट्टी की सेहत बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि यदि जैविक खेती के माध्यम से मिट्टी स्वस्थ रहेगी तो कृषि उत्पादन भी बेहतर होगा।

वे National Dairy Mela and Agri Expo 2026 के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे, जिसका आयोजन ICAR-National Dairy Research Institute (NDRI) द्वारा किया गया था।

उर्वरकों का उपयोग कम करने की अपील

श्याम सिंह राणा ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करने और पशुपालन को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने एनडीआरआई की सराहना करते हुए कहा कि हरियाणा सरकार को अपने अधिकारियों को यहां भेजकर वैज्ञानिकों के साथ चर्चा करनी चाहिए ताकि कृषि क्षेत्र का बेहतर विकास सुनिश्चित किया जा सके।

संस्थान के निदेशक ने बताया कि इस मेले का मुख्य उद्देश्य किसानों और पशुपालकों को संस्थान द्वारा विकसित नवीनतम तकनीकों और तरीकों की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना था।

उन्होंने बताया कि देश में लगभग 7 से 8 करोड़ लोग डेयरी क्षेत्र पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर हैं, जबकि अमेरिका में केवल 24 से 25 हजार लोग ही पशुपालन से जुड़े हैं।

महिलाओं की भूमिका का किया उल्लेख

International Women’s Day के अवसर पर मंत्री ने डेयरी क्षेत्र में नई तकनीकों का उपयोग कर आजीविका कमा रही महिलाओं का विशेष उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि एनडीआरआई पिछले 100 वर्षों से अधिक समय से दूध उत्पादन, पोषण, रोग नियंत्रण और उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

‘कर्न फ्राइज’ नस्ल पर जोर

इस अवसर पर उन्होंने Karn Fries cattle breed का विशेष उल्लेख किया, जिसे हाल ही में भारत सरकार के साथ पंजीकृत किया गया है।

उन्होंने किसानों को बताया कि क्लोनिंग और ओवम पिकअप तकनीक की सफलता के बाद 30 प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिनमें एनडीआरआई महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मेले में 125 स्टॉल लगाए गए

तीन दिन तक चले इस डेयरी मेले में संस्थान के वैज्ञानिकों ने किसानों और पशुपालकों की समस्याओं का समाधान आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किया।

मेले में कुल 125 स्टॉल और प्रदर्शनी लगाई गईं, जिनमें

  • 16 स्टॉल एनडीआरआई के

  • 8 स्टॉल Indian Council of Agricultural Research (ICAR) के

  • और 70 व्यावसायिक स्टॉल शामिल थे।

इस दौरान किसान और पशुपालक अपने करीब 400 पशु प्रतियोगिता के लिए लेकर आए थे। विजेताओं को पुरस्कार भी दिए गए। कार्यक्रम में Gopal Ratan Award प्राप्त करने वाले पशुपालकों का भी विशेष उल्लेख किया गया।

 
 
Edited By: Karan Singh

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