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एनडीआरआई, करनाल में डॉ. डी सुंदरासन मेमोरियल ओरेशन आयोजित, डॉ. मनमोहन सिंह चौहान सम्मानित
डेयरी पशुओं में सहायक प्रजनन तकनीक पर व्याख्यान; ‘विकसित भारत 2047’ का रोडमैप प्रस्तुत
ICAR-National Dairy Research Institute, करनाल में 22वें दीक्षांत समारोह से पूर्व आयोजित अकादमिक पखवाड़े के तहत डॉ. डी सुंदरासन मेमोरियल ओरेशन का आयोजन किया गया, जिसमें Manmohan Singh Chauhan को वर्ष 2025 का सम्मान प्रदान किया गया।
22वें दीक्षांत समारोह की तैयारियों के तहत चल रहे अकादमिक पखवाड़ा कार्यक्रमों के अंतर्गत ICAR-National Dairy Research Institute (एनडीआरआई), Karnal के डॉ. डी सुंदरासन सभागार में प्रतिष्ठित ‘डॉ. डी सुंदरासन मेमोरियल ओरेशन’ का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक Dheer Singh ने की। उन्होंने मुख्य अतिथि Manmohan Singh Chauhan, कुलपति, Govind Ballabh Pant University of Agriculture and Technology (पंतनगर, उत्तराखंड) का स्वागत किया। डॉ. चौहान को वर्ष 2025 के लिए डॉ. डी सुंदरासन मेमोरियल ओरेशन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
डॉ. सिंह ने डॉ. चौहान को एक प्रतिष्ठित पशु वैज्ञानिक बताते हुए कहा कि वे ICAR-Central Institute for Research on Goats, मथुरा के पूर्व निदेशक तथा एनडीआरआई, करनाल के भी पूर्व निदेशक रह चुके हैं। उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप, आईसीएआर टीम अवॉर्ड तथा विभिन्न वैज्ञानिक संस्थाओं की फेलोशिप प्राप्त हो चुकी हैं।
डॉ. चौहान ने भारतीय पशुधन में सेक्स्ड सीमन तकनीक, भ्रूण प्रत्यारोपण, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) तथा विश्व के पहले भैंस के क्लोन बछड़े के उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभाई है।
उन्होंने ‘डेयरी पशुओं में सहायक प्रजनन तकनीक (ART): विकसित भारत 2047 की दिशा में एक रोडमैप’ विषय पर व्याख्यान दिया। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि ART तकनीकों के माध्यम से भारत के डेयरी क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि कृत्रिम गर्भाधान को 33 प्रतिशत कवरेज तक बढ़ाकर, 58 लाख डोज सेक्स्ड सीमन का उपयोग कर तथा 25,895 IVF/भ्रूण प्रत्यारोपण कर प्रति पशु दूध उत्पादन को दोगुना किया जा सकता है। इससे कुल दुग्ध उत्पादन 400–500 मिलियन टन तक पहुंच सकता है, जिससे निर्यात के माध्यम से सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में प्रतिवर्ष 3–5 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि संभव है।
उन्होंने यह भी कहा कि इससे 1 से 1.5 करोड़ (10–15 मिलियन) नए रोजगार सृजित हो सकते हैं और ग्रामीण आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
